
भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार और अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल इन दिनों इंग्लैंड की जमीन पर अपनी फिरकी का ऐसा जादू बिखेर रहे हैं कि विरोधी टीमों के होश उड़े हुए हैं और हर तरफ उनके नाम की चर्चा हो रही है, क्रिकेट के मैदान पर जब भी एक बेहतरीन और कलात्मक रिस्ट स्पिनर की बात की जाती है, तो युजवेंद्र चहल का नाम हमेशा सबसे पहले जुबान पर आता है। पिछले लगभग तीन साल से भारतीय राष्ट्रीय टीम की चयन चर्चाओं और प्लेइंग इलेवन से बाहर चल रहे इस जादुई गेंदबाज ने हार न मानने का जज्बा दिखाते हुए इंग्लैंड की प्रतिष्ठित काउंटी चैंपियनशिप (County Championship 2026) का रुख किया और वहां नॉर्थहैम्पटनशायर (Northamptonshire) की तरफ से खेलते हुए अपने प्रदर्शन से तहलका मचा दिया है। डरहम के खिलाफ खेले जा रहे इस रोमांचक और महत्वपूर्ण मुकाबले में चहल ने अपनी गजब की गेंदबाजी कला का नजारा पेश करते हुए एक ही पारी में चार प्रमुख बल्लेबाजों को अपनी फिरकी के जाल में फंसाया और पूरी विरोधी टीम की बल्लेबाजी लाइनअप की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। नॉर्थहैम्पटन के ऐतिहासिक काउंटी ग्राउंड पर खेले जा रहे इस मैच के दौरान जब डरहम की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, तो उन्हें शायद इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि आगे उनका सामना एक ऐसे भारतीय स्पिनर से होने वाला है जो अपनी कसी हुई गेंदबाजी से मैदान पर कहर बरपा देगा। युजवेंद्र चहल ने इस पारी में नॉर्थहैम्पटनशायर के लिए सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाज का खिताब अपने नाम किया और यह साबित कर दिया कि जब बात अपनी गेंदबाजी कौशल और क्लास दिखाने की हो, तो वे दुनिया के किसी भी कोने में और किसी भी पिच पर अपनी छाप छोड़ने की पूरी क्षमता रखते हैं। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल उनकी काउंटी टीम को मैच में एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है, बल्कि भारत में बैठे उनके करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में एक बार फिर से यह उम्मीद जगा दी है कि इस करिश्माई स्पिनर का अंतरराष्ट्रीय करियर अभी खत्म नहीं हुआ है और वे टीम इंडिया में वापसी करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
डरहम के खिलाफ गेंदबाजी का यह जादुई स्पेल इस बात का प्रमाण है कि युजवेंद्र चहल क्यों दुनिया के सबसे खतरनाक और विकेट लेने वाले लेग स्पिनर माने जाते हैं
नॉर्थहैम्पटन के मैदान पर जब डरहम की टीम पहले बल्लेबाजी करने के लिए उतरी, तो उनकी शुरुआत ठीक-ठाक रही, लेकिन जैसे ही युजवेंद्र चहल ने गेंदबाजी की कमान संभाली, मैच का पूरा नक्शा ही बदल गया। डरहम की पूरी पारी महज 205 रनों के छोटे स्कोर पर ढेर हो गई, जिसमें उनकी तरफ से डेविड बेडिंगहम ने 81 रनों की सबसे बड़ी पारी जरूर खेली, लेकिन उनके अलावा टीम का कोई भी अन्य बल्लेबाज 50 रनों के आंकड़े को भी नहीं छू सका और चहल की फिरकी के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हो गया। भारतीय स्टार स्पिनर युजवेंद्र चहल ने अपनी घातक गेंदबाजी का मुजाहिदा करते हुए मात्र 15.2 ओवरों की गेंदबाजी में केवल 36 रन खर्च किए और इस दौरान उन्होंने 3 बेहद किफायती मेडन ओवर भी फेंके, जो टेस्ट और काउंटी फॉर्मेट में उनकी बेहतरीन लाइन और लेंथ को साफ दर्शाता है। चहल ने अपनी इस शानदार गेंदबाजी के दौरान डरहम के कई बड़े और खतरनाक बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई, जिसमें कप्तान एलेक्स लीज, बेन स्टोक्स, मैथ्यू पॉट्स और केसी एल्ड्रिज जैसे धाकड़ खिलाड़ी शामिल रहे। इस स्पेल की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि उन्होंने मैथ्यू पॉट्स और दिग्गज ऑलराउंडर बेन स्टोक्स जैसे खूंखार बल्लेबाजों को गच्चा देते हुए सीधे बोल्ड आउट किया और उन्हें पवेलियन लौटने पर मजबूर कर दिया। गत 21 जुलाई से ही काउंटी चैंपियनशिप में खेल रहे युजवेंद्र चहल ने इस टूर्नामेंट में जितने भी मुकाबले खेले हैं, लगभग सभी में उन्होंने अपनी विविधता और बेहतरीन फिरकी से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान किया है। उनकी इस निरंतरता और विकेट लेने की अद्भुत क्षमता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि घरेलू हो या विदेशी पिचें, एक उच्च कोटि का स्पिनर हमेशा अपनी गेंदबाजी के दम पर मैच का पासा पलटने का माद्दा रखता है, और चहल ने इंग्लैंड की उन पिचों पर यह कमाल करके दिखाया है जहां आमतौर पर तेज गेंदबाजों का बोलबाला माना जाता है।
भारत के लिए व्हाइट बॉल क्रिकेट में लंबे समय से बाहर चल रहे चहल के शानदार अंतरराष्ट्रीय आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि वे देश के सबसे सफल गेंदबाजों में से एक हैं।
