
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शुक्रवार को मानसून ने ऐसा विकराल रूप दिखाया कि शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई। दोपहर के समय शुरू हुई तूफानी बारिश ने कुछ ही घंटों के भीतर दिल्ली के बुनियादी ढांचे और जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। देश के सबसे आधुनिक और व्यस्ततम माने जाने वाले इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) के टर्मिनल-3 पर हालात उस वक्त अप्रत्याशित हो गए जब भारी बारिश का पानी टर्मिनल के बाहर बने विशाल फोरकोर्ट, अराइवल गेट और यात्रियों के आवागमन वाले मुख्य परिसर के भीतर तक पहुंच गया। टर्मिनल-3 के कई हिस्सों में घुटनों तक पानी जमा हो जाने से देश-विदेश से आने वाले यात्रियों में अफरातफरी मच गई।
विमान से उतरकर बाहर निकलने वाले मुसाफिरों को अपना भारी सामान और ट्रॉली बैग सिर व कंधों पर उठाकर जलभराव के बीच से निकलने के लिए विवश होना पड़ा। टर्मिनल परिसर के कई आंतरिक हॉलों में पानी भर जाने के कारण एयरपोर्ट ग्राउंड स्टाफ वाइपर, वैक्यूम मशीनों और पोर्टेबल पंपिंग सेटों के सहारे पानी को बाहर निकालने की जद्दोजहद में जुटा रहा। एयरपोर्ट पर काम करने वाले कई वरिष्ठ कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने अपने सेवाकाल में पहली बार टर्मिनल-3 के भीतर इस पैमाने पर पानी का जमावड़ा देखा है। टर्मिनल के नीचे से गुजरने वाली एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो लाइन और अंडरग्राउंड टनल में पानी के रिसाव को रोकने के लिए आपातकालीन बैरिकेड्स और सैंडबैग्स लगाए गए।
खराब दृश्यता, रनवे पर पानी के तेज बहाव और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर हवाई यातायात पूरी तरह चरमरा गया। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट ‘फ्लाइटराडार24’ और विमानन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली आने और यहां से उड़ान भरने वाली 400 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में घंटों की देरी दर्ज की गई। एयरपोर्ट पर मौसम की स्थिति इतनी प्रतिकूल हो गई थी कि दोपहर 3:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच दिल्ली में उतरने वाले कम से कम 9 विमानों को नजदीकी वैकल्पिक हवाई अड्डों की ओर डायवर्ट करना पड़ा।
डायवर्ट किए गए विमानों में से चार को राजस्थान के जयपुर, चार को उत्तर प्रदेश के लखनऊ और एक विमान को गुजरात के अहमदाबाद भेजा गया। जयपुर भेजे गए प्रमुख विमानों में इंडिगो की बेंगलुरु से दिल्ली आने वाली फ्लाइट (6E-869), पूर्णिया से दिल्ली आ रही फ्लाइट (6E-6560) और एयर इंडिया की श्रीनगर-दिल्ली फ्लाइट (AI-1818) शामिल रहीं। घंटों हवा में चक्कर काटने के बाद ईंधन की कमी और खराब मौसम के चलते एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने इन विमानों को नजदीकी शहरों में उतरने के निर्देश दिए। अचानक उड़ानों के रद्द होने और अत्यधिक विलंब के कारण टर्मिनल के भीतर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे चेक-इन काउंटरों और बैगेज बेल्टों पर लंबी कतारें लग गईं।
हवाई अड्डे के अलावा मूसलाधार बारिश का सबसे खौफनाक असर दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली प्रमुख सड़कों और अंडरपासों पर पड़ा। दिल्ली एयरपोर्ट को जोड़ने वाला एरोसिटी अंडरपास और टर्मिनल-3 अप्रोच रोड पूरी तरह जलमग्न हो गई, जहां कई गाड़ियां, टैक्सियां और निजी कारें पानी के भारी दबाव के बीच बीच रास्ते में ही बंद होकर तैरती नजर आईं। दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली के सबसे व्यस्त कॉरिडोर यानी धौला कुआं, सुब्रतो पार्क, महिपालपुर बाईपास, मोती बाग और रिंग रोड पर जलभराव के चलते वाहनों की कतारें कई किलोमीटर लंबी हो गईं।
