संसद में महासंग्राम: BJP ने अपने सभी सांसदों के लिए जारी किया ‘थ्री-लाइन व्हिप’, सोमवार को स्पीकर ओम बिरला की किस्मत पर होगा फैसला?

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने से पहले ही राजधानी के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आगामी सोमवार, 9 मार्च से सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हो रही है, लेकिन इस बार का माहौल सामान्य नहीं रहने वाला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए लोकसभा के अपने सभी सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 9 और 10 मार्च को सदन की कार्यवाही के दौरान सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य है। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव और कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को देखते हुए सरकार ने यह मोर्चाबंदी की है।

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: क्या है पूरा गणित?

सदन के भीतर चल रही इस रस्साकशी की जड़ें बजट सत्र के पहले चरण में छिपी हैं। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की ओर से नियम 94सी के अंतर्गत औपचारिक रूप से जमा किए गए इस नोटिस ने सदन के भीतर टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि स्पीकर का झुकाव सत्तापक्ष की ओर अधिक रहता है और सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से संचालित नहीं की जा रही है।

संख्या बल में भारी भाजपा, फिर भी क्यों बरती जा रही सावधानी?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में ओम बिरला के खिलाफ लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव महज एक प्रतीकात्मक विरोध नजर आता है। इसके पारित होने की संभावना न के बराबर है, लेकिन सरकार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। 9 और 10 मार्च को न केवल इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की उम्मीद है, बल्कि सरकार कुछ ऐसे ‘सरप्राइज’ बिल या विधायी कार्य भी पेश कर सकती है, जिनके लिए पूर्ण बहुमत की उपस्थिति अनिवार्य है। यही कारण है कि सांसदों को पूरे दिन सदन में डटे रहने का फरमान सुनाया गया है।

स्पीकर ओम बिरला का कड़ा फैसला: जब तक फैसला नहीं, तब तक सदन से दूरी

उल्लेखनीय है कि बजट सत्र के पहले चरण के दौरान खुद ओम बिरला ने एक गरिमापूर्ण लेकिन कड़ा फैसला लिया था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वे सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। विपक्षी दलों के लगातार बढ़ते आरोपों के बीच स्पीकर का यह कदम उनकी तटस्थता को साबित करने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजरें सोमवार की सुबह पर टिकी हैं, जब सदन की घंटी बजते ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच शह-मात का यह खेल शुरू होगा।