
वैश्विक स्वास्थ्य जगत के लिए एक बार फिर से बेहद चिंताजनक और डरावनी खबरें सामने आ रही हैं। मध्य अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस (Ebola Virus) ने एक बार फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। स्वास्थ्य संगठनों और स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, कांगो में इबोला संक्रमण के कुल मामलों का आंकड़ा अब 6,100 के पार पहुंच चुका है, जो इस बीमारी की व्यापकता को दर्शाता है। सबसे भयावह पहलू यह है कि इस जानलेवा संक्रमण के कारण अब तक 3,000 से अधिक बेकसूर लोगों की मौत हो चुकी है। यह खतरनाक वायरस जिस रफ्तार से फैल रहा है, उसने न केवल कांगो बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की भी नींद उड़ा दी है।
इतिहास गवाह है कि इबोला दुनिया के सबसे घातक और तेजी से जान लेने वाले वायरसों में से एक माना जाता है, जिसकी चपेट में आने वाले मरीज के बचने की उम्मीद बहुत कम हो जाती है। कांगो में इस महामारी के बेकाबू होने के बाद से बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी को अत्यधिक सतर्क और सावधान रहने की सख्त हिदायत दी जा रही है। चूँकि वैश्वीकरण के इस दौर में किसी भी महामारी के एक देश से दूसरे देश में फैलने में ज्यादा समय नहीं लगता, इसलिए भारत और अन्य एशियाई देशों में भी इसे लेकर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इबोला वायरस क्या है, इसके शुरुआती और गंभीर लक्षण कैसे होते हैं, यह कैसे फैलता है और इस घातक बीमारी से बचने के लिए हमें कौन-कौन से एहतियाती कदम उठाने चाहिए।
इबोला वायरस के लक्षण: शुरुआती ‘ड्राई’ लक्षणों से लेकर गंभीर ‘वेट’ लक्षणों तक का सफर
किसी भी खतरनाक बीमारी से समय रहते निपटने के लिए उसके लक्षणों की सही पहचान होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (CDC) की गाइडलाइंस और मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, इबोला वायरस के संक्रमण शरीर में प्रवेश करने के बाद अपना असर दिखाने में औसतन 2 से 21 दिनों का समय लेते हैं। हालांकि, अधिकांश मामलों में संक्रमित होने के 8 से 10 दिनों के भीतर ही मरीजों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। इस बीमारी के संक्रमण को डॉक्टरों ने दो चरणों में विभाजित किया है, जिन्हें ‘ड्राई सिम्टम्स’ और ‘वेट सिम्पटम्स’ कहा जाता है। संक्रमण की शुरुआत बेहद सामान्य और अन्य वायरल बीमारियों जैसी होती है, जिससे कई बार लोग इसे साधारण बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
इबोला के शुरुआती यानी ‘ड्राई’ लक्षणों में मरीज को अचानक तेज बुखार आना, पूरे शरीर में भयंकर दर्द होना, जोड़ों और मांसपेशियों में खिंचाव या जकड़न महसूस होना, तथा अत्यधिक थकान व कमजोरी शामिल हैं। जैसे-जैसे यह वायरस शरीर के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करता है और अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू करता है, वैसे-वैसे इसके लक्षण अत्यधिक गंभीर यानी ‘वेट’ सिम्पटम्स में बदलने लगते हैं। इस दूसरे चरण में मरीज को लगातार और गंभीर दस्त (Diarrhea) की शिकायत होती है, बार-बार उल्टियां होने लगती हैं, और सबसे खतरनाक बात यह है कि शरीर के अंदरूनी हिस्सों से ब्लीडिंग (Internal Bleeding) शुरू हो जाती है। नाक, मसूड़ों और पाचन तंत्र से खून बहने के कारण मरीज की स्थिति कुछ ही घंटों में बेहद नाजुक हो जाती है और समय पर इलाज न मिलने पर उसकी मौत हो जाती है।
हवा से नहीं फैलता इबोला: जानें यह जानलेवा वायरस आखिर कैसे इंसानों को बनाता है शिकार