सुब्रतो पार्क के पास मुख्य मार्ग पर 2 से 3 फीट तक पानी भर जाने से दोपहिया वाहन चालक पानी में गिरते दिखे और कई बसें बीच सड़क पर खराब हो गईं। इसके अलावा प्रगति मैदान टनल, मिंटो ब्रिज अंडरपास, मूलचंद, आश्रम फ्लाईओवर के निचले हिस्से, आईटीओ, सराय काले खां और कालिंदी कुंज बॉर्डर पर भी जल निकासी अवरुद्ध होने से भीषण ट्रैफिक जाम लग गया। शाम के वक्त दफ्तरों से घर लौट रहे लाखों लोग घंटों तक अपनी गाड़ियों में फंसे रहे। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई ट्रैफिक अलर्ट जारी करते हुए वाहन चालकों को जलमग्न रास्तों से बचने और वैकल्पिक रूट अपनाने के निर्देश दिए।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए अपने पूर्वानुमान को अपग्रेड करते हुए तत्काल प्रभाव से ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) जारी कर दिया है। मौसम विभाग के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार, दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में मानसूनी ट्रफ और उत्तर-पश्चिम भारत पर बने शक्तिशाली चक्रवाती हवाओं के दबाव के कारण घने बादलों का एक विशाल समूह सक्रिय है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटों के दौरान एनसीआर के कई इलाकों में 50 से 100 मिलीमीटर तक की अति-भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) दर्ज की जा सकती है।
इस मौसमी तंत्र के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर हवाएं और 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाले तेज तूफानी झोंके चलने की पूरी आशंका है। मौसम विभाग ने वज्रपात (Lightning) और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर जोखिम भी जताया है। आईएमडी ने आपदा प्रबंधन एजेंसियों, नगर निगमों और आम नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत देते हुए कहा है कि कमजोर ढांचों, पुराने पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें, क्योंकि तेज हवाओं के झोंकों से इनके गिरने की प्रबल संभावना बनी हुई है।
उड़ानों के बड़े पैमाने पर प्रभावित होने के बाद देश की प्रमुख एयरलाइंस कंपनियों इंडिगो और एयर इंडिया ने अपने यात्रियों के लिए तत्काल यात्रा परामर्श (Travel Advisory) जारी किया है। इंडिगो ने आधिकारिक बयान में कहा कि दिल्ली के ऊपर मौसम की अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों ने फ्लाइट ऑपरेशंस को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। एयरलाइन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अपनी संबंधित उड़ान की लाइव स्थिति (Flight Status) की जांच अवश्य कर लें।
इसके साथ ही, सड़कों पर भारी जलभराव और ट्रैफिक जाम के कारण यात्रा में लगने वाले अतिरिक्त समय को ध्यान में रखते हुए यात्रियों को सामान्य से 2 से 3 घंटे पहले घर से निकलने की सलाह दी गई है। एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सूचना जारी करते हुए कहा कि खराब मौसम के कारण उड़ानों के समय में बदलाव हो रहा है और प्रभावित यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के रिशेड्यूलिंग अथवा रिफंड की सुविधा प्रदान की जा रही है। एयरपोर्ट ऑपरेटर डायल (DIAL) ने भी ग्राउंड हैंडलिंग टीमों को अतिरिक्त पंपों और बैकअप जनरेटरों के साथ संवेदनशील इलाकों में तैनात रहने के निर्देश दिए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी के ड्रेनेज सिस्टम और आपदा तैयारियों को लेकर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल कर चुका है और इसे देश का सबसे आधुनिक विमानन केंद्र माना जाता है। इसके बावजूद महज दो घंटे की मूसलाधार बारिश में टर्मिनल-3 के फोरकोर्ट का डूब जाना और पानी का टर्मिनल के मुख्य लाउंज तक पहुंच जाना एयरपोर्ट के हाइड्रोलिक ड्रेनेज डिजाइन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
नागरिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और अंडरपासों पर भारी-भरकम बजट खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत पहली ही तेज बारिश में बह जाती है। एयरपोर्ट के निचले इलाकों और नजफगढ़ ड्रेन से जुड़े आउटलेट्स के चोक होने के कारण बैकफ्लो की स्थिति बन जाती है, जिससे पानी बाहर निकलने के बजाय टर्मिनल परिसर की ओर लौटने लगता है। पर्यावरणविदों और शहरी नियोजन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में जब कम समय में अत्यधिक बारिश (Cloudburst-like Intensity) की घटनाएं बढ़ रही हैं, तब दिल्ली के पुराने और अपर्याप्त ड्रेनेज नेटवर्क को आधुनिक मानकों पर पुनर्गठित करना अनिवार्य हो चुका है, अन्यथा हर मानसूनी बारिश इसी तरह दिल्ली को ठप करती रहेगी।
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