
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मूसलाधार बारिश के बाद पैदा हुई जलभराव की भीषण स्थिति और सीवेज प्रबंधन में लापरवाही पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की है। जनसमस्याओं और बुनियादी नागरिक सुविधाओं के प्रति घोर उदासीनता बरतने वाले अफसरों के खिलाफ मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के निर्माण खंड (विद्युत/यांत्रिक) में तैनात अधिशासी अभियंता (एक्जीक्यूटिव इंजीनियर) पवन कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शासन ने न केवल निलंबन की त्वरित कार्रवाई की है, बल्कि उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के कड़े नियम-7 के तहत विभागीय अनुशासनिक जांच भी शुरू कर दी है। नगर विकास विभाग के आधिकारिक आदेश के अनुसार मुख्य अभियंता (क्रय), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), लखनऊ को इस पूरे मामले का पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिन्हें विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
प्रारंभिक तकनीकी जांच और स्थलीय पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को शहर में घुसने से रोकने के लिए तकनीकी आकलन और कार्ययोजना बनाने में भारी लापरवाही बरती गई थी। नदी के जलस्तर में वृद्धि के दौरान आवश्यक गेट अथवा सुरक्षा बैरियर लगाने की कोई पूर्व तैयारी नहीं की गई, जिससे सीवर बैकफ्लो का संकट गहरा गया। सबसे गंभीर लापरवाही 3 और 4 सितंबर को सामने आई, जब लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन और गोईठहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पर स्थापित उच्च क्षमता वाले पंप बंद रखे गए थे। बारिश के पीक आवर्स के दौरान पंपों का समय पर संचालन न होने के कारण शहर की मुख्य सीवर लाइनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया और निकासी पूरी तरह ठप हो गई। इसके परिणामस्वरूप सिगरा, रथयात्रा, चौकाघाट और वरुणा पार के दर्जनों निचले रिहायशी इलाकों में सीवर का गंदा पानी भर गया, जिससे स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को भारी जलजमाव का सामना करना पड़ा।
वाराणसी के कई हिस्सों में जलभराव की विकट समस्या का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने 12 और 13 सितंबर को वाराणसी का सघन स्थलीय निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने चौकाघाट समेत अन्य संवेदनशील पंपिंग स्टेशनों और जलभराव वाले मोहल्लों में पहुंचकर जमीनी हकीकत परखी। बारिश के दौरान पंप बंद रहने और बैकफ्लो से निपटने की पुख्ता योजना न होने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई थी। मंत्री ए.के. शर्मा ने मौके पर ही आलाधिकारियों को तलब कर निर्देश दिए थे कि जल निकासी का काम युद्धस्तर पर पूरा किया जाए और आम जनता को जलभराव के संकट से तुरंत राहत दिलाई जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी थी कि जनता से जुड़े बुनियादी कार्यों में लापरवाही बरतने वाले किसी भी इंजीनियर या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, जिसके बाद शासन स्तर पर यह कठोर निलंबन आदेश जारी किया गया।
शासन द्वारा जारी आधिकारिक निलंबन आदेश के तहत अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबन काल के दौरान मुख्य अभियंता (कानपुर क्षेत्र), उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय), कानपुर कार्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया गया है। नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें केवल निर्धारित जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। शासन ने इस कड़ी कार्रवाई के माध्यम से राज्य के सभी विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों और जल निगम के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि उच्चाधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों की अनदेखी और फील्ड में काम न करने की प्रवृत्ति किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आगामी दिनों में किसी भी शहर में सीवेज ओवरफ्लो और जलभराव की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी पंपिंग स्टेशनों का ऑटोमेशन और वैकल्पिक बैकअप चौबीसों घंटे चालू रखा जाए।
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