
भारत की सीमाओं को पार करके भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और उनकी लीलाओं का प्रभाव अब पूरी दुनिया के कोने-कोने में अपनी गहरी छाप छोड़ रहा है। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक उथल-पुथल और तमाम संघर्षों के बीच इजरायल से एक बेहद खूबसूरत और सांस्कृतिक रूप से अद्भुत तस्वीर सामने आई है। इजरायल के ग्रामीण और शांत इलाके मोशाव एविएल में इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत उत्साह, उमंग और गहरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर इजरायल के कोने-कोने से सैकड़ों की संख्या में कृष्ण भक्त एकत्रित हुए, जिनमें से अधिकांश लोग यहूदी समुदाय से ताल्लुक रखते थे। दूरदराज से पहुंचे इन तमाम श्रद्धालुओं ने भगवान कन्हैया के जन्मोत्सव को अपनी अनूठी शैली में मनाकर यह साबित कर दिया कि दिव्य प्रेम, संगीत और भक्ति की कोई भौगोलिक या भाषाई सीमा नहीं होती है। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर से वैश्विक भाईचारे और सांस्कृतिक समन्वय का एक नया और अनूठा उदाहरण पेश किया है।
इजरायल के मोशाव एविएल में गूंजे पारंपरिक भजन और पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों की थाप
मोशाव एविएल की वादियों में जब जन्माष्टमी का यह उत्सव शुरू हुआ, तो पूरा वातावरण भारतीय संस्कृति और वैदिक मंत्रोच्चार से सराबोर हो गया। कार्यक्रम स्थल पर चारों तरफ केवल ‘हरे राम हरे कृष्ण’ के महामंत्र और जयकारे गूंज रहे थे, जिससे वहां मौजूद हर व्यक्ति भक्ति के सागर में गोता लगाने लगा। इस धार्मिक और सांस्कृतिक समागम में भाग लेने वाले स्थानीय इजरायली नागरिकों और यहूदी भक्तों के चेहरे पर एक अलग ही आध्यात्मिक आनंद साफ झलक रहा था। पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस आयोजन का हिस्सा बन रही एक स्थानीय निवासी और प्रखर कृष्ण भक्त तमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह पिछले बीस सालों से लगातार हर साल इस जन्माष्टमी समारोह में पूरी निष्ठा के साथ भाग लेती आ रही हैं। उनके जैसे तमाम अन्य स्थानीय लोगों के लिए यह त्योहार केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उनके आध्यात्मिक जीवन का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा बन चुका है जिसका वे पूरे साल बेसब्री से इंतजार करते हैं।
‘एलोहिम प्लस’ नाटक के मंचन से जीवंत हुई भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक और पावन लीलाएं
इस भव्य जन्माष्टमी समारोह के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने चार चांद लगा दिए, जिसमें यहूदी भक्तों द्वारा मंचित एक विशेष नाटक मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। श्रद्धालुओं ने इस पावन अवसर पर ‘एलोहिम प्लस’ यानी ‘ईश्वर प्लस’ नामक एक अत्यंत मनमोहक और दार्शनिक नाटक का सुंदर मंचन किया। इस नाटक के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण के जीवन, उनके संदेशों और उनके दर्शन को बेहद आधुनिक और प्रासंगिक तरीके से पेश किया गया। इस नाट्य प्रस्तुति से ठीक पहले, माहौल को पूरी तरह से उत्सवमय बनाने के लिए इजरायली भक्त पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों जैसे तबला और ढोलक की थाप पर पूरी ऊर्जा के साथ झूमते-गाते नजर आए। ढोलक की थाप पर थिरकते विदेशी और स्थानीय यहूदी भक्तों का यह दृश्य यह बताने के लिए काफी था कि कृष्ण की बंसी की धुन ने किस प्रकार पूरी दुनिया के दिलों को आपस में पिरो दिया है। कला और संगीत के इस अनूठे संगम ने दर्शकों का मन मोह लिया और हर कोई इस दिव्य आनंद में डूब गया।
108 शाकाहारी व्यंजनों के भव्य और दिव्य भोज के साथ हुआ इस ऐतिहासिक आयोजन का समापन
किसी भी भारतीय त्योहार की पूर्णता उसके पारंपरिक प्रसाद और लजीज व्यंजनों के बिना अधूरी मानी जाती है, और इजरायल में हुए इस आयोजन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया। इस शानदार जन्माष्टमी समारोह का समापन अतिथियों और उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भगवान कृष्ण का महाप्रसाद परोसने के साथ हुआ। इस महाप्रसाद में किसी एक या दो नहीं, बल्कि कुल 108 प्रकार के शुद्ध और स्वादिष्ट शाकाहारी व्यंजनों का एक अत्यंत भव्य और विशाल भोज तैयार किया गया था। पारंपरिक भारतीय पकवानों और स्थानीय स्वादों के बेहतरीन तालमेल वाले इस 108 भोग को पाकर सभी श्रद्धालु गदगद हो गए। भोजन की इस विविधता ने न केवल इजरायली भक्तों को भारतीय खान-पान की संस्कृति से रूबरू कराया, बल्कि सभी ने पूरी श्रद्धा के साथ इसे भगवान का प्रसाद मानकर ग्रहण किया। इस प्रकार, मीठे और नमकीन व्यंजनों की सतरंगी छटा के बीच यह जन्माष्टमी समारोह इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए अमर हो गया।
पड़ोसी देश बांग्लादेश के ऐतिहासिक ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में भी धूमधाम से मनी जन्माष्टमी
एक तरफ जहां मध्य पूर्व के देश इजरायल में यहूदी समुदाय ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को अपनी अनूठी शैली में मनाया, वहीं दूसरी ओर हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी कृष्ण जन्मोत्सव की गूंज सुनाई दी। प्रमुख समाचार एजेंसी एएनआई से मिली जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के हिंदू समुदाय ने राजधानी ढाका के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में पूरे श्रद्धा भाव और हर्षोल्लास के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया। इस अवसर पर बांग्लादेश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालु भगवान कृष्ण के जन्म के इस महान उत्सव का जश्न मनाने के लिए विशेष प्रार्थनाओं, पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर शामिल हुए। मंदिर परिसर को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था और पूरा इलाका कृष्ण भजनों से गूंज रहा था।
ढाका की सड़कों पर निकली भव्य और विशाल शोभायात्रा, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
ढाका के ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में आयोजित इन पारंपरिक समारोहों की श्रृंखला में एक बेहद आकर्षक और भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई। इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उतरे, जिनके हाथों में भगवान कृष्ण के चित्र, धार्मिक झंडे और बैनर थे। लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए थे और पूरे रास्ते ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘हथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के नारों से पूरा ढाका शहर गूंज उठा। इस शोभायात्रा और उत्सव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। बांग्लादेश में इस तरह के आयोजनों का बड़े पैमाने पर होना यह दर्शाता है कि तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद वहां की आस्था और सांस्कृतिक परंपराएं आज भी पूरी तरह से जीवित और प्रवाहमान हैं।
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