
कई बार जिंदगी में ऐसा समय आता है जब किसी व्यक्ति पर दुख का इतना बड़ा पहाड़ टूट पड़ता है कि उसे संभाल पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में व्यक्ति मानसिक रूप से टूटने लगता है और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठता है।
ग्रीफ डिसऑर्डर क्या है और क्यों होता है?
जब कोई व्यक्ति किसी प्रियजन की मृत्यु, बड़े नुकसान या भावनात्मक आघात के बाद लंबे समय तक उस दुख से उबर नहीं पाता, तो यह स्थिति ग्रीफ डिसऑर्डर (Grief Disorder) में बदल सकती है। इसमें व्यक्ति लगातार उदासी, खालीपन और जीवन में रुचि खत्म होने जैसे लक्षण महसूस करता है।
मानसिक और भावनात्मक असर
ग्रीफ डिसऑर्डर केवल मन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ता है। नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, अकेलापन और सामाजिक दूरी जैसे लक्षण धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं, जिससे व्यक्ति सामान्य जीवन जीने में कठिनाई महसूस करता है।
इलाज के साथ परिवार का सहयोग बेहद जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति में सिर्फ मेडिकल ट्रीटमेंट ही नहीं बल्कि परिवार का साथ और भावनात्मक सपोर्ट भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जब परिवार मरीज को समझता है, उसका साथ देता है और उसे अकेला महसूस नहीं होने देता, तो रिकवरी की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
प्यार और समझ से मिलती है नई उम्मीद
परिवार का प्यार, धैर्य और लगातार सहयोग मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। सही समय पर काउंसलिंग और सपोर्ट के साथ मरीज धीरे-धीरे अपने जीवन की सामान्य स्थिति में लौट सकता है।
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