
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त और थकाऊ शेड्यूल की बानगी एक बार फिर से देखने को मिल रही है, जहाँ खिलाड़ियों को सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिल पा रही है। वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू या विदेशी धरती पर खेली गई रोमांचक और कड़ी श्रृंखला के समाप्त होने के ठीक चार दिन के भीतर ही भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर से क्रिकेट के मैदान पर उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बार टीम का अगला पड़ाव दुनिया की सबसे खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण पिचों में शुमार न्यूजीलैंड की धरती है, जहाँ की तेज और उछाल भरी हवाएं बल्लेबाजों के लिए हमेशा से कड़ी परीक्षा साबित होती रही हैं। क्रिकेट प्रेमियों और खेल विशेषज्ञों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि लगातार बैक-टू-बैक क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भारी दबाव पड़ सकता है, इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों का यह जज्बा और प्रतिबद्धता इस बात का प्रमाण है कि वे देश के लिए हर परिस्थिति में मैदान पर उतरने को तत्पर रहते हैं। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के सामने इस बात की बड़ी चुनौती होगी कि वे इस छोटे से अंतराल में खिलाड़ियों के वर्कलोड (Workload Management) को कैसे संतुलित करें ताकि खिलाड़ी चोटिल होने से बचे रहें।
न्यूजीलैंड के इस बहुप्रतीक्षित दौरे का आगाज बेहद रोमांचक अंदाज में क्राइस्टचर्च के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित मैदान पर होने जा रहा है। क्राइस्टचर्च की ठंडी हवाएं, सीमिंग और स्विंग कंडीशंस भारतीय बल्लेबाजों के लिए हमेशा से एक बड़ी अग्निपरीक्षा जैसी रही हैं। जब टीम इंडिया वेस्टइंडीज की धीमी और स्पिन-फ्रेंडली पिचों से सीधे निकलकर न्यूजीलैंड की हरी-भरी और तेज पिचों पर उतरेगी, तो सामंजस्य बिठाना अपने आप में एक बहुत बड़ा टास्क होगा। कप्तान और कोच के सामने शुरुआती एकादश (Playing XI) का चयन करने को लेकर माथापच्ची शुरू हो चुकी है, क्योंकि न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट, मैट हेनरी और टिम साउदी जैसे अनुभवी धुरंधर अपनी ही धरती पर किसी भी बल्लेबाजी क्रम को तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं। पिछले दौरों पर भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड में ऐतिहासिक प्रदर्शन करके दिखाया है, ऐसे में इस बार भी फैंस को उसी जोश और आक्रामक खेल की उम्मीद है, बशर्ते खिलाड़ी चार दिन के इस संक्षिप्त अंतराल में जेटलैग (Jetlag) और थकान से उबरने में सफल रहें।
लगातार क्रिकेट खेलने के इस दौर में बीसीसीआई (BCCI) और टीम प्रबंधन के लिए ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। वेस्टइंडीज सीरीज के तुरंत बाद न्यूजीलैंड जैसे कठिन दौरे पर जाना इस बात को और अनिवार्य बना देता है कि कुछ सीनियर खिलाड़ियों को शुरुआती मैचों में आराम दिया जाए या फिर रोटेशन पॉलिसी का सख्ती से पालन किया जाए। ऐसे में, बेंच स्ट्रेंथ की परीक्षा लेने का यह सबसे सुनहरा अवसर है, जहाँ युवा खिलाड़ियों को विदेशी सरजमीं पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने का मौका मिलेगा। घरेलू क्रिकेट और इंडिया-ए की तरफ से शानदार प्रदर्शन करके आए युवा बल्लेबाज और गेंदबाज इस मौके को दोनों हाथों से भुनाने के लिए बेताब हैं। टीम के सपोर्ट स्टाफ और फिजियोथेरेपिस्ट्स की पूरी फौज इस बात पर पैनी नजर बनाए हुए है कि खिलाड़ियों की फिटनेस पर जरा भी आंच न आए, क्योंकि आने वाले महीनों में भारतीय टीम को कई और बड़े और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स खेलने हैं।
क्राइस्टचर्च के इस पहले मुकाबले से शुरू होने वाली इस रोमांचक श्रृंखला का पूरा शेड्यूल पहले ही तय किया जा चुका है, जिसमें टी20, वनडे और टेस्ट मैचों की एक पूरी सीरीज शामिल है। कीवी टीम को उसकी अपनी ही घरेलू सरजमीं पर हराना दुनिया की किसी भी क्रिकेट टीम के लिए कभी भी आसान काम नहीं रहा है, और ऊपर से बिना किसी पर्याप्त अभ्यास सत्र या रिकवरी टाइम के सीधे मैदान पर उतरना इस चुनौती को और अधिक कठिन बना देता है। इसके बावजूद, भारतीय टीम का मौजूदा फॉर्म, खिलाड़ियों का गजब का आत्मविश्वास और मैच जिताऊ प्रदर्शन करने की क्षमता यह उम्मीद जगाती है कि टीम इंडिया एक बार फिर से विदेशी धरती पर तिरंगा का परचम लहराने में सफल होगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब क्राइस्टचर्च के आसमान और पिच पर टिकी हुई हैं, जहाँ यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या ‘रेस्टलेस’ यानी बिना आराम के उतरी यह भारतीय टीम कीवी शेरों को उनकी ही मांद में मात दे पाती है या नहीं।
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