
भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) के सुनहरे इतिहास में कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जिन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की, बल्कि अपने बोल्ड विषयों और सामाजिक मुद्दों के कारण बड़े विवादों का सामना भी किया। आज से ठीक 44 साल पहले यानी साल 1982 में बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार बी.आर. चोपड़ा (B.R. Chopra) के निर्देशन में एक ऐसी कल्ट फिल्म रिलीज हुई थी, जिसके सिनेमाघरों तक पहुंचने से पहले ही देश भर में भारी हंगामा मच गया था। स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि फिल्म के मेकर्स के खिलाफ एक-दो नहीं बल्कि कुल 34 मुकदमे दर्ज किए गए थे, सिनेमाघरों के बाहर फिल्म का बहिष्कार करने के पोस्टर चस्पा कर दिए गए थे, और फिल्म की मुख्य अभिनेत्री को इतने धमकियां भरे फोन आए कि उन्हें अपनी जान खतरे में महसूस होने लगी थी। आखिर कौन सी थी वह ऐतिहासिक फिल्म और क्या था वह पूरा विवाद, आइए विस्तार से जानते हैं इस दिलचस्प और चौंकाने वाले किस्से के बारे में।
‘तलाक-तलाक-तलाक’ से शुरू हुआ था विवाद, मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद बदला गया था नाम
बात साल 1982 की है, जब प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक बी.आर. चोपड़ा समाज के एक संवेदनशील और ज्वलनशील मुद्दे पर फिल्म बनाने जा रहे थे। इस फिल्म की कहानी मुख्य रूप से मुस्लिम पर्सनल लॉ, समाज में महिलाओं के अधिकारों और उस दौर की कुप्रथाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद मेकर्स ने इसका ओरिजिनल टाइटल ‘तलाक-तलाक-तलाक’ तय किया था।
लेकिन जैसे ही इस टाइटल और फिल्म के विषय की भनक लगी, वैसे ही देश के कई मुस्लिम संगठनों और धार्मिक समूहों ने इस पर कड़ी आपत्ति जतानी शुरू कर दी। उनका यह कहना था कि एक संवेदनशील धार्मिक विषय पर इस तरह की फिल्म बनाना और उसका ऐसा नाम रखना इस्लामी कानूनों और भावनाओं के खिलाफ है। बढ़ते हुए जन-आक्रोश और कानूनी पचड़ों को भांपते हुए दूरदर्शी बी.आर. चोपड़ा ने समझदारी दिखाते हुए फिल्म के इस विवादित टाइटल को बदलने का फैसला किया और इसे नया नाम दिया ‘निकाह’ (Nikaah)। टाइटल बदलने के बावजूद समाज का एक वर्ग शांत नहीं हुआ और फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी रहा।
फिल्म के खिलाफ दर्ज हुए थे 34 मुकदमे, सिनेमाघरों के बाहर लगाए गए थे बहिष्कार के पोस्टर
टाइटल बदलने के बाद भी जब बात नहीं बनी, तो विरोध का दायरा और अधिक व्यापक हो गया। हालात यह हो गए थे कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस फिल्म के खिलाफ कुल 34 से अधिक कानूनी मुकदमे दर्ज कर दिए गए थे।
जब फिल्म रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार थी, तब सिनेमाघरों के बाहर भारी विरोध देखने को मिला। थिएटर्स के बाहर ऐसे पोस्टर चस्पा कर दिए गए थे, जिन पर साफ-साफ लिखा था कि ‘यह फिल्म कोई नहीं देखेगा’ और दर्शकों को सिनेमाघर के अंदर न जाने की चेतावनी दी गई थी। फिल्म रिलीज से पहले ही चारों तरफ एक तनाव का माहौल बन गया था, जिससे ऐसा लगने लगा था कि यह फिल्म शायद ही कभी बड़े पर्दे का मुंह देख पाएगी।
हीरोइन सलमा आगा को मिले थे जान से मारने के धमकी भरे फोन, जारी हुआ था फतवा
इस पूरे विवाद का सबसे डरावना पहलू यह था कि इसका सबसे बड़ा मानसिक और शारीरिक दबाव फिल्म की नई-नवेली लीड एक्ट्रेस सलमा आगा (Salma Agha) पर पड़ा था। ‘निकाह’ फिल्म से ही अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री सलमा आगा ने अपने एक इंटरव्यू में इस खौफनाक दौर को याद करते हुए बताया था कि उस दौरान उनके खिलाफ कई तरह की बातें फैलाई गई थीं और यहां तक कि उनके खिलाफ फतवा तक जारी कर दिया गया था।
सलमा आगा के मुताबिक, उस दौर में उनके घर के फोन पर लगातार अज्ञात लोगों से धमकी भरे फोन आ रहे थे, जिसमें उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनियां दी जा रही थीं। उन दिनों की स्थिति को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें अपनी जान का खतरा सताने लगा था और उन्हें ऐसा महसूस होने लगा था कि इस फिल्म में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा जोखिम बन गया है।
जब फिल्म रिलीज हुई तो दर्शकों का बदला नजरिया, पांच साल तक सिनेमाघरों में जमी रही ‘निकाह’
तमाम धमकियों, मुकदमों और विरोध प्रदर्शनों के बीच आखिरकार साल 1982 में बी.आर. चोपड़ा की यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। लेकिन जैसे ही दर्शकों ने थिएटर्स के अंदर जाकर इस फिल्म को देखा, तो उनका नजरिया पूरी तरह से बदल गया।
लोगों को यह समझ आ गया कि जिस फिल्म को लेकर इतना बवाल मचाया जा रहा था, दरअसल वह समाज की महिलाओं के अधिकारों और उनके दर्द को बयां करने वाली एक बेहद संवेदनशील और खूबसूरत पारिवारिक फिल्म थी। फिल्म में राज बब्बर (Raj Babbar) और दीपक पराशर (Deepak Parashar) ने भी अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया था। धीरे-धीरे सारा विरोध थम गया और माउथ पब्लिसिटी के चलते यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई। आलम यह था कि दर्शकों के भारी प्यार के चलते यह फिल्म कई सिनेमाघरों में लगातार पांच साल (या लंबे समय तक रिकॉर्ड तोड़ अवधि) तक टिकी रही और सलमा आगा रातों-रात भारतीय सिनेमा की एक बड़ी स्टार बन गईं। आज भी ‘निकाह’ को भारतीय सिनेमा की सबसे साहसी और बेहतरीन सामाजिक फिल्मों में गिना जाता है।
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