Kashmir to Assam Rain Havoc: कश्मीर से असम तक बारिश का तांडव! पहलगाम में उफनी लिद्दर नदी, असम में बेकी का जलस्तर खतरे के निशान पार

देश के उत्तरी छोर जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के राज्य असम तक मानसूनी बारिश ने विकराल रूप ले लिया है। पहाड़ों पर लगातार हो रहे बादलों के बरसने और मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख नदियां और बरसाती नाले खतरे के निशान को पार कर चुके हैं। कश्मीर घाटी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में लिद्दर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। वहीं, असम में बेकी, ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में आए उफान ने हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि और दर्जनों गांवों को जलमग्न कर दिया है। दोनों ही संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDRF) और एनडीआरएफ की टीमों को हाई अलर्ट पर तैनात किया गया है।

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में पिछले 48 घंटों से जारी मूसलाधार बारिश और ऊपरी चोटियों पर बर्फ पिघलने के साथ तेज बौछारों के चलते लिद्दर नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया है। नदी की तेज धार और उफनती लहरों को देखते हुए रिवरफ्रंट के आसपास के पार्कों और रास्तों को एहतियातन बंद कर दिया गया है।

अनंतनाग और पहलगाम विकास प्राधिकरण (PDA) ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों को नदी के किनारों, अस्थायी पुलों और कटाव वाले तटों के पास न जाने की सख्त हिदायत दी है। कई निचले कस्बों में पानी घुसने के खतरे को देखते हुए किनारे बसे परिवारों को सुरक्षित राहत शिविरों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। झेलम नदी बेसिन में भी जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और पड़ोसी देश भूटान के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से भारी मात्रा में छोड़े गए पानी के कारण असम में बाढ़ का संकट गहरा गया है। बारपेटा, बक्सा और धुबरी जिलों से होकर बहने वाली बेकी नदी (Beki River) कई स्थानों पर लाल निशान के ऊपर बह रही है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बारपेटा और निचले असम के कई तटबंधों पर पानी का भारी दबाव बना हुआ है। सड़कों पर 2 से 3 फीट पानी बहने के कारण ग्रामीण इलाकों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है। हजारों एकड़ में लहलहाती धान की फसलें डूब चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में नावों के जरिए राहत सामग्री, सूखा राशन और पीने का साफ पानी पहुंचाना शुरू कर दिया है।

कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के चलते भूस्खलन (Landslides) और पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) और कई आंतरिक संपर्क मार्गों पर मलबा आने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। फल उत्पादकों और व्यापारियों के मालवाहक ट्रक विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। वहीं असम में ब्रह्मपुत्र नदी में नौका सेवाएं तेज धारा और तैरते मलबे के कारण एहतियातन रोक दी गई हैं, जिससे नदी पार करने वाले ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा बुलेटिन में चेतावनी दी है कि पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के संयोजन के कारण जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में अगले 72 घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने दोनों राज्यों में 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक बुलेटिन और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।