भले ही युजवेंद्र चहल को पिछले तीन साल से अधिक समय से भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी में मैदान पर न देखा गया हो, लेकिन उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रिकॉर्ड इस बात का गवाह है कि उन्होंने देश के लिए कितने बड़े मैच जिताऊ प्रदर्शन किए हैं। भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 फॉर्मेट में खेलने वाले चहल ने इसके बाद से चयनकर्ताओं के रडार से दूर होने के बावजूद कभी अपनी मेहनत और गेंदबाजी के अभ्यास से समझौता नहीं किया। अगर उनके कुल अंतरराष्ट्रीय करियर पर एक नजर डाली जाए, तो उन्होंने भारत के लिए अब तक 72 वनडे और 80 टी-20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल लिए हैं, जिसमें उनके आंकड़े बेहद शानदार और चौंकाने वाले हैं। वनडे क्रिकेट की 69 पारियों में गेंदबाजी करते हुए चहल ने 27.13 के बेहतरीन औसत से कुल 121 विकेट चटकाए हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 42 रन देकर 6 विकेट लेने का रहा है, और इस दौरान उन्होंने अपने करियर में दो बार ‘फाइव विकेट हॉल’ यानी पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा भी करके दिखाया है। इसके अलावा, टी-20 इंटरनेशनल मैचों की 79 पारियों में उन्होंने 25.09 की औसत से 96 विकेट अपने नाम किए हैं, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 25 रन देकर 6 विकेट चटकाना रहा है और इस छोटे फॉर्मेट में उनकी इकॉनमी भी 8.19 की रही है, जो टी-20 जैसे आक्रामक खेल में बेहद किफायती मानी जाती है। इन आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि चहल ने अपनी फिरकी के दम पर भारत को कितने ही हारे हुए मुकाबले जिताए हैं और जब भी उन्हें टीम के लिए विकेट की जरूरत पड़ी, उन्होंने कप्तान को निराश नहीं किया। यही कारण है कि इंग्लैंड की काउंटी धरती पर उनके द्वारा किया जा रहा यह ताजा प्रदर्शन भारतीय क्रिकेट गलियारों में एक बार फिर से इस बात की बहस छेड़ रहा है कि क्या देश के इस सबसे सफल रिस्ट स्पिनर को नजरअंदाज करना वाकई सही फैसला था या आने वाले दिनों में उन्हें फिर से नीली जर्सी में गेंदबाजी करते हुए देखा जा सकता है।
इंग्लैंड की काउंटी परिस्थितियों में लगातार चमक रहे चहल का यह काउंटी सत्र उनके करियर के लिए एक नया और सुनहरा अध्याय साबित हो रहा है
किसी भी पेशेवर खिलाड़ी के जीवन में ऐसा समय जरूर आता है जब उसे टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ता है, लेकिन असली चैंपियन वही होता है जो मैदान से दूर बैठने के बजाय अपनी कला को निखारने के लिए विदेश की कठिन लीग्स का रुख करता है और वहां अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाता है। युजवेंद्र चहल ने इंग्लैंड की इन मुश्किल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जिस तरह से नॉर्थहैम्पटनशायर की टीम के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया है, उसने यह दिखा दिया है कि उनके अंदर क्रिकेट अभी बहुत बाकी है। काउंटी चैंपियनशिप जैसे लंबे और थका देने वाले टूर्नामेंट में लगातार विकेट चटकाना और अपनी टीम के लिए सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बनना किसी भी विदेशी खिलाड़ी के लिए आसान काम नहीं होता, लेकिन चहल ने अपनी सूझबूझ, अनुभव और विविधता के दम पर इसे बेहद मुमकिन बना दिया है। उनके द्वारा फेंके गए वे मेडन ओवर और बल्लेबाजों को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर देने वाली उनकी गूगली और लेग स्पिन इस बात का सबूत हैं कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी की कमियों पर काम किया है और और अधिक धारदार बनकर उभरे हैं। सोशल मीडिया पर उनके इन चार विकेटों की चर्चा जोरों पर है और भारतीय क्रिकेट फैंस लगातार यह मांग कर रहे हैं कि घरेलू क्रिकेट और इस तरह की विदेशी लीगों में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को कम से कम घरेलू सर्किट में तो पूरा सम्मान मिलना ही चाहिए। आने वाले समय में जैसे-जैसे काउंटी सीजन अपने अंतिम और निर्णायक चरणों में प्रवेश करेगा, फैंस की नजरें एक बार फिर युजवेंद्र चहल के प्रदर्शन पर टिकी होंगी कि वे अपनी टीम के लिए कितने और मैच जिताने में कामयाब होते हैं। उनके इस शानदार खेल ने यह साबित कर दिया है कि सफलता उम्र या टीम से बाहर होने से तय नहीं होती, बल्कि मैदान पर बहाए गए पसीने और अटूट आत्मविश्वास से तय होती है, और चहल इस समय अपनी उसी मेहनत के बल पर इंग्लैंड की धरती पर अपनी सफलता की एक नई और चमकदार इबारत लिख रहे हैं।
Focus Times – Focus Times, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया