
समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शुमार और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान के परिवार की कानूनी और प्रशासनिक परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। रामपुर से लेकर राजधानी लखनऊ तक आजम खान और उनके करीबियों से जुड़ी संपत्तियों की गहन जांच जारी है। इसी कड़ी में अब एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आजम खान की बहन निकहत अफलाक को लखनऊ के सबसे वीआईपी इलाकों में गिने जाने वाले रिवर बैंक कॉलोनी में आवंटित किए गए आलीशान सरकारी बंगले पर नगर निगम ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लखनऊ नगर निगम (LMC) ने आवंटन की वैधता, नियमों की अनदेखी और पात्रता की शर्तों की बारीकी से जांच के बाद इस बंगले के आवंटन को निरस्त करने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगर निगम के इस कदम को आजम खान के कुनबे पर बड़ा प्रशासनिक प्रहार माना जा रहा है।
रिवर बैंक कॉलोनी स्थित इस बहुमूल्य सरकारी आवास के आवंटन को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं के आरोप लग रहे थे। नगर निगम के संपत्ति विभाग द्वारा की गई आंतरिक जांच में पाया गया कि जिस समय यह आलीशान बंगला आजम खान की बहन निकहत अफलाक के नाम आवंटित किया गया था, उस दौरान निर्धारित प्रशासनिक नियमों, गाइडलाइंस और पात्रता के तय मानकों की अनदेखी की गई थी। सरकारी नियमावली के मुताबिक, रिवर बैंक कॉलोनी के ये बंगले और फ्लैट्स विशेष श्रेणी के अधिकारियों, कर्मचारियों या विधिक प्रक्रिया के तहत अधिकृत व्यक्तियों के लिए सुरक्षित होते हैं। जांच अधिकारियों का निष्कर्ष है कि तत्कालीन राजनीतिक रसूख और पद के प्रभाव के चलते गैर-पात्र होते हुए भी इस संपत्ति का आवंटन निजी लाभ के उद्देश्य से कराया गया था।
लखनऊ नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए संपत्ति को सरकारी कब्जे में लेने की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। नगर निगम की ओर से इस बंगले के आवंटन को रद्द करने की संस्तुति उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। आवंटन निरस्त करने के साथ ही संबंधित पक्ष को औपचारिक बेदखली नोटिस (Eviction Notice) जारी करने की तैयारी है, जिसमें निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवास खाली करने का निर्देश दिया जाएगा। यदि तय अवधि के भीतर बंगला खाली नहीं किया जाता है, तो नगर निगम का प्रवर्तन दस्ता स्थानीय पुलिस बल की मौजूदगी में बंगले को सील करने और कब्जा वापस लेने की कार्रवाई अमल में लाएगा। इसके साथ ही पिछले वर्षों के बकाया किराया या यूजर चार्ज की वसूली को लेकर भी संपत्ति विभाग आंकलन कर रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब आजम खान या उनके परिजनों से जुड़ी संपत्तियों पर प्रशासन की गाज गिरी हो। इससे पहले रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की सैकड़ों बीघा सरकारी, ग्राम समाज और चकरोड की जमीनों को वापस लेने का आदेश जारी हो चुका है। इसके अलावा जौहर शोध संस्थान, रामपुर पब्लिक स्कूल के भवन और कई अन्य लीज पर दी गई संपत्तियों को नियमों के उल्लंघन के आधार पर सरकार पहले ही अपने कब्जे में ले चुकी है। आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खान विभिन्न मामलों में पहले से ही गंभीर मुकदमों और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अब लखनऊ के पॉश इलाके में बहन के बंगले का आवंटन रद्द होना दर्शाता है कि सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई किसी भी स्तर पर रुकने वाली नहीं है।
नगर निगम प्रशासन के इस सख्त एक्शन के बाद राजधानी के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में स्थित सरकारी संपत्तियों के आवंटन को लेकर भी हलचल तेज हो गई है। लखनऊ नगर निगम और राज्य संपत्ति विभाग अब उन सभी संपत्तियों की सूची खंगालने में जुट गया है जो पिछली सरकारों के दौरान राजनीतिक पहुंच, सिफारिश या विशेष प्रावधानों का हवाला देकर चहेतों को आवंटित की गई थीं। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि लखनऊ में नगर निगम की प्राइम लोकेशंस पर स्थित बेशकीमती जमीनों, दुकानों और आवासीय परिसरों का जो भी अवैध कब्जा या अपात्र आवंटन पाया जाएगा, उसे निरस्त कर जनहित और राजस्व वृद्धि के लिए उपयोग में लाया जाएगा।
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