
उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों, निगमों और प्राधिकरणों में संविदा व आउटसोर्सिंग पर तैनात लाखों कर्मचारियों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है। पिछले कई दशकों से सरकारी महकमों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मियों को ठेकेदारों और बिचौलियों (Manpower Agencies) के शोषण, कम वेतन, कमीशनखोरी और बिना कारण नौकरी से निकाल दिए जाने के खौफ में जीना पड़ता था। इस अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ (UPCOS – Uttar Pradesh Corporation for Outsource Services) के गठन और इसके आधिकारिक डिजिटल पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया है। इस नए पारदर्शी तंत्र के लागू होने से प्रदेश के करीब 20 लाख आउटसोर्स परिवारों को सामाजिक, वित्तीय और सेवा सुरक्षा का मजबूत रक्षा कवच मिलने जा रहा है।
पहले की व्यवस्था में तीन अलग-अलग धड़े होते थे—एक तरफ कर्मचारी, दूसरी तरफ ठेका एजेंसी और तीसरी तरफ संबंधित सरकारी विभाग। एजेंसियां सरकार से पूरा बजट लेने के बाद भी कर्मचारियों के वेतन में से भारी कमीशन काट लेती थीं या महीनों तक मानदेय दबाकर बैठ जाती थीं। अब UPCOS के जरिए इस पूरे सिस्टम को सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ला दिया गया है।
अब किसी भी विभाग को आउटसोर्स मैनपावर की जरूरत होगी, तो वह सीधे UPCOS पोर्टल पर अपनी मांग दर्ज करेगा। पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध पारदर्शी एजेंसियों का चयन होगा और कर्मचारियों की उपस्थिति, सेवा रिकॉर्ड और वेतन निर्धारण डिजिटल रूप से ट्रैक होगा। एजेंसी अब मनमाने तरीके से न तो कर्मचारी के वेतन में से एक रुपया काट सकेगी और न ही अपनी मर्जी से किसी को नौकरी से बाहर कर सकेगी। किसी भी कार्मिक को हटाने से पहले सक्षम प्राधिकारी और सरकार की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।
वेतन की अनिश्चितता आउटसोर्स कर्मियों की सबसे बड़ी मानसिक परेशानी थी। नए नियमों के तहत अब हर महीने की 5 तारीख तक कर्मचारियों के सीधे बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए मानदेय भेजा जाएगा।
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जीरो बैलेंस खाता: सभी पंजीकृत कर्मियों का बैंक में जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट खोला जाएगा, जिससे बैंकिंग सेवाओं के लिए कोई न्यूनतम बैलेंस का चार्ज नहीं कटेगा।
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ईपीएफ और ईएसआई की डिजिटल गारंटी: वेतन भुगतान के साथ ही एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) का नियोक्ता व कर्मचारी अंशदान सीधे पोर्टल के माध्यम से ईपीएफओ और ईएसआईसी के खातों में जमा होगा। इससे पहले ठेकेदारों द्वारा पीएफ का पैसा हड़पने की जो शिकायतें आती थीं, उन पर पूरी तरह लगाम लग गई है।
योगी सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों को न केवल नियमित वेतन का अधिकार दिया है, बल्कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तर्ज पर व्यापक सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान की है:
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20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर: ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में आउटसोर्स कर्मचारी के आश्रितों को 20 लाख से लेकर 40 लाख रुपये तक का वित्तीय सुरक्षा कवर (Insurance) मिलेगा।
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आकस्मिक मृत्यु पर तत्काल ₹50,000 की मदद: सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर बैंक और निगम के माध्यम से पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार व आपात जरूरतों के लिए तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
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बेटियों के विवाह के लिए 8 से 10 लाख की सहायता: पंजीकृत कर्मियों के परिवार में दो बेटियों की शादी के लिए 8 से 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता व कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिया जाएगा।
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महिला कर्मियों को मातृत्व अवकाश (Maternity Leave): महिला आउटसोर्स कर्मचारियों को अब सवेतन मातृत्व अवकाश का कानूनी हक मिलेगा, जो पहले ठेकेदार अपनी मर्जी से खारिज कर देते थे।
इस नई नीति के तहत पदों और कुशलताओं (Unskilled, Semi-skilled, Skilled) के आधार पर न्यूनतम वेतन की विसंगतियों को दूर किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेहनत के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय हर कर्मी का मूल अधिकार है।
इसके अलावा, कर्मचारियों के परिवार के चार सदस्यों को स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाएगा। अस्पतालों में मुफ्त इलाज के लिए ईएसआई कार्ड और गंभीर बीमारियों के लिए आयुष्मान भारत योजना से इंटीग्रेशन की व्यवस्था की जा रही है। अगर किसी कर्मचारी को कार्यस्थल पर कोई परेशानी या वेतन संबंधी विवाद होता है, तो वह UPCOS पोर्टल पर सीधे अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है, जिस पर 48 से 72 घंटों के भीतर समाधान की जवाबदेही तय की गई है।
उत्तर प्रदेश के लाखों युवा जो नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन, बिजली और कलेक्ट्रेट जैसे दफ्तरों में दिन-रात मेहनत करते हैं, उन्हें अब ‘अस्थायी और असुरक्षित’ होने के हीनभाव से मुक्ति मिलेगी। बिचौलियों का एकाधिकार खत्म होने से न केवल सरकार के राजस्व की बर्बादी रुकेगी, बल्कि वह पैसा सीधे उस मेहनतकश कर्मचारी के हाथ में पहुंचेगा जो जमीन पर सेवाएं दे रहा है। समय पर वेतन मिलने से बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की दवाइयां और परिवार का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा। यह मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में सुधार का एक नया राष्ट्रीय मानक बनकर उभर रहा है।
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