आसमान में सक्रिय हुआ मानसूनी ‘दैत्य’: बंगाल की खाड़ी में बने गहरे डिप्रेशन से 21 राज्यों में आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश का महाअलर्ट, IMD की सख्त चेतावनी

देश के ऊपर मौसम का एक बेहद आक्रामक और विशाल मौसमी तंत्र (Weather System) सक्रिय हो चुका है, जिसने सितंबर के महीने में मानसून को दोबारा अत्यधिक प्रचंड बना दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से, गांगेय पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटवर्ती इलाकों के ऊपर बना गहरा दबाव का क्षेत्र (Deep Depression) अब तेजी से आंतरिक भूभागों की तरफ बढ़ रहा है। इस विशाल मौसमी चक्रवात को आम बोलचाल और मीडिया में ‘आसमान का दैत्य’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह भारी मात्रा में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों छोर से मानसूनी नमी को अपनी ओर खींच रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि इस सिस्टम के प्रभाव से देश के 21 राज्यों में तेज आंधी, आकाशीय बिजली गिरने और मूसलाधार से अत्यधिक भारी बारिश का भयावह दौर शुरू हो सकता है, जिससे आम जनजीवन के व्यापक स्तर पर प्रभावित होने की आशंका है।

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, इस सक्रिय मौसमी तंत्र का सबसे पहला और भीषण प्रहार पूर्वी और मध्य भारत के राज्यों पर देखने को मिल रहा है। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ में अगले 48 से 72 घंटों के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा का अलर्ट घोषित किया गया है। झारखंड और तटीय ओडिशा के कई हिस्सों में बाढ़ (Flash Flood) और निचले इलाकों के जलमग्न होने की गंभीर चेतावनी दी गई है। मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में भी इस सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ-साथ तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बादलों की विशालकाय श्रृंखला समुद्र से लगातार ऊर्जा ले रही है, जिसके चलते कई जिलों में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चल सकती हैं और पुराने पेड़ या कच्चे ढांचे गिर सकते हैं।

पूर्वी भारत से उठकर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहे इस सिस्टम का सीधा प्रभाव उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों पर भी पड़ने जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल जिलों (वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, गाजीपुर) से लेकर अवध और तराई के इलाकों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला तेज होगा। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी राजस्थान में भी बादलों का डेरा रहेगा और रुक-रुक कर तेज गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ेंगी। दूसरी ओर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील पहाड़ी राज्यों के लिए यह मौसमी बदलाव किसी बड़ी आफत से कम नहीं है। पहाड़ों में भारी वर्षा के चलते अचानक भूस्खलन (Landslide), बोल्डर गिरने और पहाड़ी नदियों के उफान पर आने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील मार्गों पर सतर्कता बढ़ा दी है।

इस वेदर सिस्टम का फैलाव केवल उत्तर और मध्य भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भी इसका व्यापक असर देखा जा रहा है। तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, उत्तरी तमिलनाडु और महाराष्ट्र के तटीय कोंकण क्षेत्र में बादलों की सक्रियता के कारण लगातार मध्यम से भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। वहीं असम, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश में भी चक्रवाती हवाओं के दबाव के कारण भारी बारिश की चेतावनी बरकरार रखी गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता और विशेष रूप से खुले खेतों में काम करने वाले किसानों को चेतावनी दी है कि गरज-चमक और तेज आंधी के समय पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास खड़े न हों, क्योंकि इस मौसम तंत्र के साथ तीव्र वज्रपात (Lightning Strike) का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

21 राज्यों में मौसम के इस बदले और खतरनाक रूप को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDRF) की टीमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में जिलाधिकारियों को जलभराव, नदी के जलस्तर और बांधों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। मछुआरों को बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के तटीय इलाकों में गहरे समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। मौसम विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा करने से बचें, स्थानीय वेदर अपडेट पर नजर रखें और आंधी-तूफान के समय सुरक्षित पक्के मकानों में ही शरण लें।