
जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और खुफिया दुनिया में भूचाल ला दिया है। लाखों दस्तावेजों के ताजा खुलासे में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम 1000 से ज्यादा बार सामने आया है। इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या एपस्टीन का रूस से कोई गहरा और रहस्यमय संबंध था? क्या वह केवल अमीर और ताकतवर लोगों से संपर्क रखने वाला कारोबारी था या फिर किसी बड़े जासूसी नेटवर्क की कड़ी?
पुतिन से मुलाकात की ‘बेताबी’, 1000 से ज्यादा बार जिक्र
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी भारी-भरकम दस्तावेजों में पुतिन का नाम 1,005 बार दर्ज बताया गया है। इन पत्राचार और ईमेल्स से संकेत मिलता है कि एपस्टीन रूसी राष्ट्रपति तक पहुंच बनाने की लगातार कोशिश कर रहा था। हालांकि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जो दोनों की प्रत्यक्ष मुलाकात की पुष्टि करे। रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन ने पुतिन तक पहुंचने के लिए नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री थोरबजर्न जगलैंड और इजरायल के पूर्व पीएम एहुद बराक जैसे प्रभावशाली चेहरों के जरिए रास्ता बनाने की कोशिश की।
रूसी अफसरों से संपर्क और ‘लेन-देन’ की कहानी
दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि 2014 के आसपास एपस्टीन ने रूस के तत्कालीन उप आर्थिक विकास मंत्री सर्गेई एल. बेल्याकोव से नजदीकियां बढ़ाईं। बेल्याकोव का संबंध रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी की अकादमिक पृष्ठभूमि से रहा है। बताया जाता है कि एपस्टीन ने एक रूसी महिला अरबपति द्वारा फाइनेंसर लियोन ब्लैक को कथित ब्लैकमेल मामले में मदद मांगी थी। इसके बदले में उसने बेल्याकोव को सिलिकॉन वैली के बड़े नामों से संपर्क कराने का आश्वासन दिया। इस संभावित ‘गिव एंड टेक’ मॉडल ने जासूसी के शक को और गहरा कर दिया है।
रूस को ‘सोर्स’ मानने का विवादित दावा
फाइलों में दर्ज कुछ निजी चैट्स ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक बातचीत में एपस्टीन ने रूस को लड़कियों के ‘सोर्स’ के तौर पर पेश किया और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इस कथित चैट के सामने आने के बाद संबंधित यूरोपीय नेता को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस खुलासे ने एपस्टीन के नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और उसके तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पोलैंड की जांच और खुफिया एंगल
इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि यह जांचना जरूरी है कि कहीं एपस्टीन का नेटवर्क रूसी खुफिया एजेंसियों के सहयोग से तो संचालित नहीं हो रहा था। हालांकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है।
रूसी कनेक्शन वाली महिलाएं भी चर्चा में
फाइलों में कई ऐसी महिलाओं के नाम सामने आए हैं जिनकी पढ़ाई या रहन-सहन का खर्च एपस्टीन द्वारा उठाए जाने की बात कही गई है। इनमें बेलारूस की करीना शुलियाक, रूसी स्नोबोर्डिंग चैंपियन मारिया प्रुसाकोवा और पुतिन समर्थक युवा संगठन से जुड़ी मारिया द्रोकोवा का नाम शामिल है। आरोप है कि इनमें से कुछ ने एपस्टीन के लिए नेटवर्क विस्तार और छवि सुधार में भूमिका निभाई।
ट्रंप फैक्टर और रूस को ‘इनसाइट’ ऑफर
2016 में डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद एपस्टीन ने कथित तौर पर रूसी अधिकारियों को ट्रंप की कार्यशैली समझाने का प्रस्ताव दिया। सुझाव दिया गया कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव उससे संवाद कर सकते हैं। इस दावे ने अमेरिकी राजनीति और रूस के बीच संभावित बैकचैनल की अटकलों को और हवा दे दी है।
रूस का पलटवार और नैतिकता की बहस
रूस की ओर से इन फाइलों को पश्चिमी देशों की ‘नैतिक गिरावट’ करार दिया गया है। वहीं रूसी विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर नैतिकता की दुहाई देना दोहरा मापदंड है। फिलहाल इन दस्तावेजों ने कई देशों की खुफिया एजेंसियों और सरकारों को सतर्क कर दिया है।
अब सवाल बरकरार है—क्या एपस्टीन केवल एक कुख्यात नेटवर्क संचालक था या फिर वह वैश्विक ताकतों के बीच किसी बड़े खुफिया खेल की मोहरा? जांच एजेंसियों की अगली रिपोर्ट पर दुनिया की नजर टिकी है।
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