4 की चमारी अटापट्टू से लेकर 15 साल की देविका की एंट्री

महिला प्रीमियर लीग (WPL) के आगामी सीजन की नीलामी को लेकर क्रिकेट गलियारों में उत्साह चरम पर है। दुनिया भर की दिग्गजों और उभरती हुई प्रतिभाओं पर फ्रेंचाइजियां पानी की तरह पैसा बहाने को तैयार हैं। इस बार की नीलामी सूची में उम्र का एक ऐसा अद्भुत तालमेल देखने को मिल रहा है, जिसने प्रशंसकों और विश्लेषकों का ध्यान पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां श्रीलंका की दिग्गज ऑलराउंडर चमारी अटापट्टू सबसे उम्रदराज खिलाड़ी के रूप में अपनी धाक जमाने के लिए तैयार हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत की युवा सनसनी देविका नीलामी की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनकर उभरी हैं।

अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में श्रीलंका का परचम लहराने वाली 34 वर्षीय चमारी अटापट्टू नीलामी पूल में सबसे अनुभवी चेहरा हैं। उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में दुनिया के हर मैदान पर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और चतुर गेंदबाजी का लोहा मनवाया है। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच के साथ-साथ फ्रेंचाइजी लीग्स में अटापट्टू का प्रदर्शन लाजवाब रहा है।

अटापट्टू का बल्ला जब भी चलता है, विपक्षी टीमों के गेंदबाजी आक्रमण तहस-नहस हो जाते हैं। उनकी आक्रामक शैली और कप्तानी का अनुभव किसी भी WPL फ्रेंचाइजी के लिए एक बड़ा एसेट साबित हो सकता है। यही कारण है कि इस नीलामी में कई प्रमुख टीमें उन्हें अपने बेड़े में शामिल करने के लिए बोली युद्ध (Bidding War) में उतरने को बेताब दिख रही हैं।

नीलामी सूची का सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि नीलामी में शामिल सबसे छोटी खिलाड़ी का जन्म चमारी अटापट्टू के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के भी काफी बाद हुआ था। चमारी अटापट्टू ने साल 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला कदम रखा था। दूसरी ओर, महज 15 वर्ष की उम्र में नीलामी सूची में जगह बनाने वाली भारतीय युवा क्रिकेटर का जन्म उनके डेब्यू के वर्षों बाद हुआ।

यह आंकड़ा यह दर्शाने के लिए काफी है कि महिला क्रिकेट में पीढ़ियों का बदलाव कितनी तेजी से हो रहा है। जहां एक ओर सालों का अनुभव संजोए बैठी अटापट्टू जैसी दिग्गज खिलाड़ी हैं, वहीं दूसरी ओर उनके पदचिन्हों पर चलने और आधुनिक क्रिकेट की नई परिभाषा लिखने के लिए तैयार यह 15 वर्षीय युवा प्रतिभा है।

भारत में महिला प्रीमियर लीग के आगमन के बाद से घरेलू और क्षेत्रीय स्तर पर महिला क्रिकेट की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। चाहे उत्तर प्रदेश के मेरठ और लखनऊ जैसे उभरते खेल शहर हों या फिर देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाके, हर जगह से छोटी उम्र की बेटियां अब पेशेवर क्रिकेट में अपना भविष्य तलाश रही हैं।

WPL ने जमीनी स्तर (Grassroots Level) पर काम करने वाली अकादमियों को एक नया हौसला दिया है। यही कारण है कि 15 से 17 साल की उम्र में ही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की नीलामी का हिस्सा बनने में सक्षम हो रही हैं। स्काउट्स अब केवल स्थापित खिलाड़ियों पर ही नहीं, बल्कि अंडर-15 और अंडर-19 के घरेलू टूर्नामेंट्स में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली नई प्रतिभाओं पर भी पैनी नजर रख रहे हैं।

इस नीलामी में फ्रेंचाइजियों के सामने एक बड़ी रणनीतिक चुनौती यह है कि वे अनुभवी दिग्गजों और युवा प्रतिभाओं के बीच संतुलन कैसे कायम करें। टी-20 फॉर्मेट में जहां चमारी अटापट्टू जैसा परिपक्व अनुभव दबाव की परिस्थितियों को आसानी से संभाल सकता है, वहीं देविका जैसी युवा खिलाड़ी टीम में नई ऊर्जा, आधुनिक शॉट्स और बेहतरीन फील्डिंग का तड़का लगा सकती हैं।

नीलामी टेबल पर हर टीम की नजर एक ऐसा संतुलित स्क्वाड तैयार करने पर होगी जो न सिर्फ आगामी सीजन में जीत दिला सके, बल्कि भविष्य के लिए भी एक मजबूत नींव रख सके। यही वजह है कि 34 साल की अनुभवी अटापट्टू और 15 साल की उदीयमान खिलाड़ी का एक ही नीलामी पूल में होना WPL के रोमांच को कई गुना बढ़ा देता है।