इमरान खान को छुड़ाने के लिए ‘स्पेशल फोर्स’ तैयार! पाकिस्तान में छिड़ा गृहयुद्ध जैसा माहौल, ‘डील’ की खबरों पर भड़के रक्षा मंत्री

इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग शुरू हो गई है। एक तरफ खैबर पख्तूनख्वा (KP) के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इमरान खान को जेल से बाहर निकालने के लिए एक ‘समर्पित बल’ (Force) बनाने का ऐलान कर दिया है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे खुली बगावत करार देते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने की चेतावनी दे दी है।

क्या है ‘रिलीव इमरान खान फोर्स’?

इमरान खान की पार्टी PTI और विपक्षी गठबंधन (TTAP) के सांसदों द्वारा संसद के बाहर धरना खत्म करने के बाद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने इस नई फोर्स का ऐलान किया। अफरीदी का दावा है कि इमरान खान ने उन्हें सड़क आंदोलन का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह बल शांतिपूर्ण तरीके से संविधान की रक्षा, लोकतंत्र और मीडिया की आजादी के लिए लड़ेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस फोर्स का औपचारिक पंजीकरण होगा और ईद-उल-फितर के बाद पेशावर में इसके सदस्य शपथ लेंगे।

रक्षा मंत्री की चेतावनी: ‘अफरीदी की कुर्सी खतरे में’

इस घोषणा पर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि संघीय सरकार के अलावा किसी को भी कोई बल या फोर्स बनाने का कानूनी अधिकार नहीं है। आसिफ ने चेतावनी देते हुए कहा, “केपी के मुख्यमंत्री अपनी नौकरी बचाने के लिए असंवैधानिक काम कर रहे हैं। उनकी कुर्सी अब खतरे में है।” उन्होंने इमरान खान को किसी भी तरह की डील या बानी गाला शिफ्ट करने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।

‘डील’ का सस्पेंस: दो बार ऑफर हुआ समझौता?

पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में ‘डील’ की खबरें भी जोरों पर हैं। पीएम शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने एक टॉक शो में चौंकाने वाला खुलासा किया कि इमरान खान को दो बार समझौते का प्रस्ताव दिया गया था।

  • पहला प्रयास: 26 नवंबर 2024 को गृह मंत्री मोहसिन नकवी और अली अमीन गंडापुर के जरिए हुआ।

  • दूसरा प्रयास: हाल ही में कुछ ‘विदेशी ताकतों’ के हस्तक्षेप से हुआ। सनाउल्लाह के मुताबिक, इमरान खान पहले सहमत हुए लेकिन बाद में पीछे हट गए। सरकार का कहना है कि वे राजनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन इमरान केवल सत्ता हथियाने की जिद पर अड़े हैं।

सरकार की दो टूक- ‘इमरान के लिए कोई नरमी नहीं’

सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने मीडिया में चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि सरकार और इमरान खान के बीच किसी भी तरह की “डील” नहीं हुई है। उन्होंने ‘एक्स’ (Twitter) पर लिखा कि पूर्व प्रधानमंत्री को रियायतें देने वाली सभी खबरें झूठी और गुमराह करने वाली हैं। अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान की सेहत को लेकर उनके प्रशंसक और दुनिया भर के दिग्गज क्रिकेटर भी चिंता जता रहे हैं, जिससे सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ता दिख रहा है।