
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए आज का दिन बड़ी आर्थिक राहत लेकर आया है। प्रदेश में हाल के महीनों में आई भीषण बाढ़, अतिवृष्टि, चक्रवाती तूफान और बेमौसम ओलावृष्टि की मार झेल चुके किसानों के जख्मों पर मरहम लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज एक बड़ा वित्तीय पैकेज जारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम से प्रदेश के 9 लाख 18 हजार 91 (लगभग 9.18 लाख) प्रभावित किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 483 करोड़ रुपये (कुल स्वीकृत लगभग ₹493 करोड़) से अधिक की कृषि निवेश अनुदान राशि एक क्लिक में ट्रांसफर करेंगे। इस विशेष अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्थानीय जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि त्योहारों से ठीक पहले किसानों को यह सहायता राशि मिलने से उन्हें रबी सीजन की अगली बुवाई के लिए बीज, खाद और जरूरी कृषि संसाधन जुटाने में किसी भी तरह की आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लेकर 9 अक्टूबर तक राज्य के विभिन्न जिलों में प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का राजस्व और कृषि विभाग की टीमों द्वारा युद्धस्तर पर संयुक्त सर्वे कराया गया था।
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सटीक सैटेलाइट व स्थलीय पड़ताल: बाढ़ का पानी उतरने के तुरंत बाद अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर खेतों में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति वाले किसानों की पहचान की, जिसमें 9 लाख 18 हजार 91 किसान चिन्हित हुए।
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अग्रिम जारी की गई थी राशि: राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, जिलों को पहले ही 169 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान के रूप में अग्रिम भेजे जा चुके थे। इनमें से 1,29,326 किसानों को 78.75 करोड़ रुपये पहले ही बांटे जा चुके हैं।
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शेष राशि का आज एकमुश्त वितरण: आज होने वाले इस बड़े डीबीटी ट्रांसफर के जरिए बाकी चिन्हित सभी किसानों को पूरी मुआवजा राशि सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिससे किसी बिचौलिए या दलाल की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो गई है।
सीएम योगी का यह राहत अभियान केवल फसलों के नुकसान तक ही सीमित नहीं है। सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पीड़ित परिवारों को हर स्तर पर आर्थिक संबल दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में हुई जनहानि (Human Loss), आकाशीय बिजली या पानी में बहने से हुई पशुहानि (Cattle Loss) और पक्के-कच्चे मकानों के ढहने से हुए नुकसान के मामलों में प्रभावित परिवारों को अब तक 225.93 करोड़ रुपये की राहत राशि अलग से वितरित की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि आपदा के किसी भी मामले में पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर सरकारी अनुग्रह राशि मिल जानी चाहिए और प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाल ही में आए आंधी-तूफान और चक्रवाती बारिश के कारण किसानों के खेतों और निजी जमीनों पर गिरे विशाल पेड़ों के निस्तारण को लेकर भी सीएम योगी ने संवेदनशीलता दिखाई है।
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मुख्यमंत्री ने वन विभाग और उत्तर प्रदेश वन निगम को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि खेतों में गिरे पेड़ों की लकड़ी के उठाव और परिवहन के लिए किसानों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत आवश्यक ‘ट्रांजिट परमिट’ (अभिवहन अनुज्ञा पत्र) जारी किए जाएं।
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परमिट जारी करने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाएगी ताकि किसानों को किसी प्रकार का आर्थिक या मानसिक उत्पीड़न न झेलना पड़े और वे अपनी जमीन को अगली फसल के लिए समय पर खाली कर सकें।
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सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर गिरे पेड़ों को भी तुरंत हटाने के लिए जिलाधिकारियों और प्रभागीय वनाधिकारियों (DFO) की संयुक्त जवाबदेही तय की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में दोहराया है कि प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों की पीड़ा को कम करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। जब किसान का पसीना मिट्टी में मिलकर देश का पेट भरता है, तो विपदा के समय उसके नुकसान की भरपाई करना शासन का परम कर्तव्य बन जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड समेत पूरे प्रदेश के जिन जिलों में अतिवृष्टि ने भारी तबाही मचाई थी, वहां आज सीधे खातों में पहुंची इस धनराशि से किसानों के चेहरों पर संतोष लौटा है। आज का यह 483 करोड़ रुपये का वित्तीय हस्तांतरण न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, बल्कि अन्नदाताओं के आत्मविश्वास को भी मजबूत करेगा।
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