ईरान का ‘भूगोल बम’: दो पर्वतमालाएं, दो रेगिस्तान और दो समुद्र… यही हैं वो ताकतें जिनसे खौफ में अमेरिका!

तेहरान: पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और 39 दिनों तक चले संघर्ष ने दुनिया को चौंका दिया। एक तरफ अमेरिका-इजरायल जैसा शक्तिशाली सैन्य गठबंधन, तो दूसरी ओर ईरान—सैन्य ताकत में कमतर माने जाने के बावजूद उसने न केवल डटकर मुकाबला किया, बल्कि युद्धविराम की शर्तों में भी अपनी बात मनवाने में कामयाबी हासिल की। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष में ईरान की असली ताकत उसकी सेना नहीं, बल्कि उसका जटिल और खतरनाक भूगोल है।

पहाड़, रेगिस्तान और समुद्र: ईरान का प्राकृतिक किला

ईरान का भूगोल उसे एक प्राकृतिक किले में बदल देता है। देश में उत्तर से दक्षिण तक फैली दो विशाल पर्वतमालाएं, बीच में फैले रेगिस्तान और चारों ओर समुद्री सीमाएं किसी भी बाहरी सेना के लिए चुनौती बन जाती हैं। कैस्पियन सागर से लेकर ओमान सागर और फारस की खाड़ी तक फैला इलाका दुश्मन के लिए आसान नहीं है। यही वजह है कि इतिहास में भी विदेशी सेनाओं को यहां जमीनी सफलता मिलना मुश्किल रहा है।

39 दिन की जंग में दिखा भूगोल का असर

विश्लेषकों के मुताबिक, लंबे समय तक चले हमलों के बावजूद ईरान ने अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को बनाए रखा। इसका बड़ा कारण यह है कि उसके लॉन्चिंग सिस्टम पूरे देश में फैले हुए हैं और उन्हें पहाड़ों व दुर्गम इलाकों में छिपाया गया है। ऐसे में दुश्मन के लिए उन्हें निशाना बनाना बेहद कठिन हो जाता है।

तीन मोर्चे, तीन बड़ी चुनौतियां

सैन्य विशेषज्ञों ने जमीनी युद्ध की स्थिति में तीन संभावित रास्तों का जिक्र किया है—पहला, फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के द्वीपों पर कब्जा; दूसरा, दक्षिणी तट से हमला; और तीसरा, पश्चिमी कुर्द इलाकों के रास्ते घुसपैठ। लेकिन इन तीनों विकल्पों में भारी जोखिम और रणनीतिक जटिलताएं जुड़ी हुई हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की नब्ज पर पकड़

ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत होर्मुज जलडमरूमध्य है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति होता है। इस मार्ग पर नियंत्रण या अवरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है। हालिया तनाव के दौरान भी इस क्षेत्र की अहमियत साफ तौर पर सामने आई।

खर्ग द्वीप पर टकराव का खतरा

ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र खर्ग द्वीप भी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह तट से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस पर कब्जे की कोशिश करता है, तो ईरान सीधे टकराव से बचते हुए अलग रणनीति अपना सकता है—द्वीप को कब्जे में लेने देना और फिर दूर से हमले करना।

क्यों डरता है अमेरिका?

रक्षा जानकारों का कहना है कि ईरान पर जमीनी हमला अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हो सकता है। दुर्गम पहाड़, तपते रेगिस्तान, संकरे समुद्री रास्ते और फैला हुआ रक्षा नेटवर्क किसी भी आधुनिक सेना के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। यही वजह है कि तमाम चेतावनियों के बावजूद अमेरिका अब तक जमीनी कार्रवाई से बचता रहा है।