बलूचिस्तान बना पाकिस्तानी सेना का कब्रिस्‍तान तो भारत ठीकरा फोड़ने लगे मुनीर, क्या है ‘फितना अल-हिंदुस्तान

पाकिस्तान की नापाक नीतियों और आंतरिक विफलताओं का सच अब दुनिया के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है, लेकिन अपनी नाकामियों को स्वीकार करने के बजाय पाकिस्तानी हुक्मरान और सेना प्रमुख हमेशा की तरह भारत पर निराधार आरोप मढ़ने में जुट गए हैं। बलूचिस्तान के भीतर सुलग रही विद्रोह की आग और वहां लगातार हो रहे हमलों से पाकिस्तानी सेना के होश उड़े हुए हैं, क्योंकि यह क्षेत्र अब उनकी फौज के लिए एक बड़ा कब्रगाह बनता जा रहा है। अपनी ही धरती पर बलूच स्वतंत्रता सेनानियों के हाथों लगातार मिल रही शर्मनाक शिकस्त और भारी जान-माल के नुकसान से बौखलाए पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अपनी जनता और दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए एक बार फिर पुराना और घिसा-पिटा राग अलापना शुरू कर दिया है। इसी बौखलाहट के बीच उन्होंने एक नया और बेतुका शिगूफा छोड़ा है जिसे ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ का नाम दिया गया है, जिसके जरिए वे अपनी आंतरिक सुरक्षा के पूर्ण पतन का ठीकरा सीधे तौर पर भारत के सिर फोड़ने की असफल कोशिश कर रहे हैं।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की हो रही है भारी फजीहत

पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधन संपन्न प्रांत बलूचिस्तान में हालात पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तानी फौज के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो चुके हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य स्थानीय विद्रोही संगठनों ने पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों पर अपने हमलों को बेहद तेज कर दिया है, जिससे आए दिन पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबरें सामने आती रहती हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि बलूचिस्तान के कई इलाकों में पाकिस्तानी सेना के जवान खुलेआम निकलने से भी डरते हैं और उनके सैन्य शिविरों व चौकियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के नाम पर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों की हो रही अंधाधुंध लूट से वहां के स्थानीय लोग और युवा अंदर से बेहद गुस्से में हैं, और वे हथियारों के बल पर पाकिस्तानी हुकूमत को खुली चुनौती दे रहे हैं। अपनी इसी लाचारी और जमीन पर मिल रही करारी हार को छिपाने के लिए रावलपिंडी के जनरलों के पास अब केवल भारत विरोधी दुष्प्रचार करने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

क्या है ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ का नया प्रोपोगंडा शिगूफा

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अपनी फौज के भीतर और देश की जनता के बीच घटते मनोबल को संभालने के लिए ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ नाम का एक नया वैचारिक शिगूफा गढ़ा है। इस नए प्रोपोगंडा के तहत पाकिस्तानी फौज यह दावा करने की कोशिश कर रही है कि उनके देश के भीतर होने वाली तमाम आतंकवादी गतिविधियों, आंतरिक विद्रोहों और बलूच स्वतंत्रता संग्राम के पीछे भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) का सीधा हाथ है। वे यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ रहे हैं कि भारत पाकिस्तान को अंदर से कमजोर करने और अस्थिर करने के लिए ऐसे तत्वों को वित्तीय और सैन्य सहायता दे रहा है। हालांकि, कूटनीतिक और रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह केवल पाकिस्तानी सेना का एक पुराना हथकंडा है, जिसका उपयोग वे अपनी खुद की नाकाबिलियत, भ्रष्टाचार, आर्थिक बदहाली और सैन्य कुप्रबंधन से जनता का ध्यान हटाने के लिए करते हैं। दुनिया का कोई भी जिम्मेदार देश अब पाकिस्तान के इन झूठे और आधारहीन आरोपों पर जरा भी यकीन नहीं करता है, क्योंकि पाकिस्तान खुद अपने पाले हुए आतंकवाद का शिकार बन चुका है।

अपनी ही आग में सुलग रहा पाकिस्तान और भारत का बढ़ता वैश्विक कद

यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान ने दशकों तक अपनी जमीन का इस्तेमाल करके भारत में आतंकवाद फैलाने का काम किया है, लेकिन अब वही पाले हुए सांप उनके अपने ही घरों को डसने लगे हैं। बलूचिस्तान के अलावा खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाके भी पाकिस्तानी सेना पर भारी पड़ रहे हैं, और देश के भीतर गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। दूसरी ओर, भारत आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन चुका है और वैश्विक मंचों पर उसकी साख लगातार ऊंचाइयों को छू रही है। भारत अंतरिक्ष विज्ञान, टेक्नोलॉजी, डिजिटल इकोनॉमी और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नित नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है, जिससे पाकिस्तान के हुक्मरानों के पेट में तेज दर्द होना स्वाभाविक है। जब एक तरफ भारत दुनिया भर में शांति, विकास और तरक्की का पर्याय बन रहा है, तो इसके विपरीत पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर खड़ा है और उसकी फौज केवल झूठ और फरेब के सहारे अपनी सत्ता बचाने की जद्दोजहद कर रही है।

भारत के खिलाफ दुष्प्रचार से अब कुछ हासिल नहीं होने वाला

पाकिस्तान की अवाम अब वहां की सेना के इन पुराने और झूठे बयानों से पूरी तरह ऊब चुकी है, क्योंकि वे रोजाना महंगाई, बेरोजगारी, बिजली और पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। देश के कोने-कोने में जनता अब खुलकर पाकिस्तानी फौज के खिलाफ आवाज उठाने लगी है और उन्हें समझ आ गया है कि जब तक सेना देश की राजनीति और संसाधनों पर कब्जा जमाए रखेगी, तब तक पाकिस्तान का सुधार होना नामुमकिन है। जनरल असीम मुनीर का यह नया प्रोपोगंडा ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ भी पिछले दशकों के अन्य झूठे आरोपों की तरह पूरी तरह फ्लॉप साबित होने वाला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अब पाकिस्तान की इस दोहरी नीति को बहुत अच्छी तरह समझ चुका है कि कैसे वह अपनी घरेलू विफलताओं का ठीकरा हमेशा भारत के सिर फोड़कर अपनी पीठ थपथपाना चाहता है। बलूचिस्तान के लोग अब विदेशी या पाकिस्तानी कब्जे से मुक्ति चाहते हैं, और वहां की जंग अब किसी के रोके नहीं रुकने वाली है, चाहे पाकिस्तानी सेना इसके लिए कितने भी नए नाम क्यों न गढ़ ले।