Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया! जानें कौन हैं भद्रा और इस काल में क्यों नहीं बांधी जाती राखी

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षाबंधन हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हर वर्ष रक्षाबंधन पर बहनों और परिवारों को सबसे बड़ी चिंता ‘भद्रा काल’ की रहती है, क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में भद्रा काल के दौरान राखी बांधना पूर्णतः अशुभ और वर्जित माना गया है। श्रद्धालुओं के लिए बेहद राहत भरी खबर यह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भद्रा का कोई अशुभ साया नहीं रहेगा। पंचांग के अनुसार भद्रा समाप्त हो जाने के कारण पूरे दिन शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जा सकेगी।

कौन हैं भद्रा? जानिए पौराणिक उत्पत्ति की कथा

हिंदू पौराणिक ग्रंथों और धर्मशास्त्रों के अनुसार, भद्रा को भगवान सूर्य देव की पुत्री और न्याय के देवता शनिदेव की सगी बहन माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रा का जन्म दैत्यों के विनाश और उपद्रवियों के दमन के लिए हुआ था। जन्म लेते ही भद्रा का स्वभाव अत्यंत उग्र और विनाशकारी था। वे मांगलिक व धार्मिक कार्यों में विघ्न डालने लगी थीं और सृष्टि के नियमों को प्रभावित करने लगी थीं।

भद्रा के इस उग्र और चंचल स्वभाव को देखकर देवगण और ऋषि-मुनि अत्यंत चिंतित हो गए। तब सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने भद्रा को समझा-बुझाकर नियंत्रित किया और उन्हें काल गणना (पंचांग) के विष्टि करण में एक विशेष स्थान दिया। ब्रह्मा जी ने निर्देश दिया कि जो कोई भी भद्रा के समय में विवाह, गृह प्रवेश, रक्षा सूत्र बंधन या कोई नया शुभ कार्य करेगा, उसके कार्य में विघ्न आ सकते हैं। तभी से भद्रा काल को मांगलिक कार्यों के लिए त्यागने की परंपरा शुरू हुई।

भद्रा काल में राखी बांधना क्यों माना जाता है पूरी तरह वर्जित?

ज्योतिष और वैदिक शास्त्रों में भद्रा काल को अत्यंत अशुभ और संहारक योग माना गया है। शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है— ‘भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा’ अर्थात् भद्रा काल में दो कार्य कदापि नहीं करने चाहिए— पहला, सावन में रक्षाबंधन (श्रावणी) और दूसरा, फाल्गुन में होलिका दहन (फाल्गुनी)।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल के दौरान ही रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके परिणामस्वरूप एक ही वर्ष के भीतर रावण के पूरे कुल और साम्राज्य का विनाश हो गया था। यही कारण है कि भद्रा के मुख और पूंछ के समय में राखी बांधना भाई और परिवार दोनों के लिए अमंगलकारी माना जाता है।

रक्षाबंधन 2026: दिनभर रहेगा रक्षा सूत्र बांधने का पावन अवसर

इस वर्ष रक्षाबंधन पर भद्रा का समय सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाने के कारण दिन के समय भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि में बहनें बिना किसी संशय और रुकावट के पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी। विशेष रूप से दोपहर के अभिजीत मुहूर्त, विजय मुहूर्त और अपराह्न काल में राखी बांधना अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी रहेगा।

राखी बांधने की सही विधि और नियम

  • थाली की तैयारी: पूजा की थाली में शुद्ध घी का दीपक, अक्षत (बिना टूटे चावल), कुमकुम, चंदन, मिठाई और रक्षा सूत्र (राखी) रखें।

  • दिशा का ध्यान: राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जबकि बहन का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर हो सकता है।

  • तिलक और अक्षत: सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत लगाएं।

  • आरती और मिष्ठान: भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठ लगाकर रक्षा सूत्र बांधें, उनकी दीर्घायु के लिए आरती उतारें और अंत में मिठाई खिलाकर आशीर्वाद का आदान-प्रदान करें।