
उत्तर प्रदेश में मानसून के अंतिम दौर में मौसम का मिजाज एक बार फिर आक्रामक हो चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने एक ताजा चेतावनी जारी करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में तेज आंधी, बादलों की भीषण गड़गड़ाहट और मूसलाधार बारिश का अलर्ट घोषित किया है। सक्रिय मानसूनी ट्रफ रेखा और उत्तर भारत के ऊपर बने पश्चिमी विक्षोभ के संयुक्त प्रभाव से पूरे पश्चिमी क्षेत्र में वायुमंडलीय दबाव तेजी से बदला है। इसके चलते वातावरण में 85 से 90 प्रतिशत तक आर्द्रता दर्ज की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज झोंके वाली हवाओं के साथ कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। बीते कुछ दिनों से उमस भरी चिपचिपी गर्मी की मार झेल रहे लोगों को इस बारिश से तापमान में गिरावट के रूप में राहत तो मिलेगी, लेकिन साथ ही निचले इलाकों में जलजमाव, बिजली आपूर्ति में बाधा और दैनिक आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन और राज्य राहत आयुक्त कार्यालय ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से सटे जनपदों गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा), गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ में शनिवार सुबह से ही आसमान में घने काले बादलों का डेरा बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, इन जनपदों में रुक-रुक कर भारी बारिश के तीव्र दौर (Intense Spells) देखने को मिल सकते हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईओवर, गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन और मेरठ रोड पर जलभराव के चलते यातायात की गति धीमी पड़ने की प्रबल आशंका है। स्थानीय नगर निगम और विकास प्राधिकरणों ने पंपिंग सेटों और नाला सफाई दस्तों को आपातकालीन ड्यूटी पर तैनात कर दिया है ताकि जलजमाव की स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मेरठ, मोदीनगर और मुरादनगर के शहरी इलाकों में संकरी गलियों और मुख्य चौराहों पर पानी भरने से स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वाले दैनिक यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान ओवरस्पीडिंग से बचें, वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखें और पेड़ों या पुराने बिजली के खंभों के नीचे वाहन पार्क करने से परहेज करें।
ताजनगरी आगरा, कान्हा की नगरी मथुरा, फिरोजाबाद, हाथरस और अलीगढ़ सहित समूचे ब्रज क्षेत्र में चक्रवाती परिसंचरण का असर साफ दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने इन जिलों में मध्यम से भारी दर्जे की वर्षा और तेज वज्रपात (Lightning) की आशंका जताई है। आगरा में बीते चौबीस घंटों के दौरान पारा सामान्य से अधिक दर्ज किया गया था, लेकिन इस मौसमी बदलाव के बाद अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। पर्यटन के दृष्टिकोण से विश्व प्रसिद्ध ताजमहल, फतेहपुर सीकरी और मथुरा-वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जिला प्रशासन ने विशेष चेतावनी जारी की है। खुले मैदानों और यमुना के तटीय घाटों पर अनावश्यक भ्रमण न करने की हिदायत दी गई है। फिरोजाबाद और अलीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में खुले में रखे कच्चे माल और विनिर्माण इकाइयों को बारिश से बचाने के लिए उद्यमियों को सतर्क कर दिया गया है। आकाशीय बिजली गिरने के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उत्तरी छोर पर स्थित सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और बिजनौर के इलाकों में उत्तराखंड की पहाड़ियों से सटे होने के कारण मौसम का प्रभाव और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बारिश के कारण हिंडन, यमुना और गंगा की सहायक नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। सहारनपुर और शामली के खादर क्षेत्रों में नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए नावों और राहत दलों को तैयार रखा गया है। मुजफ्फरनगर में तेज हवाओं के कारण पुराने व कमजोर निर्माणों और होर्डिंग्स के गिरने का खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए नगर पालिका प्रशासन ने खतरनाक इमारतों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए हैं। मुरादाबाद, रामपुर और बरेली के रुहेलखंड क्षेत्र में भी बादलों की लगातार आवाजाही के साथ कई स्थानों पर झमाझम बारिश होने का पूर्वानुमान है, जिससे उमस भरी गर्मी पूरी तरह खत्म हो जाएगी और वातावरण में ठंडक का अहसास बढ़ने लगेगा।
मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्नदाताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस समय खेतों में धान (Paddy), गन्ना (Sugarcane), बाजरा और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां अंतिम या परिपक्वता की अवस्था में हैं। कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि तेज आंधी और जलभराव के कारण गन्ने और लंबी किस्म के धान के पौधों के खेत में गिरने (Lodging) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि जड़ों में अत्यधिक पानी जमा न हो। इसके अतिरिक्त, मौसम साफ होने तक किसी भी प्रकार के कीटनाशक, खरपतवारनाशक या रासायनिक उर्वरकों का छिड़काव तुरंत रोक दें, क्योंकि बारिश के पानी में ये रसायन बहकर निष्प्रभावी हो जाते हैं। सब्जी उत्पादक किसानों को विशेष रूप से टमाटर, तोरई, लौकी और मिर्च के खेतों से तत्काल जल निकासी की हिदायत दी गई है।
इस मौसम प्रणाली में सबसे गंभीर पहलू बिजली गिरने यानी वज्रपात की अत्यधिक घटनाएं हैं। पश्चिमी यूपी के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में खेतों में काम करने वाले मजदूरों और खुले में मवेशी चराने वालों के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने जीवनरक्षक सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि जैसे ही बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई दे, वे तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेल्टर में शरण लें। किसी भी परिस्थिति में अकेले खड़े ऊंचे पेड़, टिन शेड, लोहे के टावर या बिजली के खंभों के नीचे आश्रय न लें। खेतों में काम कर रहे किसान यदि खुले में फंस जाएं, तो जमीन पर लेटने के बजाय पैरों के बल उकड़ूं बैठकर सिर को घुटनों के बीच छुपा लें। मोबाइल पर ‘दामिनी’ और ‘मौसम’ ऐप डाउनलोड कर रियल-टाइम लाइटनिंग अलर्ट पर नजर बनाए रखें। किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूचना देने के लिए राज्य राहत हेल्पलाइन नंबर 1070 और स्थानीय पुलिस हेल्पलाइन 112 पर तत्काल संपर्क किया जा सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश और बादलों की यह सक्रियता अगले 48 से 72 घंटों तक बनी रहेगी, जिसके बाद धीरे-धीरे मौसम सामान्य होने की संभावना है।
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