
भारत के सबसे बड़े और बहुप्रतीक्षित त्योहारी सीजन—दिवाली, दशहरा और छठ पूजा—के आगमन से ठीक पहले देश के आम यात्रियों, प्रवासियों और मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। त्योहारों के इस पावन अवसर पर अपने पैतृक घरों और दूर-दराज के शहरों की यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को अक्सर विमानन कंपनियों (Airines) द्वारा वसूले जाने वाले आसमान छूते और मनमाने हवाई किरायों का भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। इस बार इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने देश की सभी प्रमुख घरेलू और निजी एयरलाइंस को बेहद सख्त और दो-टूक संदेश जारी किया है। नागरिक विमानन मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि त्योहारों के इस दौर में विमान कंपनियों को अपने किराए एक वाजिब और तार्किक दायरे में रखने होंगे, ताकि आम जनता को त्योहारी यात्रा के नाम पर आर्थिक लूट का शिकार न होना पड़े। सरकार के इस कड़े रुख से एविएशन मार्केट में हलचल तेज हो गई है।
नागरिक विमानन मंत्री राम मोहन नायडू का बड़ा बयान: त्योहारों में यात्रियों पर नहीं पड़ना चाहिए किराए का बोझ
दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि त्योहारी सीजन और छुट्टियों के दौरान विमानन मंत्रालय लगातार एयरलाइंस के शीर्ष प्रबंधन के संपर्क में रहता है और समय-समय पर उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जाती हैं। सरकार का यह स्पष्ट आग्रह और नैतिक दबाव है कि जो नागरिक त्योहारों के पावन मौके पर अपने परिवार के पास लौटना चाहते हैं, उन्हें महंगे हवाई टिकटों की भारी-भरकम मार न झेलनी पड़े। हालांकि, व्यावहारिक धरातल पर यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में निजी एयरलाइंस मुख्य रूप से बाजार की मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) के सिद्धांतों पर काम करती हैं, और वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत सरकार एक निश्चित सीमा से अधिक मूल्य नियंत्रण या किराए की कानूनी सीमा (Price Ceiling) सीधे तौर पर थोप नहीं सकती। मांग में अचानक भारी उछाल आते ही निजी एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग के तहत टिकट के दाम कई गुना बढ़ा देती हैं, जिसके चलते पिछले वर्षों में दीपावली और दशहरा के आसपास कई प्रमुख महानगरों और रूटों पर हवाई किराए सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने से भी अधिक दर्ज किए गए थे।
उड़ान-2 योजना का ऐतिहासिक विस्तार: 21 राज्यों के साथ समझौते, ₹60,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश का ऐलान
केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने यह महत्वपूर्ण घोषणाएं क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ (UDAN) के नए चरण यानी ‘उड़ान-2’ के आधिकारिक शुभारंभ और विभिन्न राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर करने के उपरांत कीं। देश के दूर-दराज के अछूते इलाकों, छोटे शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को सीधे हवाई मार्ग से जोड़ने तथा देश के आम नागरिक को किफायती और सुलभ हवाई यात्रा का सपना पूरा करने वाली इस प्रतिष्ठित ‘उड़ान’ योजना का दायरा अब अगले दस वर्षों के लिए और अधिक व्यापक कर दिया गया है। उड़ान-2 के इस नए चरण के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच अभूतपूर्व तालमेल देखने को मिल रहा है। शुरुआती दौर में देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस योजना के तहत केंद्र सरकार के साथ औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, असम, राजस्थान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित पांच अन्य राज्यों द्वारा भी बहुत जल्द इस पर औपचारिक मुहर लगाने की बात कही गई है।
100 नए एयरपोर्ट और 200 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण: एविएशन सेक्टर में विकास को पंख
