
आधुनिक जीवनशैली, लेट-नाइट पार्टियों और काम के अत्यधिक तनाव के बीच आज युवाओं और वयस्कों में शराब, सिगरेट, ई-सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन तेजी से बढ़ा है। अक्सर सिनेमा, सोशल मीडिया और दोस्तों के बीच यह गलत धारणा फैला दी जाती है कि नशा करने से झिझक मिटती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और यौन क्रिया का आनंद दोगुना हो जाता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान, यूरोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट इस दावे को पूरी तरह से खोखला और खतरनाक करार देते हैं। हकीकत यह है कि नशा शुरुआत में कुछ पलों के लिए मानसिक तनाव और सामाजिक संकोच को जरूर दबा सकता है, लेकिन शरीर के भीतर यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System), हार्मोनल संतुलन और रक्त वाहिकाओं पर इतना गहरा प्रहार करता है कि धीरे-धीरे यौन क्षमता पूरी तरह जवाब दे जाती है। देश के विभिन्न शहरों के क्लीनिकों में हर महीने आने वाले सैकड़ों जोड़ों की दांपत्य कलह और यौन असंतोष की जड़ में अक्सर यही नशा सबसे बड़ा खलनायक बनकर सामने आता है, जिसे लोग समय रहते पहचानने में चूक जाते हैं।
शराब को अक्सर मूड बनाने वाले साधन के रूप में देखा जाता है, लेकिन फार्माकोलॉजिकल दृष्टि से अल्कोहल एक शक्तिशाली ‘सेंट्रल नर्वस सिस्टम डिप्रेसेंट’ है। इसका मतलब यह है कि शराब दिमाग के सोचने, समझने और शरीर को सिग्नल भेजने की गति को धीमा कर देती है।
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इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile Dysfunction): पुरुषों में स्वस्थ यौन क्रिया के लिए दिमाग, हार्मोन्स, तंत्रिकाओं और रक्त प्रवाह का एक सटीक तालमेल जरूरी होता है। जब कोई व्यक्ति शराब के प्रभाव में होता है, तो दिमाग लिंग की नसों तक सही समय पर रक्त संचार का संकेत नहीं भेज पाता। इसे मेडिकल भाषा में ‘अल्कोहल इंड्यूस्ड सेक्सुअल डिस्फंक्शन’ या बोलचाल में ‘व्हिस्की जेम’ कहा जाता है।
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कमजोरी और देरी से स्खलन: अत्यधिक शराब पीने से न केवल उत्तेजना हासिल करने में दिक्कत आती है, बल्कि संवेदनशीलता कम होने के कारण ऑर्गेज्म तक पहुंचना भी असंभव या अत्यधिक दर्दनाक हो जाता है।
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टेस्टोस्टेरोन में भारी गिरावट: लगातार शराब पीने से लिवर को भारी नुकसान पहुंचता है। लिवर पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाता है। लिवर खराब होने पर शरीर में टेस्टोस्टेरोन घटता है और महिला हार्मोन एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे पुरुषों में कामेच्छा (Libido) खत्म होने लगती है और स्तनों का असामान्य उभार (Gynecomastia) तक हो सकता है।
जो लोग यह सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते और केवल दिन में कुछ सिगरेट फूंकते हैं, उन्हें यह जान लेना चाहिए कि तंबाकू और निकोटीन यौन अंगों के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
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रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना (Vasoconstriction): निकोटीन सीधे तौर पर धमनियों को सिकोड़ता है और उनकी दीवारों को सख्त बना देता है (एथेरोस्क्लेरोसिस)। जिस तरह दिल की धमनियां ब्लॉक होने से हार्ट अटैक आता है, उसी तरह लिंग और पेल्विक हिस्से की बेहद बारीक सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं में खून की आपूर्ति रुक जाती है। पर्याप्त खून न पहुंचने पर तनाव आना बंद हो जाता है, जो आगे चलकर स्थायी नपुंसकता का रूप ले लेता है।
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स्पर्म काउंट और गुणवत्ता का खात्मा: सिगरेट के धुएं में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड, टार और भारी धातुएं अंडकोष में बनने वाले शुक्राणुओं के डीएनए को खंडित (DNA Fragmentation) कर देती हैं। इससे पुरुषों में स्पर्म काउंट घटता है, शुक्राणुओं की गतिशीलता (Motility) खत्म हो जाती है और विकृत शुक्राणु बनने लगते हैं, जो सीधे तौर पर पुरुष बांझपन (Male Infertility) और गर्भपात का कारण बनते हैं।
यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं केवल पुरुषों तक सीमित नहीं हैं; शराब, धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थों का उतना ही विध्वंसक असर महिलाओं के शरीर पर भी पड़ता है।
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प्राकृतिक चिकनाई (Lubrication) की कमी: शराब और निकोटीन शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं और योनि की रक्त नलिकाओं में रक्त प्रवाह को कम कर देते हैं। इसके चलते उत्तेजना के दौरान प्राकृतिक लुब्रिकेशन नहीं बन पाता, जिससे संभोग अत्यधिक दर्दनाक और कष्टदायक (Dyspareunia) बन जाता है।
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कामेच्छा का समाप्त होना और एनोर्गास्मिया: नशीले पदार्थों के लगातार सेवन से महिलाओं में सेक्स की इच्छा पूरी तरह खत्म होने लगती है और ऑर्गेज्म तक पहुंच पाना नामुमकिन जैसा हो जाता है।
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हार्मोनल असंतुलन और ओव्यूलेशन की रुकावट: धूम्रपान करने वाली महिलाओं में मेनोपॉज समय से दो से तीन साल पहले आ जाता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं, अंडे की गुणवत्ता खराब हो जाती है और कंसीव करने में गंभीर कठिनाइयां आती हैं।
भांग (कैनबिस), कोकीन, एमडीएमए और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के सेवन को अक्सर युवाओं द्वारा पार्टी लाइफस्टाइल का हिस्सा मान लिया जाता है, लेकिन यह भ्रम लंबे समय में पूरी तरह विनाशकारी साबित होता है। मारिजुआना या गांजे का नियमित सेवन दिमाग के हाइपोथैलेमस को सुस्त कर देता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है। वहीं, कोकीन और पार्टी ड्रग्स मस्तिष्क के डोपामाइन रिसेप्टर्स को पूरी तरह निष्क्रिय कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि कुछ समय बाद व्यक्ति बिना ड्रग्स के किसी भी सामान्य शारीरिक स्पर्श, भावनात्मक लगाव या यौन सुख को महसूस करने की क्षमता ही खो बैठता है। इससे न केवल शारीरिक अक्षमता आती है, बल्कि गंभीर डिप्रेशन, एंग्जायटी, शादी टूटने की नौबत और सामाजिक अलगाव पैदा होता है।
यदि समय रहते इस घातक आदत को पहचान लिया जाए और नशे से दूरी बना ली जाए, तो शरीर में स्वयं को ठीक करने की अद्भुत क्षमता होती है।
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नशे का त्याग और डिटॉक्सिफिकेशन: सिगरेट और शराब को छोड़ते ही कुछ हफ्तों के भीतर रक्त संचार में उल्लेखनीय सुधार होने लगता है और नसों की लोच वापस लौटने लगती है।
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पोषक आहार और एंटीऑक्सीडेंट्स: अपने दैनिक आहार में जिंक, मैग्नीशियम और एल-आर्जिनिन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे कद्दू के बीज, अखरोट, अनार, हरी पत्तेदार सब्जियां और लहसुन शामिल करें जो रक्त प्रवाह और नाइट्रिक ऑक्साइड को बढ़ाते हैं।
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नियमित कार्डियो और पेल्विक एक्सरसाइज: रोजाना 30 से 40 मिनट की ब्रिस्क वॉक, दौड़ना, तैराकी और ‘कीगल एक्सरसाइज’ (Kegel Exercises) करने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जननांगों तक रक्त संचार तेज होता है।
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हिचकिचाहट छोड़ डॉक्टर से लें सलाह: यौन समस्याओं को शर्म या अपराधबोध का विषय न बनाएं। यदि नशा छोड़ने के बाद भी परेशानी बनी रहती है, तो किसी झोलाछाप या नीम-हकीम के चक्कर में पड़ने के बजाय योग्य एंड्रोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट या सेक्सोलॉजिस्ट से परामर्श लें। नशे का क्षणिक रोमांच कभी भी एक स्वस्थ, सुंदर और संतुष्ट दांपत्य जीवन का विकल्प नहीं हो सकता।
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