
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला रांची के झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला जाना है। सीरीज के पहले मुकाबले में एकतरफा और करारी शिकस्त झेलने के बाद मेहमान कैरेबियाई टीम बैकफुट पर नजर आ रही है। लखनऊ में खेले गए सीरीज के शुरुआती मुकाबले में भारतीय टीम ने गेंद और बल्ले दोनों से जिस तरह का दबदबा दिखाया, उसने वेस्टइंडीज के थिंक टैंक को अपनी रणनीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। मैच की पूर्व संध्या पर वेस्टइंडीज के गेंदबाजी कोच और पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज रवि रामपाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी टीम की कमजोरियों और आगामी मुकाबले की रूपरेखा पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में माना कि अगर वेस्टइंडीज को इस सीरीज में वापसी करनी है, तो उनके बल्लेबाजों को भारतीय स्पिनरों की फिरकी का तोड़ निकालना ही होगा।
रवि रामपाल ने रांची में आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा कि टीम को भारतीय स्पिनरों के सामने लगातार डॉट गेंदें खेलने से बचना होगा और सिंगल-डबल लेकर स्ट्राइक रोटेट करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मैच का विश्लेषण करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि वेस्टइंडीज ने तेज शुरुआत की थी, लेकिन पावरप्ले खत्म होते-होते निकोलस पूरन, शिमरोन हेटमायर और रोवमैन पॉवेल के रूप में अपने तीन प्रमुख विकेट गंवा दिए। इसके बाद भारतीय स्पिनरों ने बीच के ओवरों में शिकंजा कसते हुए कैरेबियाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया और पूरी टीम 19.1 ओवर में 171 रन पर सिमट गई। रामपाल ने कहा कि मध्यक्रम में शिमरोन हेटमायर और शाई होप स्पिन गेंदबाजी को बहुत बेहतर तरीके से खेलते हैं। जब ये बल्लेबाज क्रीज पर टिककर पारी को आगे बढ़ाते हैं, तो टीम हमेशा एक बड़ा और चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने में कामयाब होती है। इसलिए दूसरे मैच में मुख्य रणनीति यही होगी कि स्पिन के माहिर बल्लेबाज अंत तक टिककर खेलें।
पहले टी20 मुकाबले में भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने अविश्वसनीय बल्लेबाजी का मुजाहिरा पेश किया था। 172 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने शुरुआती झटकों के बावजूद महज 14.4 ओवरों में ही मैच अपने नाम कर लिया और सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। कप्तान श्रेयस अय्यर ने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला तूफानी शतक जड़ते हुए नाबाद 102 रनों की पारी खेली, जिसमें 10 गगनचुंबी चौके और 6 दर्शनीय छक्के शामिल थे। दूसरे छोर पर ईशान किशन ने सूझबूझ भरी बल्लेबाजी करते हुए स्ट्राइक रोटेट करने का काम किया। रवि रामपाल ने इस बात को खुले तौर पर स्वीकार किया कि टीम मीटिंग में गेंदबाजों के साथ जो योजनाएं तैयार की गई थीं, मैदान पर गेंदबाज उन्हें सही तरीके से लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे। उन्होंने कहा कि जब ड्रेसिंग रूम में बनाई गई रणनीति का पालन मैदान पर नहीं होता, तो एक कोच के तौर पर यह बेहद निराशाजनक अनुभव होता है।
वेस्टइंडीज की टीम के लिए रांची का यह मुकाबला करो या मरो की स्थिति जैसा बन चुका है, क्योंकि अगर टीम यहां भी चूकती है तो सीरीज में वापसी की राह बेहद कठिन हो जाएगी। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई एकदिवसीय सीरीज में भी कैरेबियाई बल्लेबाज भारतीय स्पिनरों की फिरकी को समझने में नाकाम रहे थे और वही पुरानी कमजोरी लखनऊ के पहले टी20 मैच में भी खुलकर सामने आ गई। रांची की पिच पर भी स्पिनरों को अतिरिक्त मदद मिलने की पूरी संभावना है, ऐसे में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को तकनीक और संयम दोनों का परिचय देना होगा। रामपाल का मानना है कि उनकी टीम में बड़े शॉट्स लगाने वाले कई आक्रामक खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन आधुनिक टी20 क्रिकेट में सिर्फ बाउंड्री लगाने के भरोसे नहीं रहा जा सकता, बल्कि भारतीय परिस्थितियों में बीच के ओवरों की समझ ही जीत और हार का सबसे बड़ा अंतर तय करती है।
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