खेल क्रांति से नशामुक्ति तक: पीएम मोदी के ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में तय होगा भारत का नया स्पोर्ट्स रोडमैप, इन 5 अहम मुद्दों पर होगा महामंथन

भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति (Global Sports Powerhouse) बनाने और देश के युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के विजन के साथ ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ का मंच पूरी तरह सज चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस उच्चस्तरीय संवाद में देश भर के शीर्ष एथलीट, कोच, स्पोर्ट्स फेडरेशन, नीति निर्माता और युवा आइकन एक साथ जुट रहे हैं। इस महामंथन का उद्देश्य केवल पदकों की गिनती बढ़ाना नहीं है, बल्कि खेल को समाज में चरित्र निर्माण, राष्ट्र निर्माण और युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखने के एक शक्तिशाली साधन के रूप में स्थापित करना है। इस संवाद में मुख्य रूप से 5 बड़े रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।

1. जमीनी स्तर पर प्रतिभा खोज और ग्रासरूट इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

संवाद का पहला और सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा देश के दूर-दराज, ग्रामीण, आदिवासी और पूर्वोत्तर के क्षेत्रों से छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को तलाशना और उन्हें निखारना है। ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ और ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ की सफलता के बाद अब फोकस जिला और ब्लॉक स्तर पर आधुनिक खेल अकादमियों की स्थापना पर है। इसके तहत स्कूल स्तर पर ही बच्चों के एथलेटिक रुझान को पहचानने के लिए वैज्ञानिक ‘टैलेंट हंट’ प्रोग्राम चलाने और बुनियादी ट्रेनिंग सेंटर्स को अपग्रेड करने पर ठोस रणनीति बनेगी, ताकि किसी भी होनहार खिलाड़ी की प्रतिभा सुविधाओं की कमी के कारण दम न तोड़े।

2. खेलों के जरिए नशामुक्ति और युवा ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग

इस संवाद का एक बड़ा सामाजिक पहलू युवाओं को नशे के जाल से बचाकर खेल के मैदान तक लाना है। मादक पदार्थों की लत से निपटने के लिए खेलों को एक सशक्त सामाजिक ढाल के रूप में उपयोग करने पर व्यापक चर्चा होगी। ‘फिट इंडिया’ और ‘नशामुक्त भारत अभियान’ को आपस में जोड़ते हुए संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष खेल लीग्स आयोजित करने की योजना है। जब युवा खेल के मैदान में पसीना बहाएंगे और फिटनेस को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएंगे, तो वे नशीले पदार्थों और असामाजिक गतिविधियों से स्वाभाविक रूप से दूर रहेंगे।

3. स्पोर्ट्स साइंस, न्यूट्रिशन और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग इकोसिस्टम

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सेकंड के सौवें हिस्से से पदक तय होते हैं, इसलिए इस बैठक में स्पोर्ट्स साइंस और आधुनिक स्पोर्ट्स मेडिसिन को अनिवार्य बनाने पर जोर दिया जाएगा। भारतीय एथलीटों को बायोमैकेनिक्स, एआई-आधारित परफॉर्मेंस एनालिसिस, अत्याधुनिक फिजियोथेरेपी और कस्टमाइज्ड डाइट व न्यूट्रिशन प्लान उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (NCOE) को अपग्रेड किया जाएगा। इसके साथ ही, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित कोचों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी।

4. 2036 ओलंपिक की मेजबानी की तैयारी और पोडियम फिनिश रोडमैप

भारत ने 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। इस संवाद में पेरिस ओलंपिक और पैरालंपिक के प्रदर्शन की समीक्षा के साथ-साथ आगामी 2028 लॉस एंजिल्स, 2032 ब्रिस्बेन और 2036 के संभावित घरेलू ओलंपिक के लिए ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) को और अधिक आक्रामक व परिणामोन्मुख बनाने पर बात होगी। उन पारंपरिक और आधुनिक खेलों की पहचान की जाएगी जहां भारत के पास पदक जीतने की सबसे अधिक संभावनाएं हैं, और उन एथलीटों को विश्वस्तरीय विदेशी ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर दिया जाएगा।

5. स्पोर्ट्स इकोनॉमी, स्टार्टअप्स और करियर सिक्योरिटी का निर्माण

खेल अब केवल एक शौक नहीं बल्कि रोजगार और आर्थिक वृद्धि का एक विशाल क्षेत्र बन चुका है। संवाद के पांचवें एजेंडे के तहत देश में स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और स्पोर्ट्स टूरिज्म को गति देने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, खिलाड़ियों के लिए खेलों के बाद सुरक्षित भविष्य, सरकारी नौकरियों में आरक्षण, कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप और पेंशन स्कीमों को और अधिक सुदृढ़ करने का खाका खींचा जाएगा, ताकि देश का हर माता-पिता गर्व और आत्मविश्वास के साथ अपने बच्चे को खेल को फुल-टाइम करियर बनाने के लिए प्रेरित कर सके।