पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में दहला अमन मेला: डेरा इस्माइल खान के दराजिंदा में भीषण बम विस्फोट

उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान का अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत शनिवार की शाम एक बार फिर जोरदार बम धमाके से दहल उठा। डेरा इस्माइल खान जिले के दराजिंदा इलाके में आयोजित एक स्थानीय ‘अमन मेला’ के समीप यह कायराना हमला हुआ, जहां आम नागरिक, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में जुटे हुए थे। अचानक हुए इस शक्तिशाली विस्फोट की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके का प्रभाव इतना तीव्र था कि आसपास के अस्थायी स्टॉल और वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। विस्फोट के तुरंत बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

स्थानीय बचाव दल ‘रेस्क्यू 1122’ ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि इस दिल दहला देने वाले हमले में अब तक कम से कम 11 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मृतकों की संख्या में अभी और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि कई घायलों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। विस्फोट स्थल पर चारों तरफ मलबा बिखर गया, जिससे राहत और बचाव कर्मियों को शुरुआती दौर में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

धमाके की सूचना मिलते ही दराजिंदा स्टेशन और डेरा इस्माइल खान मुख्यालय से रेस्क्यू 1122 की कई एंबुलेंस और आपदा प्रबंधन टीमें घटनास्थल पर रवाना की गईं। राहत कर्मियों ने स्थानीय निवासियों की मदद से तुरंत घायलों को मलबे से बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। गंभीर रूप से घायल मरीजों को तुरंत नजदीकी जिला मुख्यालय अस्पताल (DHQ Hospital) और कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) में भर्ती कराया गया है।

अस्पताल प्रशासन ने आपातकाल लागू करते हुए सभी डॉक्टरों, सर्जनों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं तथा अतिरिक्त ब्लड यूनिट्स का प्रबंध किया गया है। चिकित्सकों के मुताबिक घायलों में से कई लोग विस्फोट के छर्रों और आग की लपटों से गंभीर रूप से झुलसे हैं। कुछ मरीजों को बेहतर न्यूरोसर्जिकल और क्रिटिकल केयर सुविधाओं के लिए पेशावर के प्रमुख अस्पतालों में एयरलिफ्ट करने की योजना भी बनाई जा रही है। स्थानीय नागरिकों ने भी अस्पतालों के बाहर पहुंचकर रक्तदान करने में सक्रिय सहयोग दिया है।

हमले के कुछ ही घंटों बाद प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने एक बयान जारी कर इस विस्फोट की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी ले ली है। अफगानिस्तान की सीमा से सटा खैबर पख्तूनख्वा का यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से इस्लामिक चरमपंथियों और विद्रोही गुटों की हिंसक गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ‘अमन मेला’ जैसे जन-उत्सव को निशाना बनाने के पीछे आतंकियों का मुख्य मकसद इलाके में शांति बहाली की हर कोशिश को नाकाम करना और खौफ पैदा करना है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में टीटीपी के हमलों में भारी वृद्धि देखी गई है। यह संगठन लगातार पुलिस चौकियों, सैन्य काफिलों, खुफिया प्रतिष्ठानों और अब सार्वजनिक कार्यक्रमों को अपना निशाना बना रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती घुसपैठ और अत्याधुनिक हथियारों की उपलब्धता ने प्रांतीय सुरक्षा तंत्र के सामने एक जटिल चुनौती पेश कर दी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहा है।

दराजिंदा में हुए इस घातक हमले के बाद पाकिस्तानी सेना, फ्रंटियर कोर (FC) और स्थानीय पुलिस के भारी दस्तों ने पूरे डेरा इस्माइल खान जिले की घेराबंदी कर दी है। विस्फोट स्थल को सील कर फॉरेंसिक टीमों ने मिट्टी, छर्रों और बारूद के नमूने एकत्र किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई आईईडी (Improvised Explosive Device) था अथवा आत्मघाती हमलावर द्वारा किया गया हमला। सीमावर्ती मार्गों पर सघन चेकिंग अभियान और संभावित आतंकी ठिकानों पर तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं।

इस महीने डेरा इस्माइल खान और आसपास के कबायली बेल्ट में सुरक्षा से जुड़ी कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और नागरिक समाज ने लगातार हो रही इन वारदातों पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि खुफिया विफलता और लचर सुरक्षा व्यवस्था के चलते निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए संवेदनशील बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को दोबारा होने से रोका जा सके।

डेरा इस्माइल खान भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील स्थिति में स्थित है, जहां से पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की सीमाएं मिलती हैं। साथ ही डूरंड लाइन के निकट होने के कारण यह क्षेत्र दशकों से उग्रवाद की मार झेल रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार जब भी इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कोई सामाजिक या सांस्कृतिक आयोजन किया जाता है, विद्रोही गुट ऐसे आयोजनों को निशाना बनाकर यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि इस पूरे बेल्ट पर सरकारी नियंत्रण बेहद कमजोर है।

इस हमले ने न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई भू-भाग में स्थिरता और उग्रवाद रोधी नीतियों की प्रभावशीलता पर भी नए सिरे से बहस छेड़ दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी आम नागरिकों और जन-समारोहों पर किए गए इस नृशंस हमले की कड़ी निंदा की है और पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।