
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव के अपने महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे के दौरान वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने दुनिया के सामने यह बात पूरी दृढ़ता के साथ दोहराई है कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस लंबे और विनाशकारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने और किसी भी प्रकार का रचनात्मक योगदान देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। वर्तमान समय में जब पूरा विश्व भू-राजनीतिक उथल-पुथल, ऊर्जा संकट, आर्थिक अस्थिरता और मानवीय त्रासदी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में भारत का यह रुख पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। नई दिल्ली ने हमेशा से ही इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति की मेज पर ही निकल सकता है।
यह बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक यात्रा तीन से पांच सितंबर के बीच निर्धारित की गई है, जिसमें विदेश मंत्री यूक्रेन के साथ-साथ पोलैंड के भी दौरे पर हैं। रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ पूर्णिया सैन्य कार्रवाई और बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए जाने के बाद से कीव की धरती पर भारतीय विदेश मंत्री की यह पहली उच्च-स्तरीय यात्रा है। अपनी इस तीन दिवसीय सामरिक और कूटनीतिक यात्रा के दौरान, एस. जयशंकर यूक्रेन के शीर्ष नेतृत्व, प्रमुख समकक्षों तथा पोलैंड के उप प्रधानमंत्री रोडोस्लाव सिकोरस्की के साथ गहन द्विपक्षीय चर्चा कर रहे हैं। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करना है, बल्कि उन संभावित कूटनीतिक रास्तों की तलाश करना भी है जिनके माध्यम से भारत वैश्विक शांति बहाली के प्रयासों में एक निष्पक्ष और विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शांति संदेश की गूंज: अंतहीन युद्ध से शांति की ओर बढ़ना जरूरी
कीव में विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा दिया गया यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वैश्विक शांति आह्वान का सीधा विस्तार है, जो उन्होंने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया था। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के इतर बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि संघर्ष के समाधान के लिए अब समय आ गया है कि दुनिया ‘अंतहीन युद्ध से युद्ध की समाप्ति की ओर’ आगे बढ़े। प्रधानमंत्री ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ यह बात रेखांकित की थी कि युद्ध में बर्बाद होने वाला प्रत्येक दिन पूरी मानवता को कई कदम पीछे धकेल देता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर छोटा कदम मानव समाज में एक नई उम्मीद, सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है।
भारत की यह कूटनीतिक पहल महात्मा बुद्ध और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की उस पावन भूमि के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसने हमेशा पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक समुदाय को यह याद दिलाया है कि आज की तारीख में मानवता की सबसे बड़ी और प्राथमिक पुकार यही है कि तमाम क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए। आज ग्लोबल साउथ की एक सशक्त और भरोसेमंद आवाज के रूप में भारत विकासशील और विकसित देशों के बीच संवाद स्थापित करने का एक मजबूत सेतु बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं की बहाली और आम नागरिकों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण हमेशा से मानवीय और व्यावहारिक रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा, काला सागर के हालात और भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष चिंता
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यह कीव यात्रा ऐसे संवेदनशील और तनावपूर्ण समय में हो रही है जब कूटनीतिक हलकों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ी हुई हैं। हाल ही में कीव में हुए एक भीषण रूसी हवाई हमले की चपेट में आने से एक भारतीय नागरिक की असामयिक मौत हो गई थी, जिसने भारत सरकार और देशवासियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दुखद घटना के बाद नई दिल्ली ने कड़े शब्दों में अपनी चिंता दर्ज कराई है और विदेश धरती पर रह रहे प्रत्येक भारतीय नागरिक की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। इसके अलावा, भारत ने काला सागर (Black Sea) के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर मालवाहक और व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की है, क्योंकि ये मार्ग वैश्विक व्यापार और खाद्य सामग्री की आपूर्ति के लिए बेहद अहम हैं।
इन तमाम जटिल चुनौतियों और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) पर कायम रहते हुए दुनिया भर में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत का यह स्पष्ट रुख कि वह संघर्ष को समाप्त करने में हरसंभव सहायता देने को तैयार है, युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुंचाने और शांति के मार्ग को प्रशस्त करने की उसकी मंशा को दर्शाता है। जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस भीषण संकट का कोई स्थायी समाधान तलाशने का प्रयास कर रहा है, भारत की यह शांतिपूर्ण कूटनीति वैश्विक पटल पर एक नई आशा की किरण बनकर उभर रही है, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया को एक स्थिर, सुरक्षित और सहयोगात्मक भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।
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