KSBKBT 2: स्मृति ईरानी ने याद किए बेरोजगारी वाले दिन, पॉलिटिक्स के बाद खुद कॉल करके मांगा था काम

टेलीविजन की दुनिया से लेकर देश की राजनीति के सबसे ताकतवर गलियारों तक का सफर तय करने वाली जानी-मानी अभिनेत्री और राजनेता स्मृति ईरानी ने अपने जीवन के उन संघर्षपूर्ण दिनों का खुलासा किया है, जब राजनीति में एक कड़े दौर से गुजरने के बाद उन्होंने खुद आगे बढ़कर लोगों को फोन किया और काम की मांग की थी। भारतीय मनोरंजन जगत और राजनीतिक इतिहास के पन्नों में स्मृति ईरानी का नाम एक ऐसे शख्स के रूप में दर्ज है जिसने हर मोर्चे पर अपनी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर अपनी एक अलग और अटूट पहचान बनाई है। एक समय ऐसा था जब घर-घर में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की जुबान पर केवल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ सीरियल का नाम और उसमें तुलसी विरानी का किरदार निभाने वाली स्मृति ईरानी की चर्चा हुआ करती थी। इस प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक शो ने उन्हें देश के कोने-कोने में असीम लोकप्रियता दिलाई थी, लेकिन वक्त का पहिया घूमा और उन्होंने मनोरंजन इंडस्ट्री की चकाचौंध को पीछे छोड़कर सक्रिय राजनीति के मैदान में कदम रख दिया। राजनीति में उन्होंने लंबी पारियां खेलीं और केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालते हुए देश की राजनीति के केंद्र बिंदु में रहीं, लेकिन चुनावी राजनीति के अनिश्चित सफर में कई बार उतार-चढ़ाव भी देखने को मिले। जब राजनीतिक मोर्चे पर उन्हें विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और उनका वह दौर थोड़ा थमा, तो उन्होंने बिना किसी झिझक या अहंकार के अपनी पुरानी दुनिया यानी मनोरंजन और मीडिया जगत की ओर दोबारा लौटने का फैसला किया। हाथ पर हाथ धरे बैठने या अपनी स्थिति पर रोने के बजाय उन्होंने खुद फोन उठाया और मीडिया दिग्गज के सामने अपनी बेरोजगारी का जिक्र करते हुए काम मांगा। उनके इस बेबाक, निडर और व्यावहारिक दृष्टिकोण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि एक असल कलाकार और फाइटर कभी भी परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकता, बल्कि वह शून्य से शुरुआत करने का जज्बा रखता है। स्मृति ईरानी के इस खुलासे के बाद से ही उनके प्रशंसक और आम लोग उनकी इस सादगी, ईमानदारी और काम के प्रति समर्पण की जमकर तारीफ कर रहे हैं, क्योंकि राजनीति के शीर्ष पदों पर रहने के बाद दोबारा आम इंसान की तरह नौकरी मांगना किसी के भी अहंकार को तोड़ने के लिए काफी होता है।

मीडिया दिग्गज उदय शंकर को खुद फोन लगाकर काम मांगने की पूरी कहानी बेहद दिलचस्प है, जिसने इंडस्ट्री के तमाम बड़े दिग्गजों को भी पूरी तरह हैरान कर दिया था

स्मृति ईरानी ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में टाइम्स नाउ के साथ बातचीत करते हुए उन पलों को बहुत ही विस्तार से याद किया जब उन्होंने राजनीति में setback मिलने के बाद मनोरंजन जगत में अपनी री-एंट्री की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने सीधे फोन उठाया और मीडिया तथा मनोरंजन उद्योग के शीर्ष अधिकारियों में शुमार उदय शंकर से संपर्क किया, जो वर्तमान में जियोहॉटस्टार और स्टार के वाइस चेयरमैन के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब स्मृति ईरानी का मशहूर टीवी सीरियल ‘क्योंकि अचानक बंद हुआ था या उसमें बदलाव आए थे, उस दौर में भी उदय शंकर टीवी इंडस्ट्री से ही जुड़े हुए थे और वे इन तमाम समीकरणों को बहुत अच्छी तरह से समझते थे। स्मृति ने इंटरव्यू में बेबाक अंदाज में कहा कि उन्होंने फोन पर बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वे इस वक्त बेरोजगार हैं और क्या वे उन्हें मीडिया या मनोरंजन जगत में कुछ काम दे सकते हैं। नियति का खेल देखिए कि एक समय जिन लोगों की वजह से उनका टेलीविजन का काम छूटा था या इंडस्ट्री से उनका एक अलग समीकरण बना था, उन्हीं के माध्यम से उन्होंने एक बार फिर अपनी जिंदगी के इस नए अध्याय की शुरुआत की। जब स्मृति ईरानी का यह फोन उदय शंकर के पास पहुंचा, तो वे एक पल के लिए पूरी तरह चौंक गए थे क्योंकि किसी ने यह उम्मीद नहीं की थी कि देश की राजनीति के शीर्ष पदों पर काम करने वाली एक कद्दावर नेत्री अचानक इस तरह फोन करके मनोरंजन जगत में वापसी करने की इच्छा जताएगी। उदय शंकर यह पूरी तरह सुनिश्चित करना चाहते थे कि क्या स्मृति वास्तव में इतने लंबे राजनीतिक सफर और व्यस्त प्रशासनिक जीवन के बाद वापस उसी थका देने वाली और रोज की मेहनत वाली टेलीविजन इंडस्ट्री में लौटने के लिए पूरी तरह मानसिक रूप से तैयार हैं या नहीं।

सेट पर बारह-हजार की शिफ्ट और दिहाड़ी पर काम करने को लेकर लोगों के मन में जो सवाल थे, स्मृति ईरानी ने उन सभी संकोच और हिचकिचाहट को पूरी तरह दरकिनार कर दिया

जब स्मृति ईरानी ने दोबारा टीवी की दुनिया में कदम रखने का मन बनाया, तो उनके इस फैसले से सेट पर मौजूद हर एक व्यक्ति थोड़ा हैरान और असमंजस में था कि आखिर एक जानी-मानी हस्ती इस तरह कैसे काम करेगी। इस बारे में बात करते हुए स्मृति ने बहुत ही व्यावहारिक और स्पष्ट बातें कहीं कि उनके लिए काम मांगना न तो कोई अजीब बात थी और न ही इसमें किसी भी प्रकार की शर्म महसूस करने की कोई आवश्यकता थी। उन्होंने इसे अपने जीवन और करियर के अगले पड़ाव की शुरुआत के लिए एक बेहद प्रैक्टिकल और जरूरी कोशिश माना, क्योंकि इंसान की असली पहचान उसके काम से होती है न कि इस बात से कि वह किस पद पर रह चुका है। जिन लोगों को टेलीविजन इंडस्ट्री के काम करने के तौर-तरीकों का अनुभव है, वे बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि यहां सुबह से लेकर रात तक यानी बारह से चौदह घंटे की लंबी और थका देने वाली शिफ्ट्स में काम करना पड़ता है, और आप कभी भी मानसिक रूप से उस काम से पूरी तरह फ्री नहीं हो पाते हैं। उदय शंकर ने भी उनसे यह सवाल पूछा था कि क्या वे एक बार फिर से सेट पर बतौर साधारण एम्प्लॉई आने और उस कड़े प्रशासनिक व शारीरिक श्रम वाले रूटीन के साथ तालमेल बिठाने के लिए तैयार हैं। इसके जवाब में स्मृति पूरी तरह से आश्वस्त थीं और उन्होंने अपनी रजामंदी दे दी, हालांकि सेट पर मौजूद बाकी लोगों के मन में यह सवाल जरूर था कि आखिर इतने बड़े राजनीतिक कद के बाद कोई व्यक्ति कैसे दैनिक मजदूरी या दिहाड़ी के आधार पर मिलने वाली कमाई के तर्ज पर दोबारा अपना गुजारा करेगा। लेकिन स्मृति ईरानी ने इन सभी छोटी-सोच वाली बातों को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत करने वाले इंसान के लिए कोई भी काम छोटा नहीं होता। उन्होंने अपनी पुरानी काबिलियत का जादू एक बार फिर से चलाया और उनका नया प्रोजेक्ट आते ही दर्शकों के बीच छा गया, जिससे यह साबित हो गया कि वे किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा के दम पर शिखर पर पहुंचने का हुनर अच्छी तरह जानती हैं।

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के दिनों से लेकर आज तक का यह सफर इस बात की गवाही देता है कि जीवन में संघर्ष कभी खत्म नहीं होते, बल्कि उन्हें पार करने का जज्बा ही इंसान को महान बनाता है

स्मृति ईरानी के जीवन का यह वाकया आज की युवा पीढ़ी और उन तमाम लोगों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है जो जीवन में किसी एक मोड़ पर असफलता मिलने के बाद निराश होकर बैठ जाते हैं। टेलीविजन के एक छोटे से पर्दे से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाली स्मृति ने जिस प्रकार भारतीय राजनीति के सर्वोच्च शिखरों को छुआ और उसके बाद जब परिस्थितियां बदलीं तो बिना किसी झूठे अहंकार के दोबारा अपनी जड़ों की तरफ लौटकर जमीन से जुड़ने का साहस दिखाया, वह हर किसी के लिए सीखने योग्य है। समाज में अक्सर यह मान लिया जाता है कि एक बार ऊंचे ओहदे पर पहुंच जाने के बाद इंसान दोबारा नीचे आकर साधारण कार्यशैली का हिस्सा नहीं बन सकता, लेकिन स्मृति ईरानी ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़कर रख दिया। उन्होंने यह दिखा दिया कि कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है और अपने परिवार तथा करियर को संभालने के लिए यदि आपको दोबारा से जमीन पर आकर मेहनत करनी पड़े, तो इसमें तनिक भी संकोच नहीं होना चाहिए। उनके इस इंटरव्यू के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर उनकी इस सादगी और खुलेपन की भारी प्रशंसा हो रही है, और लोग उनके इस संघर्ष भरे सफर को एक सच्ची सर्वाइवल स्टोरी के रूप में देख रहे हैं। आज जब दर्शक एक बार फिर से उनके पुराने शोज़ और उनके नए प्रोजेक्ट्स को याद कर रहे हैं, तो यह साफ हो जाता है कि जनता के दिलों में उनके लिए जो सम्मान और प्यार पहले दिन था, वह आज भी वैसा ही बल्कि और अधिक मजबूत हुआ है। स्मृति ईरानी का यह जीवन दर्शन हमें यह सिखाता है कि सफलता और असफलता जीवन के दो पहलू हैं, लेकिन असली विजेता वही है जो हर परिस्थिति में मुस्कुराते हुए नई शुरुआत करने का माद्दा रखता है।