आम जनता के मन में अक्सर यह बहुत बड़ा डर रहता है कि क्या इबोला वायरस हवा के जरिए कोरोना की तरह फैल सकता है? इस भ्रम को दूर करते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इबोला वायरस कभी भी हवा या सांस के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई संक्रमित व्यक्ति आपके पास से गुजर रहा है या आप किसी ऐसी जगह पर हैं जहां कोई इबोला का मरीज मौजूद है, तो केवल हवा के संपर्क में आने से आपको यह बीमारी नहीं होगी। यह वायरस तभी फैलता है जब कोई स्वस्थ व्यक्ति किसी संक्रमित या इस बीमारी से मृत हो चुके व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (Body Fluids) के सीधे संपर्क में आता है।
इसके अलावा, चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, जब तक किसी संदिग्घ व्यक्ति में इबोला के खुद के स्पष्ट लक्षण प्रकट नहीं होने लगते, तब तक वह दूसरों में इस वायरस को नहीं फैला सकता। लेकिन एक बार जब लक्षण दिखने शुरू हो जाएं, तो मरीज का पसीना, लार, उल्टी, मल, मूत्र, मां का दूध और अन्य शारीरिक फ्लूइड्स बेहद संक्रामक हो जाते हैं। इसके साथ ही, इबोला संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके व्यक्तियों के स्पर्म (वीर्य) के जरिए भी यह वायरस कुछ समय तक फैल सकता है, जब तक कि मेडिकल टेस्ट यह पुष्टि न कर दें कि उनके शरीर से वायरस पूरी तरह समाप्त हो चुका है। इंसानों के अलावा यह वायरस जंगली जानवरों जैसे कि चमगादड़, जंगली हिरण, बंदर और चिंपैंजी के संपर्क में आने से भी इंसानों में फैल सकता है।
इबोला संक्रमण के खतरे से बचने के लिए किन बातों और सावधानियों का रखना चाहिए ध्यान
चूंकि इबोला वायरस के इलाज के लिए बहुत सीमित और महंगी दवाएं ही उपलब्ध हैं, इसलिए इस महामारी से बचने का सबसे अचूक और एकमात्र तरीका अत्यधिक सावधानी बरतना और बचाव के नियमों का कड़ाई से पालन करना है। चूंकि यह बीमारी बॉडी फ्लूइड्स के जरिए फैलती है, इसलिए किसी भी बीमार या संदिग्ध व्यक्ति के यूरिन, मल, लार, पसीने, उल्टी और अन्य शारीरिक स्रावों के सीधे संपर्क में आने से पूरी तरह बचना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में इस बीमारी का प्रकोप फैला हुआ है, तो वहां के अस्पतालों या घरों में मरीज के इस्तेमाल किए गए कपड़े, बिस्तर, मेडिकल सुई, सिरिंज और अन्य वस्तुओं को छूने से सख्त परहेज करना चाहिए। यदि किसी संक्रमित व्यक्ति की दुर्भाग्यवश मृत्यु हो जाती है, तो उसके अंतिम संस्कार के दौरान भी विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होता है ताकि वायरस आगे न फैले।
इंसानों के अलावा हमें जंगली जानवरों के मांस (Bushmeat) के सेवन और उनके सीधे संपर्क में आने से भी बचना चाहिए, क्योंकि कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि चमगादड़ और बंदर जैसे जानवर इस वायरस के प्राकृतिक संवाहक (Natural Reservoirs) होते हैं। अफ्रीकी देशों या ऐसे क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और कामगारों को स्थानीय स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में बुखार या शरीर दर्द जैसे संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत आइसोलेट करके नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए ताकि समय रहते उचित मेडिकल सपोर्ट मिल सके। सतर्कता, स्वच्छता और सही समय पर एहतियात बरतकर ही इस भयानक महामारी के चक्रव्यूह को तोड़ा जा सकता है और अनमोल मानव जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
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