
अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की प्रतिदिन उमड़ रही लाखों की भीड़ को संभालने, सुरक्षा, व्यवस्था और पारदर्शी प्रबंधन के लिए अब एक ऐतिहासिक प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज मंदिर परिसर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम की आधिकारिक घोषणा करने जा रहा है। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे तिरुपति बालाजी और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर अब राम मंदिर को भी एक पूर्णकालिक, पेशेवर और प्रशासनिक रूप से दक्ष प्रशासनिक अधिकारी मिलने जा रहा है। ट्रस्ट की इस बड़ी पहल से अयोध्या में प्रशासनिक सुधारों की एक नई एक्सप्रेस रफ्तार पकड़ने वाली है, जिसका सीधा उद्देश्य रामलला के दर्शन को विश्वस्तरीय और सुगम बनाना है।
22 जनवरी के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद से अयोध्या में देश-विदेश से आने वाले रामभक्तों की संख्या में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। सामान्य दिनों में जहां 1 लाख से डेढ़ लाख श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं, वहीं विशेष तिथियों, रामनवमी, सावन और त्योहारी सीजन में यह संख्या 3 से 5 लाख प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। इतने विशाल जनसैलाब के लिए केवल पारंपरिक व्यवस्थाओं के भरोसे काम चलाना संभव नहीं था।
मंदिर परिसर में दर्शन प्रबंधन, वीआईपी मूवमेंट, सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय, दान-दक्षिणा की ऑनलाइन-ऑफलाइन ऑडिटिंग, 70 एकड़ के राम जन्मभूमि परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं (जैसे सुलभ पेयजल, व्हीलचेयर, लॉकर, चिकित्सा और अन्नक्षेत्र) के संचालन के लिए एक शीर्ष स्तर के पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की दरकार थी। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के लंबे मंथन के बाद कॉरपोरेट और लोक प्रशासन के हाइब्रिड मॉडल वाले सीईओ पद को मंजूरी दी गई।
भारत में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD), श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) और शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट जैसे बोर्डों में आईएएस रैंक के अधिकारी सीईओ या कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer) के रूप में तैनात रहते हैं। हालांकि, अयोध्या का यह नया प्रशासनिक मॉडल कई मायनों में अनूठा और अलग होने जा रहा है।
वैष्णो देवी और तिरुपति देवस्थानम सीधे तौर पर संबंधित राज्य सरकारों (जम्मू-कश्मीर प्रशासन और आंध्र प्रदेश सरकार) के वैधानिक अधिनियमों (Acts) द्वारा संचालित होते हैं। इन बोर्डों में सरकार का हस्तक्षेप और राजनीतिक नियुक्तियों का प्रभाव अक्सर देखने को मिलता है। इसके विपरीत, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एक स्वतंत्र, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप केंद्र सरकार द्वारा गठित स्वायत्त चैरिटेबल ट्रस्ट है। यहां नियुक्त होने वाले सीईओ सीधे तौर पर ट्रस्ट बोर्ड और मंदिर निर्माण समिति के प्रति जवाबदेह होंगे, न कि किसी एक राज्य सरकार के मंत्रालय के अधीन। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रशासनिक फैसलों में राजनीतिक दबाव नगण्य रहेगा और निर्णय प्रक्रिया अत्यधिक तेज होगी।
राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी को केवल धार्मिक रीतियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें पूरे परिसर के संचालन के लिए व्यापक अधिकार दिए जाएंगे:
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भीड़ नियंत्रण और स्मार्ट दर्शन प्रणाली: तिरुपति की तरह टाइम-स्लॉट आधारित दर्शन कतार प्रबंधन, डिजिटल पास, फेशियल रिकग्निशन आधारित एंट्री सिस्टम और बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए सहज दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना।
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पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन: देश-दुनिया से आ रहे करोड़ों के समर्पण और आभूषणों का रियल-टाइम ऑडिट, डिजिटल डोनेशन ट्रैकिंग और बैंक अकाउंट्स का पेशेवर प्रबंधन।
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सुरक्षा एजेंसियों से तालमेल: उत्तर प्रदेश पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स (STF), पीएसी (PAC) और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ समन्वय बनाकर परिसर को अभेद्य सुरक्षा घेरे में रखना।
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70 एकड़ परिसर का मेंटेनेंस: परिसर में बन रहे परकोटा, सप्तमंडपम, अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय, ऑडिटोरियम, अत्याधुनिक यात्री सुविधा केंद्र (PFC) और ग्रीन कैंपस का दैनिक रखरखाव।
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अन्नक्षेत्र और प्रसाद वितरण: लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रतिदिन संचालित होने वाले विशाल भंडारों, स्वच्छता और वैज्ञानिक तरीके से प्रसादम की पैकेजिंग व वितरण की निगरानी।
सूत्रों के मुताबिक, पहले सीईओ के पद के लिए प्रशासनिक सेवा (IAS) के रिटायर्ड या सेवारत वरिष्ठ नौकरशाह, जिन्होंने बड़े पैमाने पर मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, कुंभ मेला प्रबंधन या प्रमुख धार्मिक कॉरिडोर के संचालन में उल्लेखनीय कार्य किया हो, उनके नामों पर गंभीरता से विचार किया गया है। चयन समिति ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि संबंधित अधिकारी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं, आधुनिक तकनीक और वित्तीय पारदर्शिता की गहरी समझ हो।
सीईओ के साथ एक समर्पित कोर सचिवालय (Secretariat) भी कार्य करेगा, जिसमें आईटी, लॉजिस्टिक्स, पब्लिक रिलेशंस, सिक्योरिटी और अकाउंट्स के अलग-अलग एक्सपर्ट्स शामिल होंगे। यह ढांचा अयोध्या को वैश्विक स्तर पर वैटिकन सिटी और मक्का की तरह आधुनिक तीर्थ प्रबंधन के केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे के पेशेवर होते ही पूरे अयोध्या क्षेत्र के स्थानीय विकास, होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्टेशन और धार्मिक पर्यटन को एक बड़ा बूस्ट मिलेगा। अभी कई बार दर्शन के लिए घंटों कतारों में लगने वाले श्रद्धालुओं को असमंजस का सामना करना पड़ता है, लेकिन सीईओ की निगरानी में सिंगल-विंडो सिस्टम लागू होने से यात्रियों का समय बचेगा और वे अयोध्या के अन्य पौराणिक स्थलों जैसे हनुमानगढ़ी, कनक भवन, सूर्य कुंड और सरयू घाटों का भी सुगमता से भ्रमण कर सकेंगे।
सीईओ पद का सृजन केवल एक प्रशासनिक पद की नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह अयोध्या के सांस्कृतिक पुनर्जागरण को 21वीं सदी की आधुनिक प्रबंधन तकनीकों से जोड़ने का एक ऐतिहासिक कदम है। आज नाम का औपचारिक ऐलान होते ही मंदिर परिसर में सुधारों और विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं का एक नया अध्याय शुरू हो जाएगा।
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