नागालैंड में जहरीली शराब का तांडव: 19 लोगों की संदिग्ध मौत, हड़कंप के बीच पुलिस ने 3000 बोतलें कीं जब्त

कोहिमा/दीमापुर। पूर्वोत्तर के शराबबंदी वाले राज्य नागालैंड से एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई है। राज्य में संदिग्ध रूप से जहरीली और मिलावटी शराब पीने के कारण कम से कम 19 लोगों की जान चली गई है, जबकि कई अन्य पीड़ितों की हालत गंभीर बनी हुई है। पीड़ितों को आनन-फानन में नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उनकी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस दर्दनाक घटना की खबर फैलते ही राज्य प्रशासन, आबकारी विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

नागालैंड में ‘नागालैंड लिकर टोटल प्रोहिबिशन’ (NLTP) एक्ट के तहत शराब की बिक्री और निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत ने राज्य में चल रहे अवैध शराब के भूमिगत नेटवर्क और सीमा पार से होने वाली तस्करी की गंभीर पोल खोल दी है। घटना के तुरंत बाद कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए पुलिस ने राज्यव्यापी सघन छापेमारी अभियान शुरू किया, जिसके तहत अब तक 3,000 से अधिक अवैध शराब की बोतलें बरामद की गई हैं।

अस्पताल सूत्रों और स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ितों ने एक स्थानीय अवैध ठिकाने से शराब खरीदी थी। इसे पीने के कुछ ही घंटों बाद लोगों को गंभीर शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

  • लक्षण और तेजी से बिगड़ती स्थिति: पीड़ितों ने पेट में असहनीय दर्द, तेज सिरदर्द, लगातार उल्टी और सांस लेने में भारी तकलीफ की शिकायत की। कुछ पीड़ितों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही अपनी आंखों की रोशनी धुंधली होने और पूरी तरह चले जाने की बात कही।

  • अस्पताल में अफरा-तफरी: हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद 19 लोगों ने दम तोड़ दिया।

  • मिथाइल अल्कोहल का अंदेशा: डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों का प्राथमिक अनुमान है कि शराब को अत्यधिक नशीला बनाने के चक्कर में उसमें औद्योगिक सॉल्वेंट के रूप में इस्तेमाल होने वाले जहरीले ‘मिथाइल अल्कोहल’ (Methanol) की भारी मिलावट की गई थी, जो शरीर के आंतरिक अंगों को कुछ ही घंटों में फेल कर देता है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह विभाग के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस ने सीमावर्ती इलाकों और अवैध शराब के अड्डों पर ताबड़तोड़ छापे मारे:

  • भारी मात्रा में खेप बरामद: छापेमारी के दौरान विभिन्न गुप्त गोदामों, ढाबों और अवैध अड्डों से कुल 3,000 बोतल अवैध और नकली शराब जब्त की गई है।

  • अवैध भट्टियों और नेटवर्क पर कार्रवाई: पुलिस ने उन ठिकानों को सील कर दिया है जहां नकली लेबल लगाकर घटिया शराब की बॉटलिंग की जा रही थी। इसके अलावा असम और आसपास के सीमावर्ती इलाकों से शराब की अवैध तस्करी करने वाले सिंडिकेट की धरपकड़ शुरू कर दी गई है।

  • कई संदिग्ध हिरासत में: पुलिस ने गैर-इरादतन हत्या, मिलावट और निषेध कानून (NLTP Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कई शराब माफियाओं और स्थानीय विक्रेताओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

नागालैंड में साल 1989 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन इस ताजा त्रासदी ने एक बार फिर शराबबंदी की जमीनी हकीकत पर तीखी बहस छेड़ दी है:

  • समानांतर ब्लैक मार्केट का उभार: नागरिक समाज संगठनों, डॉक्टरों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद राज्य में पड़ोसी राज्यों से तस्करी होकर आने वाली शराब या स्थानीय स्तर पर बनने वाली जहरीली शराब आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

  • गुणवत्ता नियंत्रण का अभाव: प्रतिबंध के चलते शराब की कोई गुणवत्ता जांच नहीं होती, जिसके कारण असामाजिक तत्व अधिक मुनाफे के लिए केमिकल मिलाकर नकली शराब बेचते हैं और गरीब व मजदूर तबका इसका पहला शिकार बनता है।

  • कानून की समीक्षा की मांग: इस हादसे के बाद राज्य में राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या कड़े निषेध कानून को जारी रखा जाए या फिर सख्त नियमों और निगरानी के साथ इसका व्यावहारिक समाधान तलाशा जाए।

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं ताकि जहरीली शराब के किसी भी नए मामले में तुरंत एंटीडोट और वेंटिलेटर सपोर्ट उपलब्ध कराया जा सके।

प्रशासन ने सार्वजनिक घोषणाएं कर स्थानीय जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध या अवैध स्रोत से खरीदी गई शराब का सेवन बिल्कुल न करें। यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में ऐसी शराब पी है और उसे धुंधला दिखने या बेचैनी की शिकायत हो रही है, तो वह बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करे।