ब्रिटिश PM कीर स्टारमर की कुर्सी पर मंडराया संकट: जानें कैसे ‘बगावत’ के बीच बची स्टारमर की सत्ता

लंदन। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) के लिए पिछला कुछ समय किसी राजनीतिक भूचाल से कम नहीं रहा। जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) यौन शोषण कांड की आंच जब डाउनिंग स्ट्रीट तक पहुंची, तो एक समय लगा कि स्टारमर को इस्तीफा देना ही होगा। अपनी ही पार्टी के भीतर उठी बगावत की आवाजों के बीच स्टारमर ने न केवल अपनी कुर्सी बचाई, बल्कि विरोधियों को कड़ा संदेश भी दिया है।

विवाद की जड़: पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति और एपस्टीन कनेक्शन

इस पूरे विवाद के केंद्र में पीटर मैंडेलसन (Peter Mandelson) की अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत के रूप में नियुक्ति है। हाल ही में उजागर हुई एपस्टीन फाइलों से पता चला कि दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ मैंडेलसन के पुराने और नजदीकी संबंध थे। विपक्ष और खुद लेबर पार्टी के कुछ नेताओं का आरोप है कि स्टारमर ने इन संबंधों की जानकारी होने के बावजूद मैंडेलसन को इतने महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया, जो उनके ‘पॉलिटिकल जजमेंट’ पर सवाल खड़े करता है।

अपनों ने ही खोला मोर्चा: अनस सरवर की इस्तीफे की मांग

सोमवार को स्टारमर की स्थिति तब सबसे ज्यादा नाजुक हो गई जब स्कॉटिश लेबर पार्टी के कद्दावर नेता अनस सरवर (Anas Sarwar) ने सार्वजनिक रूप से उनके इस्तीफे की मांग कर दी। सरवर ने कहा कि “डाउनिंग स्ट्रीट में नेतृत्व बदलने की जरूरत है।” यह किसी वरिष्ठ लेबर नेता द्वारा स्टारमर के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला था। इसके साथ ही स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी और संचार निदेशक टिम एलन के इस्तीफे ने आग में घी डालने का काम किया।

कैसे बची स्टारमर की कुर्सी?

इस्तीफे के भारी दबाव के बावजूद कीर स्टारमर ने पीछे हटने से इनकार कर दिया। उनकी सत्ता बचाने में तीन मुख्य कारकों ने भूमिका निभाई:

  • मंत्रिमंडल की एकजुटता: स्टारमर के संकट में घिरते ही उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेनर, गृह सचिव शबाना महमूद और रशेल रीव्स जैसे वरिष्ठ मंत्रियों ने उनके समर्थन में मोर्चा खोल दिया। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के पास 5 साल का जनादेश है और वे एकजुट हैं।

  • विरोधियों की हिचकिचाहट: लेबर पार्टी के सांसदों के बीच इस बात को लेकर डर था कि अगर 19 महीने में ही नेतृत्व बदला गया, तो देश में राजनीतिक अस्थिरता फैल जाएगी, जैसा कंजर्वेटिव पार्टी के शासन (लिज़ ट्रस और बोरिस जॉनसन) के दौरान हुआ था।

  • जवाबी हमला (Pugnacious Fightback): स्टारमर ने हार मानने के बजाय मंत्रियों की बैठक बुलाई और साफ कहा कि वह देश को बदलने के अपने जनादेश से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने मैंडेलसन मुद्दे पर माफी भी मांगी, जिससे गुस्सा थोड़ा शांत हुआ।

आगे की राह: 26 फरवरी का उपचुनाव होगा ‘लिटमस टेस्ट’

भले ही स्टारमर ने तत्काल आए संकट को टाल दिया हो, लेकिन उनकी राह अभी भी कांटों भरी है। 26 फरवरी 2026 को होने वाला उपचुनाव और मई में होने वाले स्थानीय चुनाव यह तय करेंगे कि उनकी पार्टी और जनता का उन पर कितना भरोसा बचा है।