
वृंदावन के प्रख्यात संत और आध्यात्मिक गुरु श्री प्रेमानंद महाराज जी महाराज का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उनके अनमोल विचार, राधा नाम की महिमा और उनके दरबार में आने वाले आम से लेकर खास लोगों (सेलेब्रिटीज) को दी जाने वाली सीख सोशल मीडिया पर आए दिन वायरल होती रहती है। देश-दुनिया के बड़े-बड़े फिल्मी सितारे, खिलाड़ी और दिग्गज हस्तियां उनके दर्शन करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए वृंदावन पहुंचते हैं। लेकिन इसी बीच, प्रेमानंद महाराज को लेकर कुछ तथाकथित लोगों या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज द्वारा की जाने वाली हरकतों और बयानों पर अब तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। हाल ही में प्रसिद्ध आध्यात्मिक व सामाजिक शख्सियत लकी बिष्ट (Lucky Bisht) प्रेमानंद महाराज के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आए हैं और उन्होंने कुछ सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया यूजर्स को जमकर आड़े हाथों लिया है। लकी बिष्ट ने तीखे शब्दों में कहा है कि पब्लिसिटी और लाइमलाइट पाने के लिए लोग अपनी मर्यादा और इंसानियत की सारी हदें पार कर रहे हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आइए इस सनसनीखेज और गर्माती खबर के हर पहलू को विस्तार से जानते हैं।
क्यों भड़के लकी बिष्ट? संतों और आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति गिरता स्तर बना चिंता का विषय
आज के सोशल मीडिया के दौर में हर कोई रातों-रात वायरल होना चाहता है और इसके लिए कई बार लोग धर्म, संस्कृति और संतों की मर्यादा को भी ताक पर रख देते हैं। वृंदावन जाने वाले कुछ सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया क्रिएटर्स जब प्रेमानंद महाराज के एकांत दर्शन या बातचीत के वीडियो को अपने इंस्टाग्राम और यूट्यूब लाइक्स व व्यूज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो कई बार उसका गलत संदर्भ पेश कर दिया जाता है। इसी प्रवृत्ति पर गहरी नाराजगी जताते हुए लकी बिष्ट ने कहा कि लोग अपनी सस्ती लोकप्रियता के लिए इतने नीचे गिर चुके हैं कि उन्हें इस बात का भी अहसास नहीं है कि वे देश के एक महान संत और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं। संतों का यह दरबार कोई पीआर (PR) स्टंट या मार्केटिंग का अड्डा नहीं है, बल्कि यह वह पवित्र स्थान है जहां आत्मा की शुद्धि होती है। लकी बिष्ट का यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है और उनके इस मुखर विरोध का तमाम लोग समर्थन कर रहे हैं।
सेलिब्रिटीज की दोहरी मानसिकता और पब्लिसिटी स्टंट पर उठे गंभीर सवाल
लकी बिष्ट ने अपने तीखे संबोधन में विशेष रूप से उन सेलिब्रिटीज को आड़े हाथों लिया जो कैमरे के सामने तो संतों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और खुद को बेहद धार्मिक दिखाते हैं, लेकिन कैमरे के पीछे पहुंचते ही अपनी पब्लिसिटी और टीआरपी के लिए उन्हीं वीडिओज़ को तमाशा बना देते हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि महाराज जी तो हर आने वाले को बिना किसी भेदभाव के प्रेम और करुणा का संदेश देते हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी इस सहजता और सरलता का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। जब तथाकथित सितारे अपनी फिल्मों के प्रमोशन या खुद को लाइमलाइट में बनाए रखने के लिए संतों की शरण का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे सनातन संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को ठेס पहुंचती है। लकी बिष्ट का यह कड़ा संदेश उन सभी लोगों के लिए एक आईना है जो सोशल मीडिया की चकाचौंध में अपनी इंसानियत और संस्कारों को भूल चुके हैं।
प्रेमानंद महाराज के विचारों की दिव्यता और समाज को उनका संदेश
दूसरी ओर, इन तमाम विवादों और बहसों के बीच प्रेमानंद महाराज हमेशा की तरह अपनी साधना, राधा नाम के जाप और भक्तों के कल्याण में लीन हैं। वे अपने सत्संग के दौरान अक्सर यह समझाते हैं कि इंसान को दुनिया की इन दिखावटी चीजों और आलोचनाओं से ऊपर उठकर अपने भगवान और अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। उनके दरबार में आने वाले हर व्यक्ति को वे यही सीख देते हैं कि अहंकार को त्यागकर जीवन में प्रेम और सेवा भाव अपनाना ही सबसे बड़ा धर्म है। लकी बिष्ट द्वारा उठाए गए इस कदम के बाद अब आम जनता और भक्तों के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि हमें सोशल मीडिया के इस दौर में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों तथा संतों का सम्मान किस प्रकार सुरक्षित रखना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को अपनी सस्ती लोकप्रियता के लिए किसी की आस्था और पवित्रता से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है।
इंसानियत को शर्मसार करने वाली प्रवृत्तियों के खिलाफ उठानी होगी आवाज
लकी बिष्ट का यह कड़ा बयान इस बात का प्रतीक है कि समाज में अभी भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो संस्कृति और मर्यादा के खिलाफ होने वाले प्रहारों पर चुप नहीं बैठते। आज जरूरत इस बात की है कि हम सोशल मीडिया का इस्तेमाल सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों के लिए करें, न कि किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने या सनसनी फैलाने के लिए। प्रेमानंद महाराज जैसे संत इस समाज को राह दिखाने के लिए हैं, और उनकी गरिमा की रक्षा करना हर एक सनातन प्रेमी का कर्तव्य बनता है। उम्मीद है कि इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद वे लोग जरूर सबक लेंगे जो लाइमलाइट के भूखे होकर मर्यादा की हर सीमा लांघ जाते हैं। इंसानियत और संस्कारों की यह लड़ाई आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकती है, जिस पर देश भर की निगाहें टिकी रहेंगी।
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