सूडान में सैन्य ड्रोन हमले का कहर: दक्षिण दारफुर के भीड़भाड़ वाले बाजार में भीषण तबाही, 112 मासूमों और नागरिकों की दर्दनाक मौत

पूर्वी अफ्रीकी देश सूडान (Sudan) के गृह युद्ध के इतिहास से इस वक्त एक बेहद दहला देने वाली और खौफनाक खबर सामने आ रही है। सूडान के दक्षिण दारफुर (South Darfur) प्रांत में स्थित न्याला शहर के एक बेहद व्यस्त और भीड़भाड़ वाले बाजार पर हुए भीषण ड्रोन हमले में 112 से अधिक लोगों की जान चली गई है, जबकि डेढ़ सौ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना में मरने वालों में बड़ी संख्या में मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, जिससे पूरे अंतरराष्ट्रीय जगत में सनसनी फैल गई है। सूडानी सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच चल रहे खूनी संघर्ष में अब आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने से मानवीय संकट गहराता जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सूडान के न्याला शहर में घटी इस भयानक त्रासदी की पूरी पृष्ठभूमि क्या है और वहां वर्तमान में हालात कितने भयावह बने हुए हैं।

दक्षिण दारफुर के न्याला शहर में टैंकोग बाजार बना नरक, ड्रोन हमले में 112 की मौत

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय मानवाधिकार संगठनों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खूनी हवाई हमला सोमवार की शाम को दक्षिण दारफुर के मुख्य शहर न्याला (Nyala) में स्थित लोकप्रिय ‘टैंकोग बाजार’ (Tankong Market) पर हुआ। न्याला शहर वर्तमान में अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) के नियंत्रण में आता है।

शाम के समय जब आम नागरिक अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे, बाजार में खरीदारी कर रहे थे और स्थानीय लोग नाश्ता कर रहे थे, तभी अचानक आसमान से ड्रोन ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) और ‘रेडियो तमाजुज’ की रिपोर्ट के अनुसार, सूडान में मानवाधिकारों और हिंसा पर पैनी नजर रखने वाले प्रतिष्ठित समूह ‘इमरजेंसी लॉयर्स’ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि इस क्रूर ड्रोन हमले में 112 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 113 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

अर्धसैनिक बल आरएसएफ ने सूडानी सेना को ठहराया जिम्मेदार, स्वतंत्र जांच की मांग

इस भीषण जनसंहार के बाद सूडान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में भूचाल आ गया है। न्याला शहर पर काबिज अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) ने इस खौफनाक ड्रोन हमले के लिए सीधे तौर पर सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) यानी सरकारी सेना को जिम्मेदार ठहराया है। आरएसएफ ने आरोप लगाया है कि सेना ने जानबूझकर रिहायशी और कमर्शियल इलाके को अपना निशाना बनाया है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और आरएसएफ ने इस पूरे मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र जांच (Independent Investigation) कराए जाने की जोरदार मांग की है। हालांकि, सूडानी सेना की तरफ से इस हमले पर अभी तक कोई विस्तृत सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने दोनों पक्षों के बीच चल रही खूनी जंग को और अधिक भड़का दिया है।

अस्पतालों में पसरा मातम: ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ और स्थानीय संगठनों के डरावने आंकड़े

धमाकों के बाद मची अफरा-तفري और घायलों की चीख-पुकार ने स्थानीय अस्पतालों की स्थिति को बदतर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठन ‘डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (MSF) ने जानकारी दी है कि उनके द्वारा संचालित न्याला के स्थानीय अस्पताल में ही कम से कम 36 शवों को लाया गया था, जबकि उनके इमरजेंसी रूम में 150 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज किया गया।

इसी तरह, ‘दारफुर विक्टिम्स ऑर्गनाइजेशन’ के कार्यकारी निदेशक एडम मूसा ओबामा ने मीडिया को बताया कि उनके संगठन ने अब तक दर्जनों नागरिकों की मौत का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें कम से कम 12 महिलाएं और 6 मासूम बच्चे शामिल हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, धमाका इतना जोरदार था कि बाजार में चारों तरफ सिर्फ लाशें और खून बिखरा हुआ था। राहत और बचाव कार्य में जुटे कार्यकर्ताओं के लिए इतने बड़े पैमाने पर घायलों को संभालना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

सूडानी गृह युद्ध में खतरनाक हथियार बने ड्रोन, आम नागरिकों का जीना हुआ मुहाल

सूडान में पिछले कुछ वर्षों से सेना (SAF) और अर्धसैनिक बल (RSF) के बीच सत्ता हासिल करने के लिए जो गृह युद्ध छिड़ा हुआ है, उसने अब एक बेहद क्रूर और खौफनाक रूप ले लिया है। इस युद्ध में दोनों ही पक्ष अब अत्याधुनिक विस्फोटक वाले ड्रोन्स का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा देश के बेकसूर आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य संघर्ष में ड्रोन हमलों के बढ़ते चलन ने आम जनता के जीवन को पूरी तरह से असुरक्षित कर दिया है। इससे पहले भी सूडानी सेना द्वारा पिछले हफ्ते विवादित अब्येई क्षेत्र के एक व्यस्त बाजार पर ड्रोन अटैक किए जाने की खबरें सामने आई थीं, जिसमें 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। बार-बार इस तरह के हवाई हमले होने से सूडान के विभिन्न इलाकों से लाखों लोग पलायन करने को मजबूर हो चुके हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते इस अफ्रीकी देश में शांति स्थापित करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में मानवीय संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है।