Donald Trump UNGA Speech: अब AI नहीं ‘सुपर इंटेलिजेंस’ कहिए; यूएन में बोले डोनाल्ड ट्रंप- ‘जो ये रेस जीतेगा, वही करेगा दुनिया पर राज’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से तकनीक और वैश्विक राजनीति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप ने घोषणा की कि अब से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को केवल ‘आर्टिफिशियल’ नहीं, बल्कि आधिकारिक तौर पर ‘सुपर इंटेलिजेंस’ (Super Intelligence – SI) कहा जाएगा। ट्रंप के अनुसार, ‘आर्टिफिशियल’ शब्द इस क्रांतिकारी तकनीक को नकली (Fake) जैसा दिखाता है, जबकि यह तकनीक वास्तव में अद्भुत और मानव इतिहास को बदलने वाली है।

वैश्विक मंच से अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तकनीकी दौड़ को सीधे तौर पर वैश्विक वर्चस्व और महाशक्ति बनने की जंग करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “Whoever wins AI, WINS!” यानी जो देश इस तकनीकी रेस को जीतेगा, वही आने वाले समय में दुनिया पर राज करेगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका इस दौड़ में चीन और बाकी सभी देशों से काफी आगे चल रहा है और वह इस बढ़त को किसी भी कीमत पर बनाए रखेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान कहा कि अमेरिकी सरकार के सभी आधिकारिक दस्तावेजों में अब ‘आर्टिफिशियल’ शब्द की जगह अधिक सटीक शब्द ‘सुपर’ (Super) का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने सभा में मौजूद वैश्विक नेताओं से कहा, “वेलकम टू द न्यू वर्ल्ड ऑफ सुपर इंटेलिजेंस — एसआई (SI)”।

ट्रंप ने तर्क दिया कि आर्टिफिशियल कहने से ऐसा आभास होता है जैसे यह कोई बनावटी या दोयम दर्जे की चीज हो, जबकि यह औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) और इंटरनेट के आने से भी कई गुना बड़ी और प्रभावशाली क्रांति है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक जीडीपी में एक बहुत बड़ा योगदान देने वाली है, इसलिए इसे इसकी वास्तविक क्षमता के अनुसार ‘सुपर इंटेलिजेंस’ नाम दिया जाना जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप का यह रुख दुनिया भर के उन प्रयासों के बिल्कुल विपरीत नजर आया, जहां वैश्विक स्तर पर AI पर कड़े नियम और सीमाएं लगाने की मांग की जा रही है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका इस तकनीक पर किसी भी तरह का ‘ग्लोबलिस्ट कंट्रोल’ (वैश्विक नियंत्रण का ढांचा) स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार इस तकनीक के विकास को रोकने या बांधने (Rein in) के बजाय इसे पूरी तरह प्रोत्साहित (Encourage) करेगी। ट्रंप का मानना है कि कड़े नियम और पाबंदियां लगाने से अमेरिका की तकनीकी प्रगति धीमी पड़ सकती है, जिससे चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को आगे निकलने का मौका मिल जाएगा। इसलिए, नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ने दिया जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में चीन के साथ चल रही तकनीकी होड़ का खुलकर जिक्र किया। सेमीकंडक्टर चिप्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड एल्गोरिदम के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को उन्होंने 21वीं सदी का सबसे निर्णायक मुकाबला बताया।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने हमेशा तकनीक और नवाचार में दुनिया का नेतृत्व किया है और सुपर इंटेलिजेंस के मामले में भी वह किसी भी प्रतिद्वंद्वी को आगे नहीं निकलने देगा। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन जल्द ही उच्च क्षमता वाली तकनीकी प्रतिभाओं और लीडर्स को इस मिशन में तेजी लाने की जिम्मेदारी सौंपेगा, ताकि अमेरिकी कंपनियों का वैश्विक प्रभुत्व बना रहे।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के शीर्ष वैज्ञानिक, एआई रिसर्चर और नीति निर्माता इसके संभावित खतरों को लेकर चेतावनियां जारी कर रहे हैं। हाल ही में ‘गॉडफादर ऑफ एआई’ कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन (Geoffrey Hinton) सहित कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि बिना सुरक्षा मानकों और रेगुलेशन के अनियंत्रित सुपर इंटेलिजेंस मानवता के लिए जोखिम खड़ी कर सकती है।

अमेरिकी सीनेट में भी तकनीक को सीमित करने और सुरक्षा तंत्र लागू करने के लिए विधेयकों पर चर्चा चल रही है। हालांकि, ट्रंप ने इन सभी चिंताओं और आशंकाओं को दरकिनार करते हुए तकनीक की असीमित क्षमता और आर्थिक लाभ पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित रखने का संदेश दिया है।