यूपी के 1.32 लाख स्कूलों में पर्यावरण की अनूठी पाठशाला: योगी सरकार मना रही BRICS सतत जीवनशैली सप्ताह

उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था में एक अभूतपूर्व और दूरगामी बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां किताबों के ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण की व्यावहारिक शिक्षा को सीधे बच्चों की दिनचर्या से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक व्यापक पर्यावरण-जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। राज्य के करीब 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में 1 नवंबर से 7 नवंबर 2026 तक ‘ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह’ (BRICS Sustainable Lifestyle Week) पूरे उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ आयोजित किया जा रहा है। इस राज्यव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को कम उम्र से ही पर्यावरण-अनुकूल आदतें सिखाना और उन्हें जलवायु परिवर्तन के दौर में एक जिम्मेदार, सजग और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करना है। राजधानी लखनऊ से लेकर बुंदेलखंड और पूर्वांचल के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक फैले विद्यालयों में यह अभियान जन-आंदोलन का रूप ले चुका है।

इस विशाल कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत इसकी व्यापक पहुंच है। प्रदेश भर के विद्यालयों में नामांकित लगभग 1.42 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर इस साप्ताहिक अभियान की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ चुके हैं। अभियान का मुख्य आधार केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी ‘मिशन लाइफ’ (Lifestyle for Environment) है, जिसके सात प्रमुख विषयों पर आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है। इस अभियान के तहत बच्चों को न केवल स्कूल परिसर के भीतर जल, बिजली और पेड़-पौधों की हिफाजत करना सिखाया जा रहा है, बल्कि उन्हें यह प्रेरणा भी दी जा रही है कि वे इन जीवनशैली परिवर्तनों को अपने घरों, परिवारों और आसपास के ग्रामीण व शहरी समुदाय तक मजबूती से पहुंचाएं। इस प्रकार प्रत्येक विद्यार्थी समाज में बदलाव का एक सक्रिय दूत (क्लाइमेट एंबेसडर) बनकर उभर रहा है।

ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि प्रत्येक दिन एक विशिष्ट पर्यावरणीय चुनौती और उसके व्यावहारिक समाधान पर केंद्रित रहे। अभियान के पहले तीन दिनों के दौरान बच्चों को स्वास्थ्य, ऊर्जा और जल की बचत के बुनियादी सिद्धांतों से रूबरू कराया गया। 1 नवंबर को अभियान की शुरुआत ‘स्वस्थ जीवनशैली’ के संकल्प के साथ हुई, जिसमें योग, स्वच्छता और पौष्टिक आहार पर जोर दिया गया। इसके बाद 2 नवंबर को ‘ऊर्जा संरक्षण’ दिवस के रूप में मनाते हुए कक्षाओं और घरों में गैर-जरूरी बिजली के उपकरणों को बंद करने और प्राकृतिक रोशनी का उपयोग करने के उपाय सिखाए गए। 3 नवंबर को जल संरक्षण से जुड़ी रोचक गतिविधियों के जरिए भूजल के गिरते स्तर और बूंद-बूंद पानी बचाने की अहमियत पर गंभीर मंथन हुआ। वहीं 4 नवंबर को ‘टिकाऊ खाद्य प्रणाली’ पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जहां बच्चों को स्थानीय मोटे अनाज (मिलेट्स) के पोषण और भोजन की बर्बादी रोकने के तौर-तरीके समझाए गए।

सप्ताह के बाकी बचे तीन दिन अपशिष्ट प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्ति के कड़े संकल्पों पर आधारित रखे गए हैं। 5 नवंबर का दिन ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ से पूरी तरह तौबा करने के संदेश को समर्पित रहेगा, जिसमें छात्रों को कपड़े के थैलों और धातु के बर्तनों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाएगा। 6 नवंबर को आधुनिक दौर की गंभीर समस्या ‘ई-कचरा’ (Electronic Waste) के सुरक्षित निस्तारण और उसके दुष्प्रभावों पर जागरूकता फैलाई जाएगी। अंत में, 7 नवंबर को व्यापक ‘कचरा न्यूनीकरण’ (Waste Reduction) और गीले-सूखे कचरे के पृथक्करण के साथ इस विशेष सप्ताह का औपचारिक समापन होगा। यह क्रमबद्ध योजना छात्रों के व्यवहार में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक ठोस वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

इस पूरे पर्यावरण पखवाड़े को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने में विद्यालयों के ‘इको-क्लब’ (Eco Clubs) सबसे अहम और प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। स्कूलों में गठित ये क्लब शिक्षकों और जागरूक छात्रों के समन्वय से रोजाना नई-नई रचनात्मक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। अभियान को तकनीकी रूप से सुदृढ़ और मानकीकृत बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के समर्पित डिजिटल पोर्टल ecoclubs.education.gov.in का सहारा लिया जा रहा है। इस आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से सभी विद्यालयों को आवश्यक सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) सामग्री, ऑडियो-विजुअल टूल्स, पोस्टर और गतिविधि गाइडलाइन डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई गई है, जिससे हर जिले में एक समान उच्च गुणवत्ता वाली गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

विद्यालयों में रोजाना सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान मिशन लाइफ की सामूहिक शपथ दिलाई जा रही है। इसके साथ ही कक्षाओं में पेंटिंग प्रतियोगिताएं, स्लोगन लेखन, भाषण, वाद-विवाद और नाटक (नुक्कड़ नाटक) आयोजित किए जा रहे हैं ताकि बच्चे खेल-खेल में जटिल पर्यावरणीय अवधारणाओं को आसानी से आत्मसात कर सकें। शिक्षक यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपने घरों में जाकर टपकते नलों को बंद करवाएं, पॉलीथिन के उपयोग का विरोध करें और घर के कचरे को अलग-अलग कूड़ेदानों में डालने की आदत डालें। यह जमीनी जुड़ाव ही इस अभियान को अन्य सामान्य कार्यक्रमों से पूरी तरह अलग और असरदार बनाता है।

उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने इस अभियान की सफलता और इसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार बच्चों को केवल औपचारिक और किताबी शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज और प्रकृति के प्रति जवाबदेह नागरिक बनाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह का आयोजन कोई एक हफ्ते का प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य की पीढ़ियों में ऊर्जा बचत, जल संचयन, प्लास्टिक निषेध और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी आदतों को जीवनभर के लिए रोपने का एक सुनियोजित प्रयास है। बचपन में सीखी गई ये बुनियादी आदतें आगे चलकर देश के पर्यावरण संरक्षण का सबसे अटूट और मजबूत आधार बनेंगी।

शिक्षाविदों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को सीधे जलवायु संरक्षण के व्यावहारिक कदमों से जोड़ना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करता है। जब 1.42 करोड़ बच्चे अपने घरों में प्लास्टिक के नुकसान और बिजली की बचत पर बात करेंगे, तो इसका सीधा असर समाज के करोड़ों परिवारों की सोच पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों से शुरू हुई यह हरित क्रांति आने वाले समय में राज्य को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में देश का अग्रणी राज्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।