
दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत और वियतनाम की रणनीतिक साझेदारी एक नए और बेहद मजबूत दौर में पहुंच गई है। वियतनाम की राजधानी हनोई के दौरे पर पहुंचे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने वियतनामी नेतृत्व के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान वियतनाम ने भारत से रियल-टाइम इंटेलिजेंस (खुफिया जानकारी) साझा करने और एक वर्गीकृत सूचना समझौते (Classified Information Pact) पर हस्ताक्षर करने का ठोस प्रस्ताव रखा है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद ड्रैगन यानी चीन की बेचैनी बढ़ना तय माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिण चीन सागर में चीनी नौसेना की बढ़ती आक्रामकता को नियंत्रित करने के लिए भारत और वियतनाम का यह रक्षा समझौता बेहद अहम साबित होने वाला है।
अजीत डोभाल और वियतनाम के सुरक्षा तंत्र के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई इस वार्ता में क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल, समुद्री खतरों और गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। वियतनाम ने भारत से आग्रह किया है कि दोनों देश समुद्री क्षेत्र में रियल-टाइम सैटेलाइट डेटा और नेविगेशन इंटेलिजेंस एक-दूसरे के साथ तुरंत शेयर करें। इससे दक्षिण चीन सागर से गुजरने वाले कमर्शियल और मिलिट्री जहाजों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा सकेगी। वियतनामी पक्ष ने भारत की अत्याधुनिक अंतरिक्ष क्षमता, डिजिटल इंटेलिजेंस और नौसैनिक तकनीक पर पूरा भरोसा जताया है और कहा है कि दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच रियल-टाइम खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान से पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति और स्थिरता बनी रहेगी।
वियतनाम और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर में द्वीपों और समुद्री सीमाओं को लेकर दशकों पुराना विवाद चल रहा है। चीन अक्सर इस पूरे इलाके पर अपना एकाधिकार जताता आया है और वियतनामी तेल उत्खनन जहाजों व मछुआरों को धमकाता रहा है। ऐसे में वियतनाम भारत को अपने सबसे विश्वसनीय रक्षा सहयोगी के रूप में देखता है। भारत पहले ही वियतनाम को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और गश्ती नौकाएं देने के समझौतों पर आगे बढ़ चुका है। अब अगर दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का औपचारिक समझौता होता है, तो भारतीय नौसेना और वियतनामी तटरक्षक बल मिलकर इस रणनीतिक जलमार्ग पर चीन के किसी भी दुस्साहस का तुरंत माकूल जवाब दे सकेंगे।
भारत की विदेश नीति में वियतनाम ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘सागर’ (SAGAR) विजन का एक बेहद अहम और मजबूत स्तंभ है। एनएसए अजीत डोभाल की हनोई यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि भारत केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रहने के बजाय पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक जिम्मेदार और सक्षम सुरक्षा प्रदाता (Security Provider) की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत वियतनाम को रियल-टाइम इंटेलिजेंस उपलब्ध कराता है, तो इससे हिंद महासागर से लेकर दक्षिण चीन सागर तक फैले समुद्री मार्गों पर भारत की रणनीतिक पकड़ और भी अधिक मजबूत हो जाएगी। इससे न केवल चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीति पर रोक लगेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वतंत्र और खुले नौवहन (Free and Open Indo-Pacific) का रास्ता भी साफ होगा।
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