
पश्चिम एशिया में जारी लंबे सैन्य टकराव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच अमेरिका और ईरान के बीच की जंग अब सबसे आक्रामक वित्तीय और आर्थिक मोर्चे पर पहुंच गई है। सैन्य अभियानों और बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद भी तेहरान को झुकाने में असफल रहने पर वाशिंगटन ने अब उसकी अंतिम आर्थिक जीवन रेखा को पूरी तरह काट देने का खुला ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने वैश्विक स्तर पर ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ (Operation Economic Outcast) शुरू करते हुए दुनिया भर के देशों को दो-टूक चेतावनी दी है कि वे ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय संबंध तुरंत तोड़ लें, अन्यथा उन्हें अमेरिकी डॉलर-आधारित बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह बेदखल कर दिया जाएगा।
अमेरिकी घोषणा के तुरंत बाद तेहरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के इस “आर्थिक आतंकवाद” का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अमेरिका का ‘इकोनॉमिक डी-डे’: 5 प्रमुख सेक्टरों और 60 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक वित्तीय घेराबंदी शुरू की गई है:
-
5 अहम सेक्टर निशाने पर: अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले 5 प्रमुख क्षेत्रों—डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो), टेक्नोलॉजी, गोल्ड (सोना), एविएशन (विमानन) और शिपिंग (समुद्री परिवहन)—को सीधे तौर पर लक्षित किया है।
-
60 संस्थाओं पर एक्शन: ईरान के मिसाइल, न्यूक्लियर, साइबर और शैडो-फ्लीट (अवैध तेल टैंकर नेटवर्क) से जुड़ी करीब 60 कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए गए हैं।
-
वैश्विक देशों को अल्टीमेटम: स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सभी वित्तीय चैनलों का नक्शा तैयार कर लिया है और दुनिया के हर देश को एक निश्चित समय-सीमा (Defined Timeline) दी जा रही है ताकि वे ईरान से जुड़े सभी लेन-देन और तेल खरीद पूरी तरह बंद कर दें।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हमारा स्पष्ट लक्ष्य तेहरान को सहारा देने वाली हर एक आर्थिक जीवन रेखा को काट देना है ताकि यह शासन पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाए। कोई भी बैंक या संस्था यदि ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग या तेल तस्करी में शामिल पाई गई, तो वह अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दी जाएगी। हमारे प्रतिबंधों के दायरे से कोई भी ऊपर नहीं है।’
ईरान का तीखा पलटवार: ‘हमारा रुख अब रक्षात्मक नहीं, दुश्मन हमले के लिए तैयार रहे’
अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों का नया जाल बिछाए जाने पर ईरानी नेतृत्व ने कड़ा और बेबाक जवाब दिया है:
-
ईरानी वित्त मंत्री का बयान: ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदनीजादेह ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, “हम अमेरिकी प्रतिबंधों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्वाभाविक रूप से दुश्मन हम पर एक आर्थिक आतंकवादी हमला करना चाहता है, लेकिन हमारे पास भी अपने प्रभावी हथियार हैं और हम यह खेल खेलना अच्छी तरह जानते हैं। अब हमारा रुख केवल रक्षात्मक नहीं रहा है; दुश्मनों को हमारे जवाबी वार के लिए तैयार रहना चाहिए।”
-
आईआरजीसी की खुली चेतावनी: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे या ऊर्जा नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो पश्चिम एशिया के सभी महत्वपूर्ण ‘एनर्जी चोकपॉइंट्स’ और अमेरिकी रणनीतिक ठिकानों पर भारी और विनाशकारी चोट की जाएगी।
-
राष्ट्रपति पेजेशकियन का रुख: पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ तेहरान में हुई शांति वार्ता के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका को ईरान से बात करने का अपना लहजा और रवैया बदलना होगा। दादागीरी और आर्थिक दबाव से हालात केवल और अधिक जटिल होंगे, सुलझेंगे नहीं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार और प्रमुख साझेदारों की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भले ही प्रतिबंधों की घोषणा कर रहा हो, लेकिन इसे पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा। ईरान पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच जीवित रहने और पैरेलल बैंकिंग व तीसरे देशों के जरिए व्यापार करने की कला में पारंगत हो चुका है।
इसके साथ ही, यदि अमेरिका चीन, भारत या तुर्की जैसी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की संस्थाओं पर सीधे सेकेंडरी सैंक्शन्स लगाने का जोखिम उठाता है, तो इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली और तेल आपूर्ति में भारी उथल-पुथल मच सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से बने तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच यह नया आर्थिक टकराव दुनिया को एक नए महासंकट की ओर धकेल रहा है।
Focus Times – Focus Times, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया