दिवाली में किस दिन निकलेगा यम का दीपक? अकाल मृत्यु का भय होगा दूर

प्रकाश के महापर्व दीपावली की शुरुआत होते ही चारों तरफ खुशियों और उल्लास का माहौल छा जाता है, लेकिन इस पांच दिवसीय उत्सव में धनतेरस के दिन एक बेहद खास और प्राचीन परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘यम दीपम’ या ‘यम का दीपक’ जलाना कहा जाता है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के इस पावन अवसर पर केवल माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की ही पूजा नहीं की जाती, बल्कि मृत्यु के देवता कहे जाने वाले यमराज की भी विशेष आराधना की जाती है। परिवार के सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और उनके जीवन से अकाल मृत्यु (Akaal Mrityu) के भय को दूर करने के लिए यह दीपक बेहद श्रद्धा के साथ जलाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में इस बात का स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति धनतेरस की शाम को विधि-विधान से यमराज के निमित्त दीपक दान करता है, उसके घर में अकाल मृत्यु का संकट और तमाम प्रकार की बुरी शक्तियां दूर रहती हैं।

यम दिया जलाने की सही तारीख, प्रदोष काल और पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष यानी 2026 में धनतेरस और यम दीपम का यह पवित्र पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे तक मान्य रहेगी। चूंकि प्रदोष काल में यम का दीपक जलाने की परंपरा है, इसलिए 6 नवंबर 2026 की शाम को ही मुख्य रूप से यम का दिया प्रज्वलित किया जाएगा। उत्तर भारत के प्रमुख शहरों जैसे नई दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी में धनतेरस की पूजा तथा प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त शाम को लगभग 5:45 बजे से रात 7:57 बजे के बीच रहेगा। इस दौरान सूर्यास्त के तुरंत बाद या मुख्य घर की पूजा संपन्न होने के पश्चात परिवार के बुजुर्ग सदस्य या मुखिया द्वारा यमराज के नाम का यह विशेष दीपक जलाया जाता है, जिसका समय शाम ढलते ही सबसे उत्तम माना गया है।

यम का दीपक जलाने की सही विधि, दिशा और आधुनिक एआई सर्च व एसईओ आधारित खास बातें

यम का दीपक जलाने के कुछ खास और कड़े नियम होते हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है। इस दिन आटे या मिट्टी का एक चौमुखी (चार मुंह वाला) अथवा सामान्य साफ-सुथरा दीपक लिया जाता है, जिसमें सरसों का तेल या तिल का तेल डाला जाता है। इसके बाद इस दीपक को प्रज्वलित करके घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ रखा जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। दीपक जलाते समय यमराज से हाथ जोड़कर यह प्रार्थना की जाती है कि वे परिवार के किसी भी सदस्य पर अपनी अकृपा न करें और सभी को निरोगी व दीर्घायु जीवन प्रदान करें। दीपक रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। आधुनिक Generative Engine Optimization (AI सर्च), Answer Engine Optimization (AEO) और Google Discover की गाइडलाइंस के अनुसार इस प्रकार के सांस्कृतिक और पारंपरिक त्योहारों की सटीक जानकारी इंटरनेट पर ढूंढने वाले पाठकों को प्रादेशिक और सही तथ्यात्मक विवरण मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी परंपराओं का निर्वाह पूरी शुद्धता के साथ कर सकें।