कल का मौसम: देश के 20 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट, दिल्ली-NCR से दक्षिण भारत तक बदलेगा मिजाज

भारत में मानसून की औपचारिक विदाई के दौर के बीच वायुमंडलीय परिस्थितियों में अचानक आए बदलाव ने पूरे देश का मौसम बदल कर रख दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने गहरे चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय ताजा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के परस्पर टकराने से एक बेहद मजबूत मौसमी तंत्र सक्रिय हो गया है। इसके चलते कल 7 अक्टूबर को उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक देश के 20 से अधिक राज्यों में मौसम अपना आक्रामक रुख दिखाएगा। मौसम विभाग ने कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज झोंके वाली आंधी और भीषण आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर प्रायद्वीपीय भारत के तटीय क्षेत्रों तक लोगों को खराब मौसम के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)—नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम—में कल मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह के समय आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, जबकि दोपहर बाद या शाम के समय गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज झोंके वाली हवाएं चलने के आसार हैं। दिल्ली-एनसीआर में हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस मौसमी बदलाव के चलते दिन के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे पिछले कुछ दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी। हालांकि, अचानक होने वाली बारिश से शाम के व्यस्त समय में सड़कों पर जलभराव और पीक-आवर ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो सकती है, जिसको लेकर स्थानीय यातायात पुलिस ने भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

उत्तर भारत के बड़े राज्यों में कल मौसम का सबसे व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और तराई के जिलों में दिन भर रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया में स्थानीय स्तर पर घने बादलों के जमावड़े के कारण आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल आशंका है, जिसे देखते हुए किसानों और आम नागरिकों को खेतों में खुले में न जाने की चेतावनी दी गई है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तीव्र बौछारें पड़ने और संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर हल्के भूस्खलन का जोखिम बना हुआ है। वहीं मध्य भारत के मध्य प्रदेश—विशेषकर भोपाल, ग्वालियर, रीवा, सागर और जबलपुर संभाग—में तेज आंधी और गरज के साथ भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है।

बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी खींच रही पूर्वी हवाओं के कारण पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की गतिविधियां चरम पर रहेंगी। कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना सहित ओडिशा के तटीय जिलों जैसे पुरी, कटक और बालासोर में कल भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के कारण मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। इसके साथ ही असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर में भी मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने और जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है।

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून के शुरुआती संकेतों और स्थानीय ट्रफ रेखा के प्रभाव से मौसम पूरी तरह करवट ले चुका है। केरल के तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कोझिकोड और इडुक्की जैसे पहाड़ी जिलों में कल मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। कर्नाटक के तटीय हिस्सों (मंगलुरु, उडुपी) और आंतरिक दक्षिणी कर्नाटक (बेंगलुरु, मैसूर) में तेज गरज के साथ व्यापक वर्षा की संभावना है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई, कांचीपुरम और तटीय क्षेत्रों में रुक-रुक कर भारी बौछारों का दौर जारी रहेगा। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बिजली चमकने और भारी बारिश के चलते फसलों और कच्चे निर्माणों को नुकसान की आशंका जताई गई है।

अक्टूबर महीने की इस बेमौसम बारिश ने देश भर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय उत्तर और मध्य भारत में खरीफ की प्रमुख फसलों—जैसे धान, सोयाबीन, मक्का और बाजरा—की कटाई का काम चल रहा है या फसलें पकने के कगार पर हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कड़े दिशा-निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत कटाई का काम रोक दें और जो फसल कट चुकी है, उसे खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित शेड या वाटरप्रूफ तिरपाल से पूरी तरह ढक दें। खेतों में पानी का ठहराव रोकने के लिए जल निकासी की नालियां तुरंत साफ करें। वहीं, आम जनता के लिए आपदा प्रबंधन टीमों ने निर्देश दिया है कि आंधी और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, पुराने मकानों, बिजली के खंभों और होर्डिंग्स के नीचे खड़े होने से बचें तथा सुरक्षित पक्के भवनों के भीतर ही रहें।