Noida Delhi Sleeper Bus Gangrape: चलती स्लीपर बस में नाबालिग से गैंगरेप पर NHRC सख्त! दिल्ली व नोएडा पुलिस कमिश्नर और DM को नोटिस, 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के नोएडा से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीच संचालित एक निजी स्लीपर बस में नाबालिग किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gangrape) की रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। चलती बस के भीतर घटित इस जघन्य अपराध पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के शीर्ष पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किया है। आयोग ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) की पुलिस कमिश्नर सहित दोनों जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को औपचारिक नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है।

प्रकाश में आई जानकारी के अनुसार, दिल दहला देने वाली यह घटना 4 अगस्त को उस समय घटी जब पीड़िता एक निजी स्लीपर बस में सवार होकर नोएडा से दिल्ली की ओर जा रही थी। आरोप है कि चलती बस के भीतर सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी की निगरानी को धता बताते हुए बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने नाबालिग लड़की को बंधक बना लिया और उसके साथ बारी-बारी से घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़िता को बदहवास हालत में सड़क किनारे छोड़ दिया और मौके से फरार हो गए। पीड़िता किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंची, जिसके बाद परिजनों के सहयोग से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स और प्रारंभिक सूचनाओं के आधार पर मामले को मानवाधिकारों और किसी नागरिक के गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का गंभीर हनन माना है। आयोग ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा कि अंतरराज्यीय मार्गों पर दौड़ने वाली वाणिज्यिक यात्री बसों में इस तरह के अपराध कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा निगरानी तंत्र की गंभीर खामी को उजागर करते हैं।

आयोग ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों पक्षों के अधिकारियों से निम्नलिखित बिंदुओं पर बिंदुवार रिपोर्ट मांगी है:

  • मामले में दर्ज प्राथमिकी (FIR), लागू की गई धाराओं (जिसमें पॉक्सो अधिनियम और बीएनएस की धाराएं शामिल हैं) का विवरण।

  • दोनों आरोपियों (ड्राइवर और कंडक्टर) की गिरफ्तारी, पहचान और न्यायिक हिरासत की वर्तमान स्थिति।

  • क्या संबंधित निजी बस के पास वैध कमर्शियल परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट और यात्रियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य पैनिक बटन व कार्यशील सीसीटीवी कैमरे मौजूद थे?

  • पीड़िता को तुरंत प्रदान की गई चिकित्सा सहायता, कानूनी मदद और पीड़ित मुआवजा योजना के तहत दी गई अंतरिम आर्थिक व मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग का पूरा ब्योरा।

चूंकि घटना उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से शुरू होकर दिल्ली की सीमा तक फैली हुई थी, इसलिए सीमाओं के फेर में जांच में किसी भी तरह की हीलाहवाली या देरी को रोकने के लिए एनएचआरसी ने दोनों अधिकार क्षेत्रों के पुलिस कमिश्नरों को सीधे जवाबदेह बनाया है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अंतरराज्यीय जांच में तालमेल की कोई कमी न रहे और फॉरेंसिक सबूतों को मजबूती से अदालत के समक्ष पेश किया जाए ताकि दोषियों को स्पीडी ट्रायल के जरिए सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

मानवाधिकार आयोग ने दोनों राज्यों के प्रशासनिक तंत्र को दो सप्ताह की सख्त समय-सीमा दी है। तय समय के भीतर रिपोर्ट पेश न किए जाने की स्थिति में आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत संबंधित शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है। इस आदेश के बाद दिल्ली पुलिस और नोएडा पुलिस कमिश्नरेट दोनों ने निजी स्लीपर बसों के रात्रि संचालन, चालक-परिचालकों के पुलिस सत्यापन (Police Verification) और बस अड्डों पर अचानक जांच पड़ताल के अभियानों को तेज कर दिया है।