
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी गहरे सैन्य तनाव और छिटपुट टकरावों के बीच तेहरान से एक बड़ा राजनीतिक व कूटनीतिक संदेश सामने आया है। शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर ने साफ किया कि दोनों पक्षों के बीच बनी वर्तमान अनिर्णय की स्थिति—जिसे उन्होंने “न युद्ध, न शांति” (Neither War Nor Peace) का दौर करार दिया—अब लंबे समय तक नहीं चल सकती और इसे जल्द समाप्त करने की आवश्यकता है। सुप्रीम लीडर ने रेखांकित किया कि रणनीतिक अनिश्चितता न केवल ईरान के राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा पर भी गहरा असर डाल रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि युद्ध या गतिरोध को समाप्त करना है, तो यह केवल ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा अधिकारों और उसकी पूर्व-शर्तों को पूरी तरह स्वीकार करने के बाद ही संभव होगा।
ईरानी नेतृत्व ने इस बात पर विशेष बल दिया कि तेहरान किसी भी एकतरफा दबाव या सैन्य धमकियों के आगे झुककर समझौता नहीं करेगा। युद्ध और वर्तमान तनाव को समाप्त करने के लिए ईरान की ओर से प्रमुख शर्तें रखी गई हैं:
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आर्थिक प्रतिबंधों का पूर्ण खात्मा: अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक, तेल और वित्तीय प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए और देश की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को अविलंब जारी किया जाए।
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क्षेत्रीय प्रतिरोध मोर्चे (Resistance Front) के अधिकारों का संरक्षण: केवल ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान और पूरे क्षेत्र में जुड़े सहयोगियों के हितों और उनकी सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
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समुद्री और सैन्य घेराबंदी का अंत: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और फारस की खाड़ी में बाहरी सैन्य हस्तक्षेप और जहाजों की नाकेबंदी को पूरी तरह समाप्त किया जाए। ईरान ने दो टूक कहा कि शांति का कोई भी मसौदा तभी व्यवहारिक हो सकता है, जब उसमें तेहरान को बराबरी का दर्जा मिले और उसके सामरिक हितों की अनदेखी न हो।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापारिक मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में तनाव चरम पर बना हुआ है। हाल के दिनों में तेल टैंकरों पर हमले, बारूदी सुरंगों और नौसैनिक टकरावों की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को हिलाकर रख दिया है। दुनिया की लगभग 20% कच्चे तेल की आपूर्ति इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरती है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि समुद्र में बना यह तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता ला रहा है, जिसे हल करने के लिए अमेरिका को अपनी आक्रामक नीति से पीछे हटना होगा।
हाल के महीनों में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों और तीसरे देशों (जैसे पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए) के जरिए युद्धविराम और स्थायी समाधान के लिए संपर्क बनाए रखने के प्रयास हुए हैं। हालांकि, ठोस समझौते के अभाव में जमीन पर स्थिति नाजुक बनी हुई है। जहां अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में शांति और ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण की मांग दोहरा रहा है, वहीं ईरान का कहना है कि किसी भी प्रकार की बातचीत केवल उसकी शर्तों की पूर्ति पर ही टिक सकती है। खामेनेई का यह संदेश संकेत देता है कि ईरान अब इस लंबी खिंचती अनिश्चितता को निर्णायक मोड़ पर ले जाने का दबाव बना रहा है।
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