
बीजिंग: वैश्विक भू-राजनीति में चीन की छिपी चालों का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान की मदद करने के बाद अब चीन ने अमेरिका-ईरान टकराव में भी परदे के पीछे से अहम भूमिका निभाई है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की गुप्त सहायता के चलते ईरान अमेरिकी ठिकानों पर ज्यादा सटीक और प्रभावी हमले करने में सफल रहा। इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब ईरान में दोहराई रणनीति
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को मिली चीनी मदद पहले ही चर्चा में थी। अब सामने आया है कि चीन ने इसी रणनीति को ईरान के साथ भी अपनाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने ईरान को संवेदनशील सैटेलाइट डेटा और लोकेशन कोऑर्डिनेट्स उपलब्ध कराए, जिससे अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाना आसान हो गया।
गुपचुप सौदे में खरीदी गई जासूसी सैटेलाइट
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने 2024 में एक चीनी जासूसी सैटेलाइट गुप्त रूप से खरीदी थी। इस सौदे की जानकारी बेहद सीमित स्तर पर ही रखी गई थी। बताया गया कि इस सैटेलाइट को चीन की कंपनी Earth Eye Co ने लॉन्च किया था और इसे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस यूनिट ने इस्तेमाल किया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस सैटेलाइट के जरिए टाइम-स्टैम्प्ड कोऑर्डिनेट्स, हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें और ऑर्बिटल डेटा उपलब्ध कराया गया, जिससे ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिली।
खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर सटीक निगरानी
सूत्रों के मुताबिक, मार्च के मध्य में इस सैटेलाइट ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस, बहरीन के मनामा स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, इराक के इरबिल एयरपोर्ट और जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर स्टेशन की निगरानी की। इसके बाद ईरान ने इन ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए।
कमर्शियल नेटवर्क के जरिए बढ़ी पहुंच
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस डील के तहत ईरान को चीन की Emposat कंपनी के ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क तक एक्सेस मिला। यह नेटवर्क एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक फैला हुआ है, जिससे ईरान को रियल टाइम डेटा मिलना संभव हुआ।
पहले भी मिलती रही है चीन से खुफिया मदद
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। मार्च 2026 में हुए एक हमले से पहले भी चीन से जुड़ी कंपनियों ने ईरान को सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराई थी। इस हमले में अमेरिकी सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा था, जिसमें एक E-3G विमान के नष्ट होने और कई टैंकर विमानों के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी।
इसके अलावा, MizarVision नाम की एक चीनी कंपनी ने भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों की तस्वीरें जारी की थीं, जिससे ईरान को सैन्य क्षमता का अंदाजा लगाने में मदद मिली।
चीन के इनकार के बीच बढ़ते सबूत
हालांकि, चीन लगातार ईरान को सैन्य मदद देने से इनकार करता रहा है, लेकिन सामने आ रहे दस्तावेज और रिपोर्ट्स उसके दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि चीन अब सीधे हथियार देने के बजाय टेक्नोलॉजी और इंटेलिजेंस सपोर्ट के जरिए अपने सहयोगियों को मजबूत कर रहा है।
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