24 राज्यों में मानसून का रौद्र रूप: बंगाल की खाड़ी से उठा सिस्टम लाएगा मूसलाधार आफत

देश के मौसम परिदृश्य में आज 6 सितंबर 2026 को एक बड़ा और व्यापक मौसमी बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने अखिल भारतीय मौसम बुलेटिन में चेतावनी जारी करते हुए देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में बना एक गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र (Low Pressure System) अब तेजी से मध्य और उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही मानसूनी ट्रफ लाइन अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर सक्रिय है, जिसने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से भारी मात्रा में नमी खींच ली है। इन दो शक्तिशाली वेदर सिस्टम्स के संयोजन के चलते उत्तर, पूर्व, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के विशाल भूभाग पर घने बादलों की चादर फैल गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि आज कई राज्यों में तेज हवाओं की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे के खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन, यातायात और फसलों पर सीधा असर पड़ने की प्रबल आशंका है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आज रविवार का दिन भारी मौसमी उथल-पुथल से भरा रहने वाला है। मौसम विभाग ने दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। दिनभर आसमान में घने काले बादल छाए रहेंगे और दोपहर से देर शाम के बीच कई दौर की तेज गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। मौसम केंद्र सफदरजंग के अनुसार, आज दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री नीचे गिरकर 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने के आसार हैं।

सबसे बड़ी चिंता आज चलने वाली तेज अंधड़ और तूफानी हवाओं को लेकर है, जिनकी गति 50 से 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण दिल्ली के प्रमुख अंडरपासों, धौला कुआं, आईटीओ, रिंग रोड और गुरुग्राम के मुख्य चौराहों पर जलभराव का संकट गहरा सकता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने, पुराने पेड़ों या कमजोर होर्डिंग्स के नीचे वाहन पार्क न करने और जलमग्न सड़कों पर संभलकर चलने की सख्त एडवाइजरी जारी की है।

उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में आज मानसून अपनी पूरी ताकत के साथ सक्रिय रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ ने पूरे उत्तर प्रदेश के लिए व्यापक वर्षा की चेतावनी जारी की है। पश्चिमी यूपी के मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, अलीगढ़, मथुरा और आगरा में तेज आंधी के साथ बारिश होगी। वहीं मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों—लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, बस्ती और रायबरेली में मूसलाधार बारिश के साथ बादलों की तेज गर्जना और बिजली गिरने (Lightning) का हाई अलर्ट जारी किया गया है।

पड़ोसी राज्य बिहार में भी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। पटना मौसम केंद्र ने राज्य के 26 जिलों में भारी वर्षा और आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी की है। राजधानी पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा और कटिहार में रुक-रुक कर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। गंगा, गंडक, कोसी और बागमती जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को तटीय और निचले इलाकों में सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को वज्रपात से बचने के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

मध्य और पश्चिमी भारत के राज्यों में मानसूनी सिस्टम का दबाव सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, नर्मदापुरम, सागर और रीवा समेत 30 से अधिक जिलों में आज भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट प्रभावी है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही वर्षा से बरगी, तवा और इंदिरा सागर बांधों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते कई गेट खोले जा सकते हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है।

उधर, राजस्थान के पूर्वी और मध्य भागों—जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर और भरतपुर में 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी और उसके बाद भीषण बारिश की चेतावनी दी गई है। गुजरात के तटीय और सौराष्ट्र क्षेत्र में भी अरब सागर से उठने वाली नम हवाओं के चलते अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। तेज हवाओं के चलते बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ने की घटनाएं सामने आ सकती हैं, जिसे लेकर विद्युत वितरण कंपनियों की टीमें अलर्ट मोड पर हैं।

उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं के संगम के चलते मौसम अत्यधिक खतरनाक बना हुआ है। उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी में बादल फटने जैसी तीव्र बारिश (Cloudburst-like Rain) और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) का गंभीर खतरा जताया गया है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली, कांगड़ा, मंडी और शिमला में राष्ट्रीय राजमार्गों पर बोल्डर गिरने और नदियों का बहाव तेज होने के कारण पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा से बचने और नदी तटों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भी ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के उफान के चलते बाढ़ का संकट गहरा सकता है। दक्षिण भारत के राज्यों—केरल, तटीय कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी चक्रवाती हवाओं के प्रभाव से रुक-रुक कर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज की जाएगी। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और मुंबई में भी आज दिनभर रुक-रुक कर तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है।

मौसम विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने आज के खराब मौसम को देखते हुए आम जनता और किसानों के लिए जरूरी सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • आकाशीय बिजली से बचाव: तेज मेघगर्जन और बिजली चमकने की स्थिति में किसी भी बड़े पेड़, लोहे के खंभे या टीन शेड के नीचे खड़े होने से बचें। खुले मैदान या खेत में होने पर तुरंत पक्के मकान में शरण लें।

  • सड़क यात्रा में सतर्कता: तेज बारिश के दौरान दृश्यता (Visibility) काफी कम हो सकती है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक अपनी गाड़ियों की फॉग लाइट्स और हेडलाइट्स जलाकर धीमी गति से चलें। जलमग्न अंडरपासों में गाड़ी ले जाने का जोखिम बिल्कुल न लें।

  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग: वज्रपात के समय घर के भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर आदि) के मुख्य प्लग निकाल दें और लैंडलाइन फोन का प्रयोग न करें।

  • किसानों के लिए जरूरी सलाह: खेतों में पानी निकासी के रास्तों को तुरंत साफ रखें ताकि खड़ी फसलों में जलभराव न हो। आगामी 24 से 48 घंटों तक किसी भी प्रकार के कीटनाशक, उर्वरक छिड़काव और सिंचाई के काम को पूरी तरह स्थगित रखें। पशुओं को सुरक्षित व पक्के बाड़े में बांधें।