
अक्टूबर के मध्य में जहां हर साल दिल्ली की आबोहवा में पराली के धुएं और जहरीले स्मॉग का पहरा जमने लगता था, वहीं गुरुवार को आसमान से बरसी राहत की फुहारों ने समूची राष्ट्रीय राजधानी को एक नया जीवनदान दे दिया है। पिछले कई दिनों से धूल, धुएं और धीमी हवाओं के कारण घुट रही दिल्ली की हवा अचानक साफ और पारदर्शी नजर आने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक समीर ऐप के ताजा बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) एक दिन पहले दर्ज 181 के आंकड़े से सीधे लुढ़ककर 149 के स्तर पर आ गया है। हवा की गुणवत्ता का ‘खराब’ (Poor) की दहलीज से फिसलकर संतोषजनक रूप से ‘मध्यम’ (Moderate) श्रेणी में दर्ज होना दिल्लीवासियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। वातावरण में तैर रहे सूक्ष्म धूल कण यानी पीएम 2.5 (PM 2.5) और पीएम 10 (PM 10) बारिश की बूंदों के साथ घुलकर जमीन पर बैठ गए, जिससे सुबह और शाम के वक्त आंखों में होने वाली जलन और सांस लेने में महसूस होने वाली भारी तकलीफ से आम नागरिकों, खासकर सुबह की सैर पर निकलने वाले बुजुर्गों और बच्चों को भारी राहत मिली है। इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, कनॉट प्लेस, चाणक्यपुरी और शांति पथ के आसपास का दृश्य जो कल तक धुंध की चादर में लिपटा रहता था, वह आज पूरी तरह धुलकर साफ और हरा-भरा दिखाई दे रहा है।
बारिश का असर केवल हवा की शुद्धता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पिछले कई दिनों से दिन के वक्त सता रही तीखी धूप और चिपचिपी उमस को भी पूरी तरह गायब कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग वेदर स्टेशन के साथ-साथ पालम, लोधी रोड, रिज और आयानगर के वेदर स्टेशनों पर अधिकतम तापमान में सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की तेज गिरावट दर्ज की गई है। सफदरजंग वेदर स्टेशन पर गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे गिरकर लगभग 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास सिमट गया, जिसने दोपहर के समय भी हवा में सुखद ठंडक घोल दी। हालांकि रात का न्यूनतम तापमान अभी भी सामान्य से थोड़ा ऊपर यानी 23.3 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन दिन के तापमान में आई इस अचानक गिरावट ने दिल्ली में समय से पहले ‘गुलाबी ठंड’ की औपचारिक शुरुआत का अहसास करा दिया है। दिनभर चली 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली ठंडी हवाओं ने वातावरण में मौजूद नमी को सुहावने अहसास में बदल दिया, जिससे दिल्ली की सड़कों पर दोपहर के समय भी लोगों को एसी और कूलरों से राहत मिलती दिखी।
आमतौर पर अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में जब हवा की गति धीमी पड़ती है और रातें ठंडी होती हैं, तो दिल्ली-एनसीआर में ‘थर्मल इन्वर्जन’ (तापमान का उलटाव) शुरू हो जाता है, जिससे प्रदूषण जमीन के पास ही कैद होकर रह जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) हर साल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ‘ग्रैप’ (GRAP) के कड़े चरण लागू करने के लिए मजबूर होता है, जिसमें जनरेटरों पर रोक, निर्माण कार्यों पर पाबंदी और पानी के छिड़काव जैसे आपात उपाय शामिल होते हैं। गुरुवार को हुई इस बेमौसम बारिश ने पर्यावरण नीति-निर्माताओं और दिल्ली सरकार को बहुत बड़ी राहत दी है। बारिश के कारण वातावरण से पार्टिकुलेट मैटर का प्राकृतिक ‘वॉशआउट’ हो गया है, जिसके चलते हवा का स्तर फिलहाल ग्रैप के गंभीर चरणों (स्टेज 2 या 3) की सीमा से काफी नीचे बना हुआ है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बारिश न हुई होती, तो स्थानीय धूल और वाहनों के उत्सर्जन के चलते एक्यूआई 200 से 250 के पार निकल चुका होता। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह आगाह भी किया है कि बारिश का यह प्राकृतिक उपहार एक फौरी राहत है, और जब तक हवा की गति तेज नहीं रहेगी या स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर लगातार नियंत्रण नहीं रखा जाएगा, तब तक यह राहत बहुत लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है।
बारिश और हवा के इस सकारात्मक बदलाव का दायरा केवल दिल्ली के प्रशासनिक बॉर्डर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के तमाम सैटेलाइट शहरों में भी पर्यावरण की तस्वीर एक झटके में बदल गई है। उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) तथा गाजियाबाद में पिछले दिनों एक्यूआई 190 से 210 के पार दर्ज किया जा रहा था, जो बारिश के बाद सुधरकर 130 से 150 के ‘मध्यम’ दायरे में आ गया है। हरियाणा के मिलेनियम सिटी गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और सोनीपत में भी तेज बौछारों के साथ हवा में मौजूद गर्द पूरी तरह बैठ गई है। गुरुग्राम के साइबर हब और गोल्फ कोर्स रोड जैसे कंक्रीट के जंगलों में जहां भारी ट्रैफिक के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ रहा था, वहां बारिश के बाद हवा में ताजगी महसूस की गई। हालांकि, इस बारिश का दूसरा पहलू यह भी रहा कि दिल्ली के धौला कुआं, आईटीओ, आश्रम चौक, आउटर रिंग रोड और सराय काले खां जैसे व्यस्त चौराहों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, लेकिन हवा में आई इस बेमिसाल शुद्धता के आगे लोगों ने जाम की इस असुविधा को खुशी-खुशी स्वीकार किया।
अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या 149 का यह सुधरा हुआ एक्यूआई आने वाले दिनों में भी बरकरार रहेगा? कृषि और उपग्रह डेटा के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेतों में धान की कटाई अपने अंतिम चरण में है और खेतों में पराली जलाने (Stubble Burning) की घटनाएं धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। उत्तर-पश्चिमी हवाएं जैसे ही सक्रिय होंगी, वे पराली के बारीक धुएं को दिल्ली के मैदानी कटोरे में खींचकर ला सकती हैं। इसके अलावा, आगामी दीपावली का त्योहार नजदीक है, जिसमें पटाखों के धुएं और बाजार की बढ़ती हलचल से उत्सर्जन का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ता है। मौसम वैज्ञानिकों का विश्लेषण है कि बारिश के बाद जब जमीन में नमी अधिक होती है और तापमान तेजी से गिरता है, तो आने वाले दिनों में सुबह के समय हल्का ‘रेडिएशन फॉग’ (धुंध) बनने की संभावना बढ़ जाती है। यदि आने वाले दिनों में हवा की गति 10 किमी प्रति घंटे से कम हो गई, तो यह नमी धूल और धुएं के कणों को बांधकर दोबारा स्मॉग का रूप दे सकती है। इसलिए दिल्लीवासियों के लिए अगले एक सप्ताह तक यह मौसम राहत भरा रहेगा, लेकिन उसके बाद सर्दियों के वास्तविक प्रदूषण संकट का असली इम्तिहान शुरू होगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा मौसम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। अगले 24 से 48 घंटों के दौरान दिल्ली और एनसीआर के आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है, लेकिन भारी बारिश के आसार अब कम हैं। शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का पूर्वानुमान है। सुबह के समय हल्की धुंध और ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे सुबह की वॉक करने वालों को हल्की सिहरन महसूस होगी। मौसम विभाग ने स्वास्थ्य के लिहाज से सलाह दी है कि चूंकि दिन में हल्की धूप और सुबह-शाम ठंडी हवाएं चल रही हैं, ऐसे में मौसम के इस बदलाव के दौरान लोग मौसमी वायरल, खांसी-जुकाम और गले के संक्रमण से बचने के लिए सतर्क रहें। कुल मिलाकर, बारिश ने दिल्ली को एक बहुप्रतीक्षित ‘ग्रीन विंडो’ दी है, जिसने त्योहारी तैयारियों के बीच राजधानी के बाशिंदों को खुलकर और सुकून से सांस लेने का एक दुर्लभ और खुशनुमा मौका मुहैया कराया है।
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