
सनातन धर्म में आश्विन मास की अमावस्या तिथि का विशेष और अत्यंत पवित्र स्थान माना जाता है। इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या (Sarvapitru Amavasya 2026) या महालय अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह पितृ पक्ष (Shraddh Paksha) का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है, जिस दिन धरती पर आए सभी पितर अपने लोक को वापस लौटते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या का दिन उन सभी पूर्वजों के लिए समर्पित होता है जिनकी मृत्यु की तिथि परिजनों को याद नहीं होती या फिर जो किसी कारणवश पूरे पितृ पक्ष के दौरान अपना श्राद्ध और तर्पण नहीं प्राप्त कर पाते हैं। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति, मोक्ष और उनकी कृपा प्राप्ति के लिए विशेष रूप से ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मण भोज कराने से पूर्वज पूर्ण रूप से तृप्त होते हैं और आशीर्वाद देकर विदा होते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन कराते समय कुछ खास नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए, अन्यथा पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता है:
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स्नान और शुद्धि: अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करें और पवित्र मन से पितरों के निमित्त तर्पण व पूजन की तैयारी करें। इसके बाद ब्राह्मणों को आदरपूर्वक अपने घर आमंत्रित करें।
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आसन और दिशा: घर आए ब्राह्मणों को साफ और पवित्र आसन पर बैठाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भोजन कराते समय ब्राह्मण का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि ये दोनों दिशाएं धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं।
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मन की शांति: भोजन परोसते समय अपना मन पूरी तरह शांत रखें और किसी भी प्रकार का क्रोध या जल्दबाजी न करें। पूरे सत्कार के साथ उन्हें भोजन कराएं।
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दान-दक्षिणा: भोजन के उपरांत ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, धन, वस्त्र और फल का दान दें तथा उनके चरण छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
पितरों को समर्पित इस दिन ब्राह्मणों के भोजन में सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है। भोजन में दूध, चावल और चीनी से बनी शुद्ध खीर को अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि खीर पितरों को बेहद प्रिय होती है। इसके अलावा सात्विक दाल, सब्जी, पूरी, ताजे फल और पारंपरिक मिठाइयों को भोजन में परोसा जाना चाहिए। भोजन पूरी तरह से प्याज और लहसुन के बिना (सात्विक) बना होना चाहिए।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या की तिथि और श्राद्ध कर्म के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
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सर्वपितृ अमावस्या तिथि की शुरुआत: 9 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट पर
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सर्वपितृ अमावस्या तिथि का समापन: 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर
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उदया तिथि के अनुसार: इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी।
धार्मिक अनुष्ठानों और श्राद्ध कर्म के लिए सही समय का चुनाव करना बहुत जरूरी है:
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कुतुप मुहूर्त (Kutup Muhurat): सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक (ब्राह्मण भोज और तर्पण के लिए यह समय सबसे उत्तम माना जाता है)।
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रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से दोपहर 1 बजकर 18 मिनट तक।
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अपराह्न काल: दोपहर 1 बजकर 18 मिनट से दोपहर 3 बजकर 37 मिनट तक।
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