
भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों से संवेदनशील मुद्दा बने तीस्ता नदी जल विवाद (Teesta River Project Dispute) में अब एक ऐसा खतरनाक मोड़ आ गया है जिसने पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में खलबली मचा दी है। अब तक तीस्ता नदी के पुनरुद्धार और प्रबंधन परियोजना को लेकर भारत और चीन के बीच खींचतान चल रही थी, लेकिन अब इसमें महाशक्ति अमेरिका (United States) की भी धमाकेदार एंट्री हो गई है। ढाका में पदस्थ अमेरिकी राजनयिकों और आर्थिक प्रतिनिधिमंडलों द्वारा तीस्ता बेसिन से सटे रंगपुर, पंचगढ़ और उत्तरी बांग्लादेशी इलाकों का सघन दौरा करने के बाद इस बात की पुष्टि हो गई है कि वाशिंगटन की नजरें लगभग 1 अरब डॉलर की लागत वाली इस महात्वाकांक्षी तीस्ता प्रोजेक्ट पर गड़ गई हैं। अमेरिका के इस सीधे दखल के बाद बांग्लादेश पूरी तरह से दुनिया की तीन सबसे बड़ी ताकतों—भारत, चीन और अमेरिका—का नया रणनीतिक ‘ग्रेट गेम’ अखाड़ा बन चुका है, जिससे न केवल बांग्लादेशी सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं, बल्कि भारतीय सुरक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर भी भारी तनाव पैदा हो गया है।
तीस्ता नदी बांग्लादेश की चौथी सबसे बड़ी नदी प्रणाली है, जो सिक्किम और उत्तरी पश्चिम बंगाल से बहती हुई बांग्लादेश की जमुना नदी में मिलती है। मानसून में भयंकर बाढ़ और शुष्क मौसम में पानी की भारी किल्लत के कारण बांग्लादेश लंबे समय से ‘तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट’ पर काम करना चाहता है। शुरुआत में चीन ने इस बहुचर्चित ₹9,000 करोड़ ($1 Billion) से अधिक के प्रोजेक्ट को फंडिंग देने और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का दांव खेला था। हालांकि, भारत की सीमा और ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के बेहद करीब चीनी सैनिकों व इंजीनियरों की मौजूदगी को लेकर भारत ने कड़ी सामरिक आपत्तियां जताई थीं। इसी खींचतान के बीच अब अमेरिका-बांग्लादेश द्विपक्षीय व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश कंपनियों ने तीस्ता प्रोजेक्ट में सीधी हिस्सेदारी की मंशा जता दी है। अमेरिका का मानना है कि इस संवेदनशील जल परियोजना में चीनी एकाधिकार को तोड़ना इंडो-पैसिफिक रीजन में उसकी बैलेंस ऑफ पावर नीति के लिए बेहद जरूरी है।
दक्षिण एशियाई कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, अमेरिका का इस विवाद में कूदना क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक उलझा सकता है। भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर 22 किलोमीटर चौड़ा वह नाजुक सैन्य चोकपॉइंट है जो पूरे पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। यदि तीस्ता नदी के 3 किलोमीटर चौड़े और उथले बहाव को जबरन संकरा कर 816 मीटर का कृत्रिम चैनल बनाया जाता है, तो हिमालय से आने वाली करोड़ों टन मिट्टी और गाद से पूरे क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ का स्थायी खतरा मंडराने लगेगा। वहीं दूसरी ओर, ढाका की मौजूदा सरकार के सामने अब धर्मसंकट यह है कि वह बीजिंग से मिलने वाले लोन और इंफ्रास्ट्रक्चर वादों, वाशिंगटन के व्यापारिक दबाव और नई दिल्ली के साथ अपने ऐतिहासिक व भौगोलिक संबंधों के बीच संतुलन कैसे बनाएगी। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि तीस्ता को लेकर सुपरपावर्स की यह सीधी जंग आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया के नक्शे पर एक नई तनातनी को जन्म देने वाली है।
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