सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं और मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना रखने वाली कुंवारी कन्याओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पावन पर्व मनाया जाता है, जो इस वर्ष 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को पड़ …
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आज का राशिफल 12 सितंबर 2026: शनिवार को कन्या राशि में चंद्रमा का संचार, जानें मेष से मीन तक सभी राशियों का दैनिक भविष्यफल
शनिवार, 12 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा उपरांत द्वितीया तिथि रहेगी। चंद्रमा पूरे दिन कन्या राशि में बुध देव के प्रभाव क्षेत्र में गोचर करेंगे और दोपहर तक उत्तर फाल्गुनी के बाद हस्त नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। शनिवार के अधिपति शनिदेव और कन्या के व्यावहारिक चंद्रमा का यह संयोग कार्यक्षेत्र में अनुशासन, सटीकता, योजनाबद्ध निवेश और हिसाब-किताब …
Read More »Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर को विराजेंगे बप्पा, 25 को विसर्जन; फिर 26 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, जानें शुभ मुहूर्त और पूरा पंचांग
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व गणेशोत्सव पूरे देश में श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का त्योहार 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर 2026 को प्रातःकाल 07:06 …
Read More »मासिक शिवरात्रि कब है, 9 या 10 सितंबर? जानें सही तारीख, निशिता काल पूजा मुहूर्त और पारण का समय
वैदिक पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों का यह अटल नियम है कि मासिक शिवरात्रि की पूजा मुख्य रूप से मध्यरात्रि यानी ‘निशिता काल’ (Nishita Kaal) में की जाती है। इसलिए जिस …
Read More »हरतालिका तीज 2026: यूपी-बिहार की अनोखी परंपरा, निर्जला व्रत और सोलह श्रृंगार का महापर्व
भारतवर्ष की सांस्कृतिक विविधता में त्योहारों का एक अलग और अनूठा स्थान है, जो न केवल हमारी प्राचीन परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखने का काम भी करते हैं। सावन और भाद्रपद के महीनों में आने वाले पर्वों में ‘तीज’ का त्योहार महिलाओं के लिए सबसे खास माना जाता है। देश के अलग-अलग …
Read More »शादी के बाद एक ही थाली में क्यों खाते हैं दूल्हा-दुल्हन, ज्योतिषाचार्य ने बताए इसके गहरे और हैरान करने वाले रहस्य
भारतीय सनातन संस्कृति और परंपराओं की दुनिया हमेशा से ही अपनी अनोखी और गहरी मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती रही है। हमारे देश में होने वाली हर एक शादी और उसमें निभाई जाने वाली छोटी-बड़ी रस्मों के पीछे कोई न कोई बहुत बड़ा सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक या ज्योतिषीय कारण अवश्य छिपा होता है। आधुनिकता की इस दौर …
Read More »राधा अष्टमी 2026: 18 या 19 सितंबर, सही तारीख, उदया तिथि, शुभ मुहूर्त, भोग और संपूर्ण पूजन विधि
सनातन धर्म और पंचांग के अनुसार, हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ ‘राधा अष्टमी’ (Radha Ashtami 2026) का पावन पर्व मनाया जाता है। यह विशेष दिन जगत की संचालिका और भगवान श्रीकृष्ण की अर्धांगिनी श्री राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, …
Read More »स्वप्न शास्त्र: सपने में जीवनसाथी के साथ दोबारा शादी होते देखना क्या संकेत देता है इसके गहरे मायने
सपनों की एक बहुत ही रहस्यमयी और अनोखी दुनिया होती है, जो हमारी चेतना के स्तर से परे जाकर भविष्य की कई अनकही घटनाओं और हमारे मन की गुप्त इच्छाओं का पर्दाफाश करती है। जब हम रात की गहरी नींद में सोते हैं, तो हमारा अवचेतन मन विभिन्न प्रकार के दृश्यों और छवियों को बुनता है, जिन्हें स्वप्न शास्त्र (Swapna …
Read More »लड्डू गोपाल की छठी पर विशेष रूप से क्यों लगाया जाता है कढ़ी-चावल का भोग? जानिए इसके पीछे का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म और कृष्ण भक्ति की परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल को अपने घर के एक छोटे सदस्य की तरह मानने और उनकी हर सेवा को बहुत ही लाड़-प्यार के साथ निभाने की अनूठी संस्कृति रही है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर जब कान्हा जी का जन्मोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, तो उसके …
Read More »श्राद्धपक्ष में अपनी राशि के अनुसार करें इन चीजों का गुप्त दान, प्रसन्न होकर पितृ करेंगे आपकी हर मनोकामना पूरी और चमकाएंगे भाग्य
सनातन संस्कृति और वैदिक ज्योतिष में पितृ पक्ष यानी श्राद्धकाल का समय हमारे पूर्वजों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण काल माना जाता है। पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाले इस 16 दिवसीय पितृ पक्ष के …
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