नागरिक विमानन मंत्री ने विस्तृत वित्तीय खाका रखते हुए बताया कि उड़ान-2 योजना के तहत अकेले केंद्र सरकार की ओर से लगभग 30,000 करोड़ रुपये का भारी पूंजीगत निवेश किया जाएगा, जबकि संबंधित राज्य सरकारों की तरफ से भी समतुल्य यानी करीब 30,000 करोड़ रुपये का निवेश किए जाने की पूरी संभावना है। इस प्रकार इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए देश के संपूर्ण एविएशन और एयरोस्पेस सेक्टर में कुल 60,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश का नया मार्ग प्रशस्त होगा। इस विशाल निवेश से देश भर में बुनियादी ढांचे का कायापलट होगा, जिसके तहत लगभग 100 नए और आधुनिक हवाई अड्डों का निर्माण किया जाएगा तथा दूरदराज के पहाड़ी व तटीय क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाने के लिए 200 नए हेलीपैड विकसित किए जाएंगे। मंत्रालय ने यह भी लक्ष्य रखा है कि एविएशन सेक्टर से जुड़े प्रत्येक नए बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य अधिकतम 18 महीने की समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाए। उल्लेखनीय है कि मूल उड़ान योजना के शुरुआती चरणों के दौरान देश में 90 से अधिक नए हवाई अड्डों का निर्माण सफलतापूर्व किया जा चुका है, जिससे अब तक लगभग 1.68 करोड़ से अधिक आम यात्री बेहद किफायती दरों पर हवाई यात्रा का लाभ उठा चुके हैं।
एटीएफ (ATF) की आसमान छूती कीमतें और पश्चिम एशिया संकट: किराए में बढ़ोतरी की मुख्य वजह
त्योहारी सीजन में हवाई किरायों के नियंत्रण से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए विमानन मंत्री ने स्पष्ट किया कि किराए के ऊंचे बने रहने के पीछे केवल मुनाफाखोरी नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे गंभीर सैन्य और कूटनीतिक संकट के बाद से विमान ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतें काफी तेजी से ऊपर गई हैं। विमान संचालन की कुल लागत (Operational Cost) में अकेले एटीएफ की हिस्सेदारी लगभग 43 प्रतिशत तक होती है। इस बात से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जेट ईंधन की कीमतों में होने वाली हल्की सी भी बढ़ोतरी देश की किसी भी एयरलाइन के वित्तीय संतुलन और बजट को किस हद तक बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। ईंधन की यह उच्च लागत अंततः टिकटों के दाम पर असर डालती है।
अडानी समूह के एयरलाइन प्रस्ताव पर मंथन: सरकार संतुलित रुख अपनाने के पक्ष में
मीडिया द्वारा जब उद्योग जगत के दिग्गज अडानी समूह द्वारा नई एयरलाइन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव और उसकी संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो नागरिक विमानन मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम औपचारिक निर्णय नहीं लिया है। वर्तमान में मंत्रालय इस बात पर बेहद बारीकी से विचार कर रहा है कि एक ही व्यावसायिक समूह द्वारा हवाई अड्डों (Airport Infrastructure) का संचालन और साथ ही एयरलाइन सेवाओं का संचालन (Airline Operations) एक साथ किए जाने के क्या व्यावहारिक फायदे और नुकसान हो सकते हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि देश के एविएशन बाजार में अधिक से अधिक एयरलाइंस आएं, जिससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़े और यात्रियों के पास यात्रा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा विकल्प उपलब्ध हों। यदि कोई नया निवेशक इस क्षेत्र में रुचि दिखाता है, तो सरकार उसके विचारों और निवेश का स्वागत करती है। हालांकि, यदि एक ही कंपनी एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों को नियंत्रित करे, तो संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) या बाजार में किसी भी प्रकार की अनियंत्रित मोनोपोली को रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था और विनियामक तंत्र बनाना अनिवार्य होगा।
मौजूदा नियमों का स्पष्टीकरण: दिल्ली और मुंबई के अलावा अन्य ऑपरेटरों पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं
कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए मंत्री ने यह भी बताया कि देश के मौजूदा नियमों में ऐसा कोई भी प्रावधान या प्रतिबंध नहीं है जो किसी भी एयरपोर्ट ऑपरेटर को नई एयरलाइन शुरू करने से पूर्ण रूप से रोकता हो। इस तरह के विशेष प्रतिबंध या शर्ते केवल देश के मुख्य महानगरों—विशेषकर दिल्ली और मुंबई के इंदिरा गांधी व छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों—के मूल निजीकरण समझौतों और रियायत समझौतों (Concession Agreements) से जुड़े नियमों तक सीमित हैं। अन्य किसी भी निजी हवाई अड्डा ऑपरेटर पर इस प्रकार के राष्ट्रव्यापी सामान्य प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं। यही कारण है कि मंत्रालय इस संवेदनशील विषय पर किसी जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय पूरी तरह संतुलित, निष्पक्ष और पारदर्शी रुख अपना रहा है। त्योहारी सीजन से पहले सरकार की इस दो-टूक चेतावनी और देश भर में हवाई अड्डों के विस्तार की इन योजनाओं से साफ है कि आने वाले दिनों में भारतीय विमानन बाजार उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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