
लंदन से लेकर मैनचेस्टर तक ब्रिटेन का समूचा विमानन नेटवर्क अचानक उस वक्त गहरे संकट में घिर गया जब देश की नेशनल एयर ट्रैफिक सर्विसेज (NATS) के मुख्य फ्लाइट डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम में अचानक गंभीर तकनीकी खराबी आ गई। सिस्टम में आई इस बड़ी अड़चन के कारण ब्रिटेन के हवाई क्षेत्र में विमानों के सुरक्षित संचालन, टेक-ऑफ क्लीयरेंस और रूट ट्रैकिंग की पूरी स्वचालित प्रक्रिया ठप हो गई। सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को प्रति घंटे उड़ान भरने वाले विमानों की संख्या में भारी कटौती करनी पड़ी, जिसके चलते ब्रिटेन के सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर उड़ानों की लंबी कतारें लग गईं। देखते ही देखते दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शुमार लंदन हीथ्रो, गैटविक, स्टैनस्टेड, मैनचेस्टर, बर्मिंघम, एडिनबर्ग और ग्लासगो एयरपोर्ट्स पर उड़ानों का संचालन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
ब्रिटेन के इस एविएशन संकट का सीधा असर भारत और ब्रिटेन के बीच संचालित होने वाली उड़ानों पर भी बुरी तरह पड़ा है। भारतीय राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयर इंडिया की मुंबई से लंदन हीथ्रो के लिए रवाना हुई उड़ान संख्या AI 131 जब यूरोपीय हवाई क्षेत्र में थी, तभी लंदन में एयर ट्रैफिक अव्यवस्था के चलते उसे उतरने की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद करीब 290 से अधिक यात्रियों से भरे इस बड़े विमान को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख एयरपोर्ट की ओर मोड़ना पड़ा। घंटों तक रनवे पर विमान के अंदर इंतजार करने के बाद स्थिति सामान्य न होने पर उड़ान को आखिरकार रद्द करना पड़ा और यात्रियों को ज्यूरिख में ही डीबोर्ड कराया गया। एयर इंडिया ने एक आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया कि ब्रिटेन के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर NATS में आई तकनीकी खामी के कारण यूके आने-जाने वाली उसकी कई उड़ानों को डायवर्ट, विलंबित या रद्द करना पड़ा है। एयरलाइन ने यह भी चेतावनी दी कि विमानों और क्रू मेंबर्स के निर्धारित ठिकानों से भटक जाने के कारण इसका असर आगामी नेटवर्क शेड्यूल पर भी पड़ सकता है।
हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली के अचानक फेल होने से ब्रिटेन के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों के लिए स्थिति बेहद पीड़ादायक बन गई। सैकड़ों यात्री विमानों के अंदर तीन से चार घंटे तक रनवे पर फंसे रहे, जहां उन्हें उड़ान भरने या टर्मिनल लौटने की कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही थी। विमानन निगरानी प्लेटफॉर्म फ्लाइटराडार24 और उद्योग सूत्रों के अनुसार, इस तकनीकी व्यवधान के कारण 1,000 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें से 300 से 600 से अधिक उड़ानें सीधे तौर पर रद्द कर दी गईं। लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट ने अपने बयान में कहा कि तकनीकी समस्या का मुख्य असर यहां से प्रस्थान करने वाली उड़ानों पर पड़ा, जिसके चलते लंबी कतारें लग गईं। वहीं गैटविक, मैनचेस्टर और बर्मिंघम में भी सैकड़ों यात्री बोर्डिंग गेट और बैगेज क्लेम एरिया में बिना किसी स्पष्ट सूचना के परेशान नजर आए।
यह तकनीकी संकट केवल ब्रिटेन की घरेलू सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका व्यापक असर पूरे यूरोपीय और ट्रांस-अटलांटिक नेटवर्क पर देखा गया। ब्रिटिश एयरवेज ने स्वीकार किया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल की समस्या के कारण उसकी 100 से अधिक उड़ानें या तो रद्द करनी पड़ीं या उनके रूट बदलने पड़े। एयरलाइन ने कहा कि यह संकट पूरी तरह से एयरलाइन के नियंत्रण से बाहर था और क्रू तथा एयरक्राफ्ट की अनुपलब्धता के कारण अगले कुछ दिनों तक इसका नॉक-ऑन असर बना रहेगा। वहीं यूरोप की प्रमुख बजट एयरलाइन रयानएयर ने बताया कि इस गड़बड़ी से उसके 65 हजार से अधिक यात्री प्रभावित हुए हैं और 50 से अधिक सेवाएं रद्द करनी पड़ी हैं। ईजीजेट, केएलएम और लुफ्थांसा जैसी दिग्गज विमानन कंपनियों के विमान भी यूरोपीय देशों के विभिन्न हवाई अड्डों पर क्लीयरेंस न मिलने के कारण ग्राउंडेड रहे।
ब्रिटेन की राष्ट्रीय हवाई यातायात सेवा (NATS) के इंजीनियरों ने कई घंटों की सघन तकनीकी मशक्कत के बाद फ्लाइट डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम में आई मुख्य तकनीकी खामी को ठीक करने का दावा किया है। हालांकि, अधिकारियों और विमानन विश्लेषकों का मानना है कि सिस्टम रिस्टोर होने के बावजूद हवाई अड्डों पर लगे भारी बैकलॉग को पूरी तरह साफ करने में कम से कम 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है। लंदन जाने और वहां से लौटने वाले भारतीय यात्रियों, छात्रों और व्यावसायिक यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर लाइव फ्लाइट स्टेटस अनिवार्य रूप से जांचें। भारत से लंदन, बर्मिंघम और मैनचेस्टर के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को कनेक्टिंग उड़ानों में होने वाली अप्रत्याशित देरी और शेड्यूल में बदलाव के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
Focus Times – Focus Times, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया