
दुनिया के सबसे लोकप्रिय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिकटॉक और उसकी चीनी मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) को अमेरिका में एक बहुत बड़ा कानूनी और वित्तीय झटका लगा है। बच्चों की ऑनलाइन प्राइवेसी और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोपों को निपटाने के लिए कंपनी ने अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice – DOJ) को रिकॉर्ड 400 मिलियन डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये से अधिक) का भारी-भरकम जुर्माना और सेटलमेंट राशि चुकाने पर रजामंदी दे दी है। अमेरिकी इतिहास में बच्चों के डेटा संरक्षण कानून यानी चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट (COPPA) के तहत की गई यह अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी में से एक मानी जा रही है। इस समझौते ने पूरी दुनिया में सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा नाबालिगों के निजी डेटा के दुरुपयोग और निगरानी व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी न्याय विभाग और टिकटॉक के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
अमेरिकी न्याय विभाग ने इस ऐतिहासिक समझौते की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे देश के बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ी कानूनी जीत करार दिया है। आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह समझौता न्याय विभाग द्वारा 2024 में दायर किए गए उस मुकदमे का पटाक्षेप करता है, जिसमें फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) की सिफारिशों पर टिकटॉक और बाइटडांस के खिलाफ बच्चों की निजता से खिलवाड़ के पुख्ता सबूत पेश किए गए थे। अमेरिकी एसोसिएट अटॉर्नी जनरल स्टेनली ई. वुडवर्ड जूनियर ने मामले पर अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता डिजिटल मंचों पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी टेक कंपनियां नाबालिगों की व्यक्तिगत जानकारी और डेटा हासिल करती हैं, उन्हें अपनी कानूनी जिम्मेदारियों और जवाबदेही का हर हाल में पालन करना होगा।
विवाद के कानूनी निपटारे और वित्तीय शर्तों की पूरी जानकारी U.S. Department of Justice Statement में विस्तार से साझा की गई है। समझौते के तहत टिकटॉक तत्काल प्रभाव से अमेरिकी संघीय सरकार को 300 मिलियन डॉलर का सीधा भुगतान करेगा। वहीं, शेष 100 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि अदालत द्वारा उस पूर्व सहमति आदेश (Consent Decree) को औपचारिक रूप से रद्द करने के बाद दी जाएगी, जो टिकटॉक की पूर्ववर्ती कंपनी म्यूजिकल.ली (Musical.ly) के खिलाफ जारी किया गया था।
बच्चों के डेटा और COPPA नियमों के उल्लंघन का क्या था पूरा मामला
अमेरिकी कानून के तहत लागू ‘चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट’ (COPPA) बेहद सख्त प्रावधान करता है। इसके मुताबिक, 13 साल से कम उम्र के बच्चों को लक्षित करने वाले किसी भी ऐप, वेबसाइट या ऑनलाइन सर्विस के लिए बच्चों का व्यक्तिगत डेटा (जैसे नाम, ईमेल आईडी, फोन नंबर, जियो-लोकेशन या ब्राउजिंग हिस्ट्री) इकट्ठा करने से पहले उनके माता-पिता या अभिभावकों की स्पष्ट और सत्यापन योग्य सहमति लेना अनिवार्य है।
अमेरिकी सरकार ने अपनी कानूनी चार्जशीट में आरोप लगाया था कि टिकटॉक ने जानबूझकर लाखों ऐसे बच्चों को सामान्य अकाउंट बनाने की खुली छूट दी जिनकी उम्र 13 वर्ष से कम थी। कंपनी ने न केवल बिना माता-पिता की जानकारी और सहमति के इन बच्चों का संवेदनशील निजी डेटा कलेक्ट किया, बल्कि उस डेटा का इस्तेमाल अपने एल्गोरिदम और विज्ञापनों को ट्यून करने में भी किया। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि टिकटॉक के ‘किड्स मोड’ (Kids Mode) में बनाए गए खातों से भी ईमेल पते और अन्य निजी जानकारियां जुटाई जा रही थीं। इसके अलावा, जब अभिभावकों ने टिकटॉक से संपर्क कर अपने बच्चों के अकाउंट्स और कलेक्ट किए गए डेटा को हमेशा के लिए डिलीट करने का अनुरोध किया, तो कंपनी ने उन अपीलों की अनदेखी की और उन प्रोफाइल्स को हटाने में विफलता दिखाई।
मामले की अंतरराष्ट्रीय कवरेज और पृष्ठभूमि को The Hindu News Report के माध्यम से भी समझा जा सकता है।
म्यूजिकल.ली का पुराना इतिहास और दोबारा वही गलतियां
यह पहली बार नहीं है जब इस वीडियो प्लेटफॉर्म को बच्चों की प्राइवेसी के उल्लंघन के लिए निशाने पर लिया गया हो। साल 2017 में बाइटडांस ने अमेरिका के चर्चित वीडियो ऐप ‘म्यूजिकल.ली’ का अधिग्रहण किया था और बाद में उसका विलय टिकटॉक में कर दिया था। साल 2019 में ही फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने म्यूजिकल.ली पर बच्चों की जानकारी चुराने के आरोप में 5.7 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था। उस वक्त कंपनी ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वह भविष्य में बच्चों की प्राइवेसी नीतियों का कड़ाई से पालन करेगी।
हालांकि, अमेरिकी जांच एजेंसियों ने पाया कि नाम बदलने और प्लेटफॉर्म के विशालकाय रूप लेने के बाद भी जमीनी स्तर पर डेटा सुरक्षा के पुराने ढर्रे में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। यही वजह है कि ताजा समझौते में पुराने मामले की शर्तों को नए और अधिक कड़े नियमों के साथ बदला गया है ताकि भविष्य में कोई तकनीकी लूपहोल न बच सके।
सोशल मीडिया दिग्गजों पर बढ़ता ग्लोबल रेगुलेटरी शिकंजा
टिकटॉक पर हुआ यह 400 मिलियन डॉलर का जुर्माना केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में टेक कंपनियों के खिलाफ चल रहे कड़े अभियानों का हिस्सा है। यूरोपीय संघ (EU) ने भी अपने सख्त डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत टिकटॉक के खिलाफ अलग से विस्तृत जांच शुरू कर रखी है, जहां बच्चों के अकाउंट्स को डिफॉल्ट रूप से प्राइवेट न रखने और साइबर बुलिंग से सुरक्षा न देने के आरोपों की समीक्षा की जा रही है। इसी तरह ब्रिटेन की मीडिया नियामक संस्था ऑफकॉम (Ofcom) भी बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर कड़े कदम उठा रही है।
वहीं दूसरी तरफ, इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta Platforms) भी अमेरिका की अदालतों में नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य और प्राइवेसी से जुड़े मुकदमों का सामना कर रही है। इस पूरे मामले के कॉर्पोरेट असर का विश्लेषण The Economic Times Tech Report में भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।
यूजर सेफ्टी और पेरेंटल कंट्रोल को लेकर टिकटॉक के नए कड़े कदम
इस भारी जुर्माने और वर्षों लंबी कानूनी खींचतान से बचने के लिए टिकटॉक ने अपने अमेरिकी संचालन और डेटा प्राइवेसी आर्किटेक्चर में बड़े बदलाव किए हैं। ओरेकल और अन्य अमेरिकी निवेशकों के साथ मिलकर नए जॉइंट वेंचर ढांचे के तहत डेटा सुरक्षा को स्थानीय स्तर पर मजबूत किया गया है। अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, अब सभी नए और पुराने यूजर्स के लिए जन्मतिथि दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उम्र-सत्यापन (Age-Moderation) टूल्स तैनात किए हैं, जो गलत उम्र बताकर ऐप चलाने वाले 13 साल से कम उम्र के बच्चों के खातों की पहचान कर उन्हें ब्लॉक और डिलीट कर रहे हैं। कंपनी ने विशेष मॉडरेशन टीमों का गठन किया है जो हर महीने हजारों संदिग्ध और कम उम्र के खातों को हटा रही हैं।
इस केस का घटनाक्रम यह साफ संदेश देता है कि टेक कंपनियों के लिए केवल यूजर बेस बढ़ाना और विज्ञापन से कमाई करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि आने वाले समय में बाल सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी जैसे मूलभूत कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करने पर भारी भरकम वित्तीय और प्रतिष्ठा संबंधी कीमत चुकानी पड़ेगी।
Focus Times – Focus Times, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया