वृंदावन में टूटी सदियों पुरानी परंपरा! बांके बिहारी मंदिर में नहीं सजा फूल बंगला, बढ़ी फीस और नए नियमों से भक्त मायूस

वृंदावन (मथुरा): धार्मिक नगरी वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में इस बार गर्मियों की शुरुआत के साथ ही एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। वर्षों से चली आ रही फूल बंगला सजाने की परंपरा बार-बार टूट रही है, जिससे श्रद्धालुओं में निराशा गहराती जा रही है।

लगातार नहीं सज पा रहा फूल बंगला

बुधवार सुबह एक बार फिर मंदिर में फूल बंगला नहीं सज सका। परंपरा के निर्वाह के लिए सेवायतों ने भगवान को जगमोहन में फूलों से सजी बैठक में विराजमान कराया। यह स्थिति अब असामान्य नहीं रही, क्योंकि 29 मार्च से अब तक कई बार यह परंपरा बाधित हो चुकी है।

गर्मियों में विशेष महत्व रखती है यह परंपरा

गौरतलब है कि हर वर्ष गर्मी के मौसम में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए सुबह और शाम सुगंधित फूलों से भव्य ‘फूल बंगला’ सजाया जाता है। यह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र होता है, बल्कि दर्शन के लिए आने वाले लाखों भक्तों के आकर्षण का प्रमुख कारण भी रहता है।

नए नियम बने बड़ी वजह

मंदिर से जुड़े सेवायतों का कहना है कि इस बार परंपरा में व्यवधान के पीछे हाईपावर्ड प्रबंधन समिति के नए नियम जिम्मेदार हैं।
बताया जा रहा है कि फूल बंगला सेवा का शुल्क करीब दस गुना बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को बंगला पूजन की अनुमति भी नहीं दी जा रही, जिससे वे इस सेवा से दूरी बना रहे हैं।

पहले होती थी बुकिंग के लिए होड़

एक समय ऐसा था जब फूल बंगला सजाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रहती थी। भक्त एक साल पहले तक बुकिंग करा लेते थे और लाखों रुपये खर्च कर इस सेवा में भाग लेते थे। लेकिन अब मंदिर परिसर में वह रौनक नजर नहीं आ रही।

सेवायतों ने उठाए सवाल

मंदिर के सेवायतों का कहना है कि जब श्रद्धालु बड़ी राशि खर्च करता है तो वह पूजन का अधिकार भी चाहता है। इस अधिकार के न मिलने से लोगों में असंतोष है। साथ ही बढ़ी हुई फीस को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि इसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।

कमेटी बैठक में उठेगा मुद्दा

मामले को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य ने संकेत दिए हैं कि इस मुद्दे को आगामी बैठक में रखा जाएगा, ताकि परंपरा को फिर से नियमित किया जा सके और श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